Sanjeev Sanyal on Rupee Fall: डॉलर 91 के पार, फिर भी नो-टेंशन! चीन-जापान का उदाहरण देकर बताई ‘कमजोर रुपये’ की असली ताकत
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
19 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 19 दिसम्बर 2025, 10:33 पूर्वाह्न IST)

नीमच: Sanjeev Sanyal on Rupee Fall भारतीय मुद्रा (Indian Rupee) ने हाल ही में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट देखी है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लुढ़ककर 91 के मनोवैज्ञानिक स्तर (Psychological Level) को पार कर गया है। आम तौर पर, किसी भी देश की करेंसी का गिरना आर्थिक संकट का संकेत माना जाता है, लेकिन प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल (Sanjeev Sanyal) की राय इससे बिल्कुल जुदा है।

Sanjeev Sanyal on Rupee Fall सरकार के शीर्ष अर्थशास्त्री ने स्पष्ट कर दिया है कि रुपये की यह गिरावट चिंता का विषय नहीं, बल्कि एक खास आर्थिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है। Sanjeev Sanyal on Rupee Fall पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने जापान और चीन की अर्थव्यवस्थाओं का ऐतिहासिक उदाहरण पेश किया है।

Sanjeev Sanyal on Rupee Fall रुपये की गिरावट पर क्यों बेफिक्र है सरकार?

Sanjeev Sanyal on Rupee Fall संजीव सान्याल ने एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि रुपये की मौजूदा कमजोरी को लेकर उन्हें कोई घबराहट नहीं है। उनका तर्क है कि जब कोई देश “हाई ग्रोथ ट्रेजेक्टरी” (तेजी से विकास की राह) पर होता है, तो उसकी करेंसी में कमजोरी आना स्वाभाविक है और कई बार यह फायदेमंद भी होता है।सान्याल ने कहा,

“मैं रुपये को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं हूं। रुपये की मौजूदा कमजोरी को किसी आर्थिक आपदा से जोड़ना गलत होगा। इतिहास गवाह है कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं अक्सर विनिमय दर (Exchange Rate) की कमजोरी के दौर से गुजरती हैं, और यह उनके निर्यात को बढ़ाने में मदद करता है।”

चीन और जापान मॉडल: विकास का ‘सीक्रेट फॉर्मूला’

इस मुद्दे को गहराई से समझाते हुए सान्याल ने एशियाई महाशक्तियों का उदाहरण दिया। यह समझना जरूरी है कि 1990 के दशक में जब जापान दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था था और बाद में 2000 के दशक में जब चीन मैन्युफैक्चरिंग का पावरहाउस बन रहा था, तब दोनों देशों ने जानबूझकर अपनी मुद्रा को कमजोर रखा था।
विशेष विश्लेषण: जब किसी देश की मुद्रा कमजोर होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसका सामान सस्ता हो जाता है। उदाहरण के लिए, अगर रुपया कमजोर है, तो विदेशी खरीदारों को भारतीय सामान खरीदने के लिए कम डॉलर खर्च करने होंगे। इससे भारत का निर्यात (Export) बढ़ता है। सान्याल का इशारा इसी ओर है कि भारत अब उसी ‘ग्रोथ फेज’ में है, जहां चीन और जापान दशकों पहले थे।

RBI का रोल और विदेशी मुद्रा भंडार

Sanjeev Sanyal on Rupee Fall हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार रुपये को असीमित रूप से गिरने देगी। सान्याल ने स्पष्ट किया कि 1990 के बाद से रुपये को बाजार की ताकतों (Demand and Supply) के हिसाब से चलने दिया गया है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पूरी तरह से निष्क्रिय नहीं है।

जब भी बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव (Volatility) होता है, आरबीआई अपने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का उपयोग करके स्थिति को संभालता है। लेकिन मौजूदा गिरावट को “व्यवस्थित” माना जा रहा है, न कि “पैनिक”। शर्त केवल इतनी है कि इस गिरावट से देश में महंगाई (Inflation) नहीं बढ़नी चाहिए, और फिलहाल आंकड़े बताते हैं कि महंगाई नियंत्रण में है।

Sanjeev Sanyal on Rupee Fall अमेरिका और व्यापार युद्ध का असर

आंकड़ों पर नजर डालें तो, इस साल 2 अप्रैल को अमेरिका द्वारा व्यापक टैरिफ (शुल्क) वृद्धि की घोषणा के बाद से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 5.7 प्रतिशत टूट चुका है। यह गिरावट दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी ज्यादा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि Sanjeev Sanyal on Rupee Fall वाला बयान ऐसे समय में आया है जब भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ आक्रामक तरीके से व्यापार वार्ता (Trade Deals) कर रहा है। कमजोर रुपया इन वार्ताओं में भारत के निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में एक हथियार की तरह काम कर सकता है। सान्याल ने भी पुष्टि की है कि इन वार्ताओं में “राष्ट्रीय हित सर्वोपरि” रहेगा।

Sanjeev Sanyal on Rupee Fall आगे की राह: क्या 100 तक जाएगा डॉलर?

बाजार के जानकारों के मुताबिक, रुपये में अभी और गिरावट देखी जा सकती है। वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती के कारण यह ट्रेंड जारी रह सकता है। लेकिन सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बयानों से यह साफ है कि वे इस गिरावट को ‘आपदा’ नहीं बल्कि ‘अवसर’ के रूप में देख रहे हैं। यदि महंगाई काबू में रहती है, तो आने वाले दिनों में हम “मेक इन इंडिया” को ग्लोबल मार्केट में और अधिक आक्रामक होते हुए देख सकते हैं।


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Aakash Sharma
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