नीमच: अगर आप यात्री बस का टिकट लेकर खुद को ‘यात्री’ समझ रहे हैं, तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल है। बस ऑपरेटरों की नजर में आप महज एक ‘टिकट’ हैं। उनका असली मुनाफा डिक्की और छत पर बंधे उन पार्सलों से आता है, जो हर रात अवैध रूप से मालवा की सड़कों पर दौड़ाए जा रहे हैं। पैसेंजर परमिट की आड़ में चल रहे इस ‘चलते-फिरते गोदाम’ और ट्रांसपोर्ट माफिया के खिलाफ बुधवार को नीमच ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।
पुलिस के इस सख्त एक्शन ने उस आरटीओ (परिवहन विभाग) की कार्यप्रणाली को भी बेनकाब कर दिया है, जो एसी कमरों में बैठकर इस गोरखधंधे पर आंखें मूंदे बैठे है। इस सख्त एक्शन के लिए पुलिस महकमा यकीनन बधाई का पात्र है। हालांकि, इस शानदार सफलता की वाहवाही के बीच यातायात थाना प्रभारी (TI) सोनू बड़गुर्जर से उत्साह में एक ऐसी चूक हो गई, जिस पर महकमे को ध्यान देने की जरूरत है।
बस स्टैंड पर पुलिस की रेड: ‘अशोक ट्रेवल्स’ का पार्सल प्रेम बेनकाब
बुधवार को एसपी श्री राजेश व्यास, एएसपी श्री नवलसिंह सिसोदिया और सीएसपी श्री किरण चौहान के सख्त निर्देशों के बाद शहर के बस स्टैंड पर हड़कंप मच गया। यातायात थाना प्रभारी सोनू बड़गुर्जर अपनी टीम (एएसआई भाटी, प्रधान आरक्षक दिनेश कर्णिक और गोपाल मालवीय) के साथ सीधे ग्राउंड जीरो पर उतरे।
नागालैंड की पासिंग, नीमच में अवैध लोडिंग
चेकिंग के दौरान टीम ने ‘अशोक ट्रेवल्स’ की बस (क्र. NL 02 B 3058) को रोका। इस बस की हालत किसी मालवाहक ट्रक से कम नहीं थी। डिक्की से लेकर बस की छत तक भारी मात्रा में कमर्शियल लगेज और पार्सलों का पहाड़ लगा हुआ था। साफ है कि, नागालैंड पासिंग की यह बस नीमच में नियमों की धज्जियां उड़ा रही थी। पुलिस ने बिना कोई रियायत दिए मौके पर ही इस ‘मालवाहक बस’ को जब्त कर लिया और भारी जुर्माना लगाया।
रसूखदारों पर एक्शन, लेकिन उत्साह में TI बड़गुर्जर से हुई चूक
कार्रवाई सिर्फ बस माफिया तक सीमित नहीं रही। शहर की सड़कों पर जो रसूखदार काले शीशे (ब्लैक फिल्म) वाली कारों में घूम रहे थे, सरेराह उनकी गाड़ियों की फिल्म उतारी गई। साथ ही, उन ‘नाबालिग शूमाकरों’ को भी पकड़ा गया, जिनके हाथ में परिजनों ने कम उम्र में ही स्टेयरिंग थमा दी थी। कुल 42 चालान बनाकर 19,200 रुपये का जुर्माना वसूला गया। पुलिस की यह सख्ती बिल्कुल सही और समय की मांग थी।
लेकिन, इस शानदार कार्रवाई के उत्साह में यातायात थाना प्रभारी सोनू बड़गुर्जर से एक तकनीकी और कानूनी लापरवाही हो गई। अपनी कार्रवाई की जानकारी देने के लिए उन्होंने जो आधिकारिक प्रेस नोट और तस्वीरें मीडिया को जारी कीं, उनमें पकड़े गए नाबालिग बच्चों के चेहरे बिना ब्लर किए (Unblurred) हुए थे।
‘किशोर न्याय अधिनियम’ (Juvenile Justice Act – JJ Act) का नियम बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी कानूनी प्रक्रिया में शामिल नाबालिग की पहचान (चेहरा, नाम या पता) उजागर नहीं की जा सकती। माना कि पुलिस का इरादा शहर में जागरूकता फैलाना और परिजनों को सख्त संदेश देना था, लेकिन दूसरों को कानून का पाठ पढ़ाने वाले अधिकारियों को खुद भी इन संवेदनशील नियमों का बारीकी से ध्यान रखना चाहिए। उम्मीद है कि टीआई बड़गुर्जर भविष्य में ऐसी तकनीकी गलतियों से बचेंगे और अपनी शानदार कार्यशैली को विवादों से दूर रखेंगे।
RTO की आंखों पर क्यों बंधी है पट्टी?
