नीमच: प्रदेश सहित कई शहरों में शक्कर के दाम करीब ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ₹65 प्रति किलो तक के रिटेल भाव सामने आने की जानकारी है। थोक बाजार में मध्यम दाने की शक्कर ₹58.50 और मोटे दाने की ₹59.50 प्रति किलो बताई जा रही है।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि शक्कर महंगी क्यों हो रही है। बड़ा सवाल यह है कि जब गन्ना चीनी बनाने के साथ एथेनॉल उत्पादन के लिए भी इस्तेमाल हो रहा है, तब घरेलू बाजार में मिठास कितनी बचेगी और उसकी कीमत कितनी चुकानी पड़ेगी?
देश में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की नीति के बीच गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल चीनी की उपलब्धता और बाजार संतुलन से जुड़ा मुद्दा बन गया है। हाल की रिपोर्टों में भी रिकॉर्ड ऊंची चीनी कीमतों के बीच सरकार द्वारा अगले सीजन में एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार किए जाने की बात सामने आई है।
यानी पेट्रोल में एथेनॉल की मिठास बढ़ाने की कोशिश और रसोई की चीनी की कड़वाहट के बीच अब संतुलन का सवाल खड़ा हो गया है।
एथेनॉल की मिठास, रसोई में कड़वाहट?
एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना सरकार की ऊर्जा नीति का हिस्सा है। लेकिन बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा, गन्ने की उपलब्धता और एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल के बीच संतुलन बिगड़ने पर इसका असर कीमतों पर पड़ सकता है। व्यापारियों की चिंता भी इसी बिंदु पर है।
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री एवं कैट के पूर्व प्रवक्ता विवेक साहू के अनुसार शक्कर की तेजी के पीछे कुछ क्षेत्रों में अल्प वर्षा से गन्ने की फसल पर असर, चीनी उत्पादन की स्थिति, बाजार में उपलब्ध स्टॉक, मिलों से आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और एथेनॉल मिश्रण के लिए गन्ने तथा उससे जुड़े उत्पादों का उपयोग जैसे कारण हैं। उनका कहना है कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से चीनी की उपलब्धता और बाजार संतुलन पर असर पड़ सकता है।
व्यंग्य यहीं है—गन्ना एक ही है, लेकिन जरूरतें दो हैं। एक तरफ ईंधन के टैंक को भरना है और दूसरी तरफ रसोई की डिब्बी भी खाली नहीं रहने देना है।
नीमच में शक्कर के दाम ₹60, ग्रामीण इलाकों में ₹65 तक
नीमच के रिटेल किराना व्यापारी अनिल गोयल (गोयल जनरल स्टोर) के अनुसार वे पिछले दिन तक शक्कर करीब ₹60 प्रति किलो में बेच रहे थे। उनके अनुसार थोक बाजार में उन्हें शक्कर करीब ₹59 प्रति किलो के भाव में मिल रही है। उनका कहना है कि किराना बाजार में प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है और ऐसे में व्यापारियों का मार्जिन काफी कम रह जाता है। यानी ग्राहक को महंगी शक्कर बेचें तो ग्राहक नाराज, सस्ती बेचें तो व्यापारी की कमाई पर असर।
महंगाई का गणित भी गजब है—दाम बढ़े तो ग्राहक परेशान और मार्जिन घटे तो दुकानदार परेशान।
इसी बीच ग्रामीण क्षेत्रों में ₹65 प्रति किलो तक के रिटेल भाव सामने आने की जानकारी दी गई है। हालांकि स्थानीय बाजारों में वास्तविक कीमत दुकान, क्षेत्र, दाने की गुणवत्ता और खरीद की मात्रा के अनुसार अलग हो सकती है।
थोक में ₹58.50 से ₹59.50 का भाव
नीमच के थोक विक्रेता संजय मंगवानी (कमल एंटरप्राइजेज) के अनुसार फिलहाल थोक बाजार में:
- मध्यम दाना: ₹58.50 प्रति किलो
- मोटा दाना: ₹59.50 प्रति किलो
- मध्यम दाने की पड़ता: करीब ₹61 प्रति किलो
- मोटे दाने की पड़ता: करीब ₹62 प्रति किलो
बताई गई है। थोक विक्रेता के अनुसार खरीद के बाद पड़ता बढ़ने से खुदरा कारोबारियों के सामने भी कीमत और मार्जिन का दबाव बना रहता है।
ऐसे में बाजार का सवाल सीधा है—अगर खरीद महंगी है तो दुकानदार सस्ता कैसे बेचे? और अगर दुकानदार महंगा बेचे तो ग्राहक मिठास कैसे बचाए?
