एमपी में 5 डे वर्किंग सिस्टम रहेगा या बदलेगा? CM की दो चेतावनियों के बाद बढ़ी शनिवार की चर्चा
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
19 अगस्त 2026, (अपडेटेड 19 अगस्त 2026, 10:28 पूर्वाह्न IST)

भोपाल (एमपी में 5 डे वर्किंग सिस्टम): मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए चल रहा 5 डे वर्किंग सिस्टम अब सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दो सार्वजनिक चेतावनियों और सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की लेटलतीफी को लेकर बढ़ती नाराजगी के बीच शनिवार को भी कार्यालय खोलने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अभी तक सरकार ने 5 डे वर्किंग सिस्टम खत्म करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है।

यही वजह है कि फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या शनिवार फिर से सरकारी कामकाज का दिन बन सकता है? जानकारी के मुताबिक, सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है, लेकिन अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।

CM की चेतावनियों के बाद क्यों बदला माहौल?

मामला सिर्फ पांच दिन काम करने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है। चर्चा के केंद्र में सरकारी कार्यालयों में समयपालन भी है। जब 5 डे वर्किंग सिस्टम लागू किया गया था, तब कर्मचारियों के लिए कार्यालय का समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया था। लेकिन कर्मचारियों के देर से पहुंचने की शिकायतें सामने आती रहीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मामले में दो बार सार्वजनिक रूप से कर्मचारियों को समय पर कार्यालय पहुंचने की हिदायत दे चुके हैं। इसके बावजूद स्थिति में पर्याप्त सुधार नहीं होने की बात सामने आने के बाद सरकार की निगरानी और सख्ती बढ़ने की चर्चा है। यहीं से शनिवार को दफ्तर खोलने की संभावना वाला सवाल सामने आया है।

क्या शनिवार को फिर खुलेंगे सरकारी दफ्तर?

सूत्रों के मुताबिक, सरकार 5 डे वर्किंग सिस्टम को खत्म करने और शनिवार को भी सरकारी कार्यालय खोलने के विकल्प पर विचार कर रही है। इस संभावित बदलाव का उद्देश्य सरकारी दफ्तरों में कामकाज और समयपालन से जुड़ी शिकायतों पर नियंत्रण करना माना जा रहा है। लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शनिवार को दफ्तर खोलने का निर्णय अभी आधिकारिक नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD की ओर से इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए शनिवार को सरकारी कार्यालय खुलने की चर्चा को अभी संभावित बदलाव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

एमपी में 5 डे वर्किंग सिस्टम आया कहां से?

मध्य प्रदेश में सरकारी कार्यालयों के लिए पांच दिन के कार्य सप्ताह की व्यवस्था वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी की रोकथाम के मद्देनजर शुरू की गई थी। बाद में 10 जून 2022 के आदेश के जरिए इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया। अब कर्मचारियों की उपस्थिति और समयपालन को लेकर सामने आ रही शिकायतों के बीच इसी व्यवस्था की समीक्षा की चर्चा तेज है।यानी जिस सिस्टम को पहले एक प्रशासनिक व्यवस्था के तौर पर आगे बढ़ाया गया था, वही अब सरकारी कामकाज और कर्मचारियों की उपस्थिति के सवाल से जुड़ गया है।

वल्लभ भवन से विंध्याचल-सतपुड़ा भवन तक निगरानी

कर्मचारियों की लेटलतीफी को लेकर सरकार की सख्ती केवल चेतावनियों तक सीमित नहीं रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मंत्रालय यानी वल्लभ भवन में औचक निरीक्षण भी करवाया गया। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग की विशेष टीमों ने विंध्याचल और सतपुड़ा भवन जैसे प्रमुख सरकारी भवनों में कर्मचारियों की उपस्थिति से संबंधित आंकड़े भी जुटाए हैं। इस कवायद से यह संकेत जरूर मिलता है कि सरकार अब सिर्फ नियम जारी करने के बजाय सरकारी दफ्तरों में वास्तविक उपस्थिति और समयपालन की स्थिति पर भी नजर रख रही है।

अब आएगा हाईटेक अटेंडेंस सिस्टम?

