नीमच | रूस को भारत से पेट्रोल की पहली खेप पहुंचने की जानकारी सामने आई है। केप्लर के अनुसार, रूस को भारत से पेट्रोल की पहली खेप 5 अगस्त को मिली। यह घटनाक्रम इसलिए खास है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक भी है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की कुछ रिफाइनरियों का कामकाज यूक्रेन के हमलों से प्रभावित हुआ है। इसके चलते रूस में घरेलू ईंधन उपलब्धता पर दबाव बढ़ा और पेट्रोल की जरूरत पूरी करने के लिए भारत से आपूर्ति की गई।
नायरा एनर्जी ने भेजा पेट्रोल
नायरा एनर्जी लिमिटेड ने रूस को पेट्रोल की आपूर्ति की। कंपनी में रूस की प्रमुख तेल कंपनी रोसनेफ्ट का निवेश है। केप्लर के शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, रूस के झंडे वाला प्रोडक्