अशोक ट्रेवल्स पर हुई यह कार्रवाई सिर्फ एक बानगी है। असली और खौफनाक माफिया अभी भी बेखौफ है। हालांकि, अगर परिवहन विभाग (RTO) ईमानदारी से अपना रिकॉर्ड खंगाले, तो कई ट्रैवल्स का ‘काला इतिहास’ बाहर आ जाएगा।
डोडा चूरा से लेकर मंडी टैक्स की चोरी
मालवा में तस्करों ने हमेशा इन बसों को ‘सेफ पैसेज’ माना है। पुलिस चेकिंग में कई बार इन्हीं यात्री बसों की डिक्की और छतों से ‘डोडा चूरा’ (मादक पदार्थ) की बड़ी खेप पकड़ी गई है। यानी, मंडी टैक्स और कमर्शियल टैक्स चुराने के लिए ट्रकों की जगह कृषि उपज (मंडी जिंस) भी बोरियों में भरकर इन्हीं बसों में सरेआम ढोई जाती है।
हादसों की सरताज और कंडम बसें
नीमच बस स्टैंड से गुजरने वाली शहर के कई बस ऑपरेटर्स पर लंबे समय से ओवरलोडिंग के आरोप लगते रहे हैं। ऑपरेटर पैसेंजर बस के नाम पर ट्रकों सा काम ले रहे हैं। वहीं, ‘सरकार-उपकार बस’ तो पूरे मालवा में हादसों (Accidents) का दूसरा नाम बन चुकी है। लोकल रूट्स पर दौड़ने वाली आधी से ज्यादा बसें कंडम हैं। न उनका फिटनेस सर्टिफिकेट है और न ही ब्रेक सही हैं। बड़ा सवाल यह है कि शहर के बीचों-बीच मौत का सामान ढोती ये खटारा और ओवरलोडेड बसें आरटीओ के उड़नदस्तों को क्यों नहीं दिखतीं?
चालान नहीं, अब परमिट निरस्त करने का वक्त
नीमच ट्रैफिक पुलिस द्वारा की गई जब्ती यकीनन एक कड़ा प्रहार है। लेकिन कड़वा सच यह है कि एक रात में लाखों कमाने वाले इस माफिया के लिए 19 हजार का जुर्माना ‘ऊंट के मुंह में जीरे’ के समान है। जब तक आरटीओ इन ऑपरेटरों के परमिट मौके पर निरस्त नहीं करेगा और मालिकों पर एफआईआर दर्ज नहीं होगी, यह माफिया चंद हजार का चालान कटवाकर कल फिर किसी बस की छत पर पार्सल लादता नजर आएगा।
FAQ Section
Q1. नीमच ट्रैफिक पुलिस ने किस ट्रेवल्स की बस जब्त की है?
Ans. पुलिस ने चेकिंग के दौरान ‘अशोक ट्रेवल्स’ की बस (NL 02 B 3058) को अवैध पार्सल परिवहन के आरोप में जब्त किया है।
Q2. ट्रैफिक पुलिस की इस कार्रवाई में कुल कितने चालान काटे गए?
Ans. इस विशेष अभियान के तहत ट्रैफिक पुलिस ने कुल 42 चालान बनाए और 19,200 रुपये का जुर्माना वसूला।
Q3. बसों के अलावा किन वाहनों पर सख्ती की गई?
Ans. बसों के साथ-साथ पुलिस ने ब्लैक फिल्म लगी कारों और नाबालिग बच्चों द्वारा चलाए जा रहे दोपहिया/चारपहिया वाहनों पर भी सख्त कार्रवाई की।
Q4. यात्री बसों में पार्सल ढोना क्यों खतरनाक है?
Ans. यात्री बसों में क्षमता से अधिक कमर्शियल पार्सल ढोने से बस का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे सड़क हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह मोटर व्हीकल एक्ट का भी उल्लंघन है।
Q5. आरटीओ की कार्यप्रणाली पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
Ans. बिना फिटनेस की कंडम बसें और डोडा चूरा जैसी अवैध सामग्री ढोने वाली गाड़ियां बेखौफ दौड़ रही हैं, लेकिन आरटीओ द्वारा इन पर कोई ठोस कार्रवाई या परमिट निरस्त न किए जाने के कारण उनकी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
Q6. यातायात थाना प्रभारी सोनू बड़गुर्जर से क्या चूक हुई?
Ans. पुलिस टीम का एक्शन शानदार था, लेकिन उत्साह में टीआई ने प्रेस नोट में नाबालिग चालकों की तस्वीरें बिना ब्लर किए जारी कर दीं, जो ‘किशोर न्याय अधिनियम’ (JJ Act) के नियमों के खिलाफ है।
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