इधर दूसरी तरफ कर्मचारियों की हाजिरी को लेकर भी बड़ा बदलाव तैयार किया जा रहा है। मौजूदा बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के ठीक से काम नहीं करने की शिकायतों के बाद सरकार हाईटेक और रियल टाइम अटेंडेंस सॉफ्टवेयर की तैयारी में है। मई 2026 में हुई एक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मौजूदा बायोमेट्रिक सिस्टम की समीक्षा की और इसे पूरे प्रदेश में लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग की सैद्धांतिक सहमति के आधार पर नए सिस्टम पर काम आगे बढ़ा है।

5.50 लाख कर्मचारियों के लिए नया सिस्टम

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 5.50 लाख अधिकारी-कर्मचारियों के लिए नया अटेंडेंस सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। इसे मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी MPSEDC तैयार कर रहा है। इस व्यवस्था में फिंगरप्रिंट के साथ फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

सबसे अहम बदलाव यह बताया जा रहा है कि सिस्टम केवल कार्यालय पहुंचने और निकलने तक सीमित नहीं रह सकता। लंबे समय तक सीट से गायब रहने की स्थिति में भी सिस्टम इसे रिकॉर्ड कर सकता है और शॉर्ट लीव या हाफ डे दर्ज करने जैसी व्यवस्था शामिल की जा सकती है। यानी आगे सवाल सिर्फ यह नहीं रहेगा कि कर्मचारी दफ्तर पहुंचे या नहीं, बल्कि यह भी अहम हो सकता है कि उपस्थिति के दौरान उनकी उपलब्धता कैसी रही।

आइरिस स्कैन की चर्चा, लेकिन पुष्टि नहीं

अटेंडेंस सिस्टम के साथ आइरिस स्कैन तकनीक की चर्चा भी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में कर्मचारियों की पहचान आंखों की पुतली के स्कैन के जरिए करने की संभावना बताई गई है।हालांकि जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने आइरिस स्कैन तकनीक का इस्तेमाल भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की पहचान जांचने के लिए किया है। नियमित सरकारी कर्मचारियों की हाजिरी के लिए आइरिस स्कैन लागू किए जाने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इस हिस्से को फिलहाल संभावित तकनीक की चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

अगर 5 डे वीक खत्म हुआ तो क्या बदलेगा?

अगर सरकार 5 डे वर्किंग सिस्टम समाप्त कर शनिवार को भी कार्यालय खोलने का निर्णय लेती है, तो उसका सीधा असर करीब 5.50 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ सकता है। इसके साथ नई अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने पर समयपालन को लेकर निगरानी और सख्त हो सकती है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति या निर्धारित समय से जुड़े नियमों का डिजिटल रिकॉर्ड बनाए जाने की संभावना भी इस बदलाव को महत्वपूर्ण बना सकती है। वेतन कटौती जैसी कार्रवाई की आशंका की चर्चा भी है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में इस संबंध में कोई अंतिम सरकारी आदेश सामने नहीं आया है।

कर्मचारी संगठनों की चुप्पी के बीच सबसे बड़ा सवाल

अब तक कर्मचारी संगठनों या यूनियनों की ओर से इस संभावित बदलाव पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सरकार की ओर से किसी औपचारिक निर्णय के बाद ही यह साफ होगा कि कर्मचारियों की मौजूदा कार्यप्रणाली में कितना बदलाव होगा। फिलहाल पूरा मामला तीन प्रमुख बिंदुओं के आसपास घूम रहा है—5 डे वर्किंग सिस्टम खत्म होगा या नहीं, शनिवार को दफ्तर खुलेंगे या नहीं, और नई हाईटेक अटेंडेंस व्यवस्था कब लागू होगी। इनमें से किसी भी सवाल पर अभी अंतिम सरकारी फैसला सामने नहीं आया है।

अब नजर किस फैसले पर?

मौजूदा स्थिति में इतना स्पष्ट है कि सरकार सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति और समयपालन को लेकर गंभीरता दिखा रही है। CM की चेतावनियों, औचक निरीक्षणों और नए अटेंडेंस सॉफ्टवेयर की तैयारी ने 5 डे वर्किंग सिस्टम को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है। लेकिन शनिवार को सरकारी दफ्तर खुलेंगे या नहीं, 5 डे वर्किंग सिस्टम खत्म होगा या जारी रहेगा—इसका अंतिम जवाब अभी सरकारी आदेश का इंतजार कर रहा है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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