17 दिनों में करीब ₹17 की तेजी
विवेक साहू के अनुसार पिछले महज 17 दिनों में शक्कर के भाव में करीब ₹17 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। अगर यह आंकड़ा बाजार की मौजूदा स्थिति के संदर्भ में देखा जाए तो तेजी की रफ्तार खुद व्यापारियों के लिए चिंता का विषय है। त्योहारी सीजन सामने है। मिठाई, नमकीन, बेकरी, होटल-रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य कारोबार में शक्कर की मांग बढ़ने की संभावना है। यानी बाजार में मांग बढ़ने वाली है और सवाल उपलब्धता का है।
मिठाई अभी महंगी नहीं, लेकिन आगे जेब ढीली हो सकती है
शक्कर के बढ़ते भाव का सबसे सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ सकता है। हालांकि नीमच के मिठाई व्यवसायियों ने फिलहाल ग्राहकों के लिए राहत की बात कही है।
रतन स्वीट्स के मिठाई व्यवसायी राजू जी और वृंदावन स्वीट्स के सौरभ गोयल का कहना है कि वर्तमान में मिठाई के भाव में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
लेकिन दोनों मिठाई व्यवसायियों के अनुसार यदि शक्कर के भाव इसी तरह बढ़ते रहे और महंगाई का दबाव बना रहा तो आने वाले समय में मिठाई के रेट में करीब ₹10 से ₹20 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी की संभावना रह सकती है। यानी अभी मिठाई की कीमत स्थिर है, लेकिन शक्कर की तेजी अगर जारी रही तो त्योहारों के मौसम में मिठाई खरीदने वालों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
फिलहाल रसगुल्ला वही, जलेबी वही और मिठाई भी वही कीमत पर है… लेकिन अगर चीनी की चाल ऐसी ही रही तो अगली मिठास बिल में दिखाई दे सकती है।
एथेनॉल प्लांट संचालक कैलाश धानुका का पक्ष जानने की कोशिश
इस पूरे मामले में एथेनॉल नीति और उसके बाजार पर संभावित असर को लेकर नीमच शहर के उद्योगपति एवं एथेनॉल प्लांट संचालक कैलाश धानुका का पक्ष जानने का भी प्रयास किया गया। एथेनॉल नीति पर चर्चा के लिए उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल का कोई जवाब नहीं मिला। इस कारण एथेनॉल नीति, गन्ने की उपलब्धता और शक्कर की कीमतों के संबंध में कैलाश धनुका का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं किया जा सका है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे खबर में प्रमुखता से अपडेट किया जाएगा।
असली सवाल: गन्ना चीनी बनाएगा या एथेनॉल?
मौजूदा स्थिति में सबसे अहम बहस गन्ने के इस्तेमाल को लेकर है। सरकार की एथेनॉल नीति का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देना है। वहीं घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखना भी जरूरी है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक रिकॉर्ड ऊंची चीनी कीमतों के बीच केंद्र सरकार अगले सीजन में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार कर रही है। ऐसी संभावित नीति का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना बताया गया है। यानी जिस नीति से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिला, उसी नीति के सामने अब चीनी की बढ़ती कीमतों के रूप में नया सवाल खड़ा हो रहा है।
गाड़ी के टैंक में एथेनॉल चाहिए, लेकिन घर की चीनी की डिब्बी भी खाली नहीं होनी चाहिए। असली चुनौती इसी संतुलन की है।
व्यापारियों ने सरकार से निगरानी की मांग की
विवेक साहू ने सरकार से शक्कर के स्टॉक, मिलों से होने वाली आपूर्ति और बाजार भाव की लगातार निगरानी करने की मांग की है। उन्होंने जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर रोक लगाने तथा पर्याप्त सरकारी एवं मिल आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही उनके अनुसार एथेनॉल नीति, गन्ने की उपलब्धता और घरेलू चीनी जरूरतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि आगामी त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त महंगाई का बोझ न पड़े।
यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब हाल की रिपोर्टों में चीनी की ऊंची कीमतों के बीच सरकार द्वारा एथेनॉल के लिए गन्ने के डायवर्जन पर पुनर्विचार की संभावना भी सामने आई है।
₹60 के बाद अब ₹65?
नीमच में फिलहाल रिटेल भाव करीब ₹60 प्रति किलो बताया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से ₹65 तक के भाव सामने आए हैं। आगे कीमत कहां जाएगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि यदि आवक सामान्य नहीं रही और त्योहारी मांग बढ़ी तो शक्कर की कीमत पर दबाव बना रह सकता है।
यानी चीनी की कहानी अब सिर्फ बाजार भाव की कहानी नहीं रह गई है। यह गन्ना, एथेनॉल, चीनी की उपलब्धता, त्योहारी मांग और आम उपभोक्ता की जेब—इन सबका गणित बन चुकी है।
और इस पूरे गणित में सबसे बड़ा सवाल यही है—
एथेनॉल का टैंक भरते-भरते कहीं आम आदमी की चीनी की डिब्बी तो खाली नहीं हो जाएगी?
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