पेरिस :- फ्रांसीसी एविएशन कंपनी दसॉल्ट एविएशन राफेल F5 स्टैंडर्ड के विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह मौजूदा राफेल F3R और F4 स्टैंडर्ड के मुकाबले तकनीक और युद्धक क्षमताओं के लिहाज से बड़ा अपग्रेड होगा। राफेल F5 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्टेल्थ अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल यानी Loyal Wingman, नया RBE2-XG AESA रडार और अगली पीढ़ी के हथियार शामिल किए जाने की योजना है।
राफेल F5 को लेकर खास बात यह है कि इसका विकास केवल मौजूदा लड़ाकू विमान में कुछ नई प्रणालियां जोड़ने तक सीमित नहीं है। इसे भविष्य के ऐसे युद्ध वातावरण के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां पायलट वाला लड़ाकू विमान मानव रहित स्टेल्थ ड्रोन के साथ मिलकर ऑपरेशन कर सकेगा।
राफेल F5 कब तक होगा तैयार?
एविएशन वीक की रिपोर्ट के अनुसार, राफेल F5 का फुल-स्केल डेवलपमेंट 2026-27 के आसपास महत्वपूर्ण चरण में पहुंचने की योजना है। नए स्टैंडर्ड को 2030 के दशक की शुरुआत यानी 2032 या 2033 तक सेवा में शामिल किए जाने की संभावना बताई गई है। इस अपग्रेड का उद्देश्य राफेल प्लेटफॉर्म को आने वाले दशकों तक आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप बनाए रखना है। राफेल F5 को नेक्स्ट जेनरेशन वारफेयर की आवश्यकताओं के हिसाब से विकसित किया जा रहा है।
अकेला नहीं उड़ेगा राफेल F5, साथ होगा स्टेल्थ ड्रोन

राफेल F5 की सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावित क्षमतियों में स्टेल्थ अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल (UCAV) के साथ मिलकर काम करना शामिल है। इसे Loyal Wingman अवधारणा से जोड़ा गया है। यह स्टेल्थ ड्रोन दसॉल्ट के nEUROn प्रोग्राम पर आधारित होगा। nEUROn फ्रांस के नेतृत्व में विकसित एक यूरोपीय मानव रहित लड़ाकू विमान का स्टेल्थ टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर कार्यक्रम है।
यह कार्यक्रम फ्रांस, इटली, स्वीडन, स्पेन, ग्रीस और स्विट्जरलैंड के सहयोग से 2003 में शुरू किया गया था। योजना के मुताबिक, राफेल F5 का पायलट कॉकपिट में रहते हुए स्टेल्थ ड्रोन को कमांड और कंट्रोल कर सकेगा।इससे भविष्य में मानवयुक्त राफेल और मानव रहित लड़ाकू प्लेटफॉर्म एक ही मिशन में संयुक्त रूप से काम कर सकेंगे।
RBE2-XG रडार से बढ़ेगी सेंसर क्षमता

राफेल F5 में नया RBE2-XG AESA रडार लगाए जाने की योजना बताई गई है। यह रडार गैलियम नाइट्राइड यानी GaN तकनीक पर आधारित होगा। Raw Data में इस रडार को स्टेल्थ लड़ाकू विमानों की पहचान की उन्नत क्षमता से जोड़ा गया है और उदाहरण के तौर पर J-20 तथा Su-57 का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसकी वास्तविक डिटेक्शन रेंज से जुड़ा कोई सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
राफेल F5 में बड़ी मात्रा में डेटा ट्रांसफर करने के लिए नया फाइबर-ऑप्टिक सिस्टम और AI आधारित ऑटोमेशन भी शामिल किए जाने की बात कही गई है।
AI से कैसे बदलेगा राफेल?
राफेल F5 में AI का इस्तेमाल इसे मौजूदा स्टैंडर्ड से अलग करने वाली प्रमुख प्रस्तावित तकनीकों में शामिल है। AI आधारित ऑटोमेशन के साथ विमान के सेंसर, डेटा और मानव रहित प्लेटफॉर्म के बीच तालमेल बढ़ाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य राफेल F5 को केवल एक पारंपरिक लड़ाकू विमान के बजाय ऐसे नेटवर्क आधारित प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करना है, जो भविष्य के युद्ध में अलग-अलग प्रणालियों के साथ काम कर सके।
ASN4G हाइपरसोनिक मिसाइल भी होगी खास

राफेल F5 के हथियारों में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। नया स्टैंडर्ड ASN4G हाइपरसोनिक मिसाइल के साथ काम करने में सक्षम होगा। ASN4G को फ्रांस की नई पीढ़ी की परमाणु हमला करने में सक्षम हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बताया गया है। इसके अलावा भविष्य में विकसित होने वाली एंटी-शिप और एयर-टू-एयर मिसाइलों को भी राफेल F5 के साथ जोड़े जाने की योजना बताई गई है।
इस तरह F5 अपग्रेड में विमान के सेंसर और नेटवर्किंग के साथ हथियार प्रणाली को भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की योजना है।
भारत के लिए क्यों अहम है राफेल F5?

राफेल F5 का विकास भारत के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। उपलब्ध Raw Data के मुताबिक, भारत वर्तमान में 36 राफेल लड़ाकू विमानों का संचालन कर रहा है, जिन्हें F3 स्टैंडर्ड का बताया गया है। ऐसे में भविष्य में मौजूदा राफेल बेड़े को F5 स्टैंडर्ड तक अपग्रेड करने की संभावना पर नजर रहेगी। इसके अलावा भविष्य में भारतीय वायुसेना या नौसेना के लिए F5 स्टैंडर्ड के विमान खरीदने की संभावना भी सामने आ सकती है।
हालांकि, इसे भारत की तय योजना नहीं माना जाना चाहिए। दिए गए Raw Data में भारत सरकार या संबंधित रक्षा एजेंसियों की ओर से राफेल F5 खरीदने अथवा मौजूदा 36 विमानों को F5 स्टैंडर्ड में अपग्रेड करने के किसी आधिकारिक निर्णय का उल्लेख नहीं है।
राफेल F5 पर इसलिए टिकी निगाहें
राफेल F5 के प्रस्तावित स्वरूप में AI, Loyal Wingman स्टेल्थ ड्रोन, RBE2-XG AESA रडार, फाइबर-ऑप्टिक डेटा सिस्टम और ASN4G हाइपरसोनिक मिसाइल जैसी क्षमताएं शामिल हैं। यही बदलाव इसे मौजूदा राफेल स्टैंडर्ड से अलग बनाते हैं।
राफेल F5 के विकास और इसके अंतिम तकनीकी स्वरूप को लेकर आने वाले वर्षों में स्थिति और स्पष्ट होगी। खास तौर पर भारत के संदर्भ में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में मौजूदा राफेल बेड़े के अपग्रेड या नए F5 विमानों को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने आता है या नहीं।
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