25 साल से उलझा ‘पैतृक संपत्ति विवाद’, जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने खुला राज
Reported by: अमित शर्मा | Edited by: आकाश शर्मा
18 अगस्त 2026, (अपडेटेड 18 अगस्त 2026, 2:51 अपराह्न IST)

नीमच। जब खून के रिश्ते ही हक मारने पर उतारू हो जाएं, तो इंसान न्याय के लिए किस दरवाजे पर दस्तक दे? मंगलवार को नीमच जिले की जनसुनवाई में एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। यह कोई सामान्य शिकायत नहीं थी, बल्कि पिछले ढाई दशकों से सुलग रहा एक गहरा पैतृक संपत्ति विवाद था, जिसने स्थानीय राजस्व तंत्र और पारिवारिक रिश्तों दोनों की असलियत सामने लाकर रख दी है। मनासा तहसील के एक छोटे से गांव से आए ग्रामीण ने जब कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के सामने अपनी फाइल खोली, तो अपनों के धोखे का एक बड़ा राज बेनकाब हो गया।

रास्ते का पहरा और हक से बेदखली का सच

मनासा तहसील के ग्राम लसुडियाआंत्री निवासी गणेश पिता रमेशचंद्र खटीक वह पीड़ित हैं, जो पिछले 20-25 वर्षों से सरकारी दफ्तरों की खाक छान रहे हैं। जनसुनवाई में दिए गए उनके आवेदन ने इस बात को पुख्ता कर दिया है कि कैसे ग्रामीण इलाकों में ज़मीन के लालच में अपनों को ही दरकिनार कर दिया जाता है।

इस पैतृक संपत्ति विवाद की जड़ें काफी गहरी हैं। गणेश का सीधा आरोप है कि उनके हिस्से के प्लाटों पर जाने का इकलौता रास्ता उनके ही परिजनों ने जबरन बंद कर दिया है। हालात यह हैं कि पुश्तैनी कृषि भूमि में कानूनी रूप से एक-चौथाई (1/4) हिस्सा होने के बावजूद, उन्हें न तो जमीन का कोई टुकड़ा दिया जा रहा है और न ही उस जमीन पर उगने वाली फसल का कोई लाभ मिल रहा है। यह सिर्फ एक पारिवारिक झगड़ा नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति को उसके मूल अधिकारों से वंचित करने की सोची-समझी साजिश नजर आती है।

ग्राम स्वामित्व योजना में ‘खेल’ का चौंकाने वाला आरोप

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सस्पेंस तब सामने आया जब ‘ग्राम स्वामित्व योजना’ का जिक्र हुआ। केंद्र सरकार की यह योजना ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का मालिकाना हक देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन गणेश के मामले में इस योजना के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगा है।

आवेदक का दावा है कि इस योजना के तहत हुए सर्वे में भारी हेराफेरी की गई है। जिन प्लाटों पर उनका वास्तविक और कानूनी हक था, उन्हें सर्वे के दौरान साजिशन अन्य लोगों (परिजनों) के नाम पर दर्ज करवा दिया गया। यदि प्रशासन की जांच में यह आरोप सच साबित होता है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस पैतृक संपत्ति विवाद में केवल परिवार ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर रिकॉर्ड तैयार करने वाले राजस्व अमले की भी संदिग्ध भूमिका रही है।

25 साल का लंबा संघर्ष: मुख्य मांगें

एक आम ग्रामीण का 20-25 साल तक केवल अपने हक के लिए भटकना, व्यवस्था की सुस्ती पर करारा तमाचा है। गणेश ने कलेक्टर से गुहार लगाते हुए स्पष्ट रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • रास्ते की बहाली: प्लाट पर आने-जाने के लिए परिजनों द्वारा अवैध रूप से बंद किए गए रास्ते को तुरंत खुलवाया जाए।

  • संपत्ति का बंटवारा: पुश्तैनी जमीन में एक-चौथाई हिस्से का राजस्व नियमों के तहत सीमांकन कर वैधानिक कब्जा दिलाया जाए।

  • रिकॉर्ड में सुधार: ग्राम स्वामित्व योजना के तहत गलत तरीके से दर्ज किए गए नामों की जांच हो और रिकॉर्ड को सुधारा जाए।

यह मामला अब सीधे जिले के कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के संज्ञान में आ चुका है। मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत ऐसे मामलों में रास्ता खुलवाने और बंटवारा करने के स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। सवाल यह है कि क्या इस पैतृक संपत्ति विवाद का अब कोई ठोस समाधान निकलेगा, या यह फाइल भी लाल फीताशाही के बीच कहीं दब जाएगी? 25 साल से न्याय की आस लगाए बैठे गणेश के लिए जनसुनवाई आखिरी उम्मीद है। प्रशासन का अगला कदम ही तय करेगा कि इस धोखे की कहानी का अंत न्याय के साथ होगा या नहीं।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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