नीमच। जन्माष्टमी के पूर्व शहर में विद्यार्थियों ने कृष्णमय वातावरण के बीच शोभायात्रा निकाली। नीमच कृष्ण शोभायात्रा में 1460 विद्यार्थी और 108 गुरुजी शामिल हुए। सुबह 9 बजे विकास नगर स्थित विद्यालय से शुरू हुई यात्रा ने करीब 3 घंटे में 3 किलोमीटर का सफर तय किया और वापस विद्यालय पहुंची। विवेकानंद बाल कल्याण समिति द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी और सीबीएसई सैनिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने गुरुजी के साथ इस आयोजन में भाग लिया। शोभायात्रा में फूलों से श्रृंगारित रथ में बालकृष्ण यानी लड्डू गोपाल को विराजित किया गया था।
विद्यार्थी रथ को हाथों से खींचते हुए आगे बढ़े और जयकारे लगाते रहे। यात्रा के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। मार्ग में कई स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
3 घंटे में 3 किलोमीटर का सफर
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आयोजन की खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी के बावजूद शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए करीब 3 घंटे में 3 किलोमीटर का सफर तय कर वापस विद्यालय पहुंची। शोभायात्रा का मार्ग विद्यालय से शुरू होकर झूलेलाल मंदिर, आंबेडकर मार्ग, गायत्री मंदिर रोड, कमल चौक, फव्वारा चौक, नया बाजार, घंटाघर, पुस्तक बाजार, जैन भवन रोड और एलआईसी रोड होते हुए वापस विद्यालय तक रहा।
इस दौरान विद्यार्थियों ने अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों के साथ भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को प्रस्तुत किया।
कृष्ण लीलाओं पर आधारित रहीं झांकियां
शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इनमें श्रीकृष्ण जन्म, गोवर्धन पर्वत, सुदामा मिलन, सांदीपनि आश्रम, द्वारकाधीश और राधा-कृष्ण से जुड़े प्रसंग शामिल रहे। इसके अलावा खाटू श्याम, गौसेवा, भारत माता, महारानी अहिल्या देवी और भारतीय सेना से जुड़े दृश्य भी झांकियों में प्रस्तुत किए गए।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में स्वयंसेवकों का बाल दल, कालिया नाग मर्दन, गीता उपदेश, श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप और संत रविदास से जुड़े प्रसंग भी शामिल रहे।
मराठी परिधान और लेझिम नृत्य रहा आकर्षण
शोभायात्रा में सांस्कृतिक विविधता भी दिखाई दी। मराठी परिधानों में बालिकाओं ने लेझिम के साथ नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के स्वरूप में तलवारबाजी का प्रदर्शन भी किया गया। शोभायात्रा में बैंड वादन भी शामिल रहा। अलग-अलग प्रस्तुतियों के बीच विद्यार्थी निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते रहे। भारत माता चौक पर विद्यार्थियों ने भजनों पर भक्ति नृत्य भी प्रस्तुत किया। इस तरह शोभायात्रा में धार्मिक प्रसंगों के साथ देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति से जुड़े संदेशों को भी प्रस्तुत किया गया।
108 गुरुजी ने संभाला अनुशासन
आयोजन में 1460 विद्यार्थियों के साथ 108 गुरुजी की भागीदारी रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक गुरुजी ने शोभायात्रा के दौरान विद्यार्थियों के अनुशासन की जिम्मेदारी संभाली। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी के कारण यात्रा के दौरान अनुशासन और व्यवस्था महत्वपूर्ण रही। विद्यार्थियों ने पैदल चलते हुए विभिन्न प्रस्तुतियों में भाग लिया और रथ को भी आगे बढ़ाया।
जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत
नीमच कृष्ण शोभायात्रा के निर्धारित मार्ग पर जगह-जगह नागरिकों ने विद्यार्थियों और शोभायात्रा का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। फूलों से सजे रथ में विराजित बालकृष्ण के साथ चल रहे विद्यार्थियों ने जयकारे लगाए। शोभायात्रा में शामिल झांकियों में श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों और जीवन प्रसंगों को प्रदर्शित किया गया। इससे पूरे आयोजन में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण दिखाई दिया।
पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश
आयोजन में केवल धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक ही गतिविधियां सीमित नहीं रहीं। विद्यार्थियों ने पैदल यात्रा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। इसके साथ ही झांकियों और प्रस्तुतियों में राष्ट्रभाव से जुड़े प्रसंगों को भी स्थान दिया गया। भारत माता और भारतीय सेना से संबंधित प्रस्तुतियां इसी क्रम का हिस्सा रहीं।
सनातन संस्कृति की झलक दिखाने का प्रयास
जन्माष्टमी से पहले आयोजित इस शोभायात्रा में विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को अलग-अलग प्रस्तुतियों के जरिए सामने रखा।श्रीकृष्ण जन्म से लेकर गोवर्धन पर्वत, सुदामा मिलन, गीता उपदेश और विराट स्वरूप जैसे प्रसंगों को झांकियों में शामिल किया गया। वहीं राधा-कृष्ण, गौसेवा और सांदीपनि आश्रम से जुड़े प्रसंगों ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक पक्ष को प्रस्तुत किया। शोभायात्रा के समापन पर विद्यार्थी वापस विद्यालय पहुंचे।
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