कुकड़ेश्वर। ग्राम पंचायत फुलपुरा से कड़ी खुर्द को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर तालाब की पाल ढहने से सड़क का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर तालाब की ओर झुक गया है। फुलपुरा कड़ी खुर्द सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने यहां हादसे की आशंका जताई है। ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या करीब एक वर्ष से बनी हुई है। उनका कहना है कि पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों को सड़क और तालाब की पाल की स्थिति से अवगत कराया गया था, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। 7 सितंबर 2026 तक भी समस्या जस की तस बनी होने की बात ग्रामीणों ने कही है।
बारिश में बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
ग्रामीणों के अनुसार बारिश के मौसम में तालाब की पाल और सड़क के आसपास की स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है। सड़क का क्षतिग्रस्त हिस्सा तालाब के बिल्कुल करीब होने से यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को सावधानी बरतनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय स्थिति और जोखिमपूर्ण हो जाती है। इस मार्ग से दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ किसान, मजदूर और विद्यार्थी भी आवागमन करते हैं।
जल प्रदाय योजना की खुदाई पर सवाल
ग्रामीणों ने गांधीसागर-2 समूह जल प्रदाय योजना के तहत पाइपलाइन डालने के लिए की गई खुदाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, खुदाई के बाद तालाब की पाल की मजबूती प्रभावित हुई और पाल तथा सड़क की सुरक्षा के लिए जरूरी तकनीकी इंतजाम नहीं किए गए। ग्रामीणों ने तालाब के आसपास कथित अवैध खनन और अतिक्रमण को भी पाल कमजोर होने का कारण बताया है। उनका कहना है कि इन गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से स्थिति लगातार खराब हुई।
दो पुलियाओं पर रेलिंग नहीं होने की शिकायत
ग्रामीणों के अनुसार, कड़ी खुर्द गांव के बीच से निकलने वाले नाले पर बनी दो पुलियाओं पर भी पर्याप्त सुरक्षा रेलिंग नहीं है। बारिश और रात के समय यहां दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क के साथ इन पुलियाओं की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है।
कलेक्टर से स्थायी समाधान की मांग
क्षेत्र के ग्रामीणों ने नीमच जिला कलेक्टर हिमांशु चन्द्रा से तत्काल मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि मौके का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और आवश्यकता होने पर तालाब की पाल की सुरक्षा के लिए रिटेनिंग वॉल बनाई जाए। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त फुलपुरा कड़ी खुर्द सड़क का स्थायी सुदृढ़ीकरण और डामरीकरण तथा दोनों पुलियाओं पर मजबूत सुरक्षा रेलिंग लगाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि
किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते सड़क और तालाब की पाल की स्थिति सुधारना जरूरी है।
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