नीमच। सोमवार देर रात करीब 11:45 बजे शहर के गांधी वाटिका स्थित रतन देवी मांगलिक भवन के सामने मौजूद लगभग 65 साल पुरानी जर्जर इमारत का ऊपरी बाहरी छज्जा अचानक गिर गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि जिस भवन का हिस्सा गिरा, उसमें वर्तमान में 14 से अधिक परिवार अब भी रह रहे हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर ‘बेधड़क बिल्डिंग’ के नाम से पहचानी जाने वाली यह इमारत लंबे समय से जर्जर स्थिति में बताई जा रही है। घटना के बाद आसपास के लोगों में चिंता का माहौल है।
जर्जर बिल्डिंग का छज्जा गिरा, बारिश और रात होने से टला बड़ा हादसा


प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार सोमवार रात तेज बारिश के बीच बिल्डिंग का ऊपरी बाहरी हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। घटना के समय देर रात होने और बारिश के कारण आसपास लोगों की आवाजाही नहीं थी। इसी वजह से कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया। यदि यह हिस्सा दिन के समय गिरता, जब इलाके में सामान्य रूप से लोगों की आवाजाही रहती है, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
14 से अधिक परिवार अब भी उसी भवन में रह रहे
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इस जर्जर भवन में वर्तमान में 14 से अधिक परिवार किराए पर रह रहे हैं। मकान मालिक सहित यहां 55 से अधिक सदस्य निवासरत बताए गए हैं। इमारत की स्थिति लंबे समय से कमजोर बताई जा रही है, लेकिन इसके बावजूद भवन खाली नहीं कराया गया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भवन में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।
वर्षों पुरानी इमारत, स्थानीय लोग ‘बेधड़क बिल्डिंग’ के नाम से जानते हैं

गांधी वाटिका क्षेत्र स्थित यह भवन करीब 65 वर्ष से अधिक पुराना बताया जा रहा है। स्थानीय लोग इसे लंबे समय से ‘बेधड़क बिल्डिंग’ के नाम से जानते हैं। जानकारी के अनुसार भवन का ढांचा काफी पुराना और कमजोर हो चुका है। सोमवार रात गिरे हिस्से ने इसकी जर्जर स्थिति को फिर उजागर कर दिया।
प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है, लेकिन अब तक इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। मौके पर मौजूद लोगों ने मांग की कि शहर में ऐसे सभी जर्जर भवनों की पहचान कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रशासन की ओर से इस घटना पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया है।
पहले भी जिले में हो चुके हैं ऐसे हादसे
जिले में इससे पहले भी जर्जर भवनों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सिंगोली में पूर्व में एक जर्जर भवन गिरने की घटना में मां और बेटे की मौत हो चुकी थी। इसके अलावा जिले के अन्य क्षेत्रों में भी पुराने और कमजोर भवनों से संबंधित घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं के बाद भी जर्जर भवनों की सुरक्षा और निगरानी का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है।
जर्जर भवनों की पहचान और सुरक्षा उपायों की जरूरत
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि बरसात के मौसम में पुराने और कमजोर भवनों पर विशेष निगरानी आवश्यक होती है। समय रहते ऐसे भवनों का तकनीकी निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत या सुरक्षा मानकों के अनुरूप कार्रवाई की जाए तो संभावित हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे भवनों को चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने से भविष्य में जान-माल के नुकसान की संभावना कम हो सकती है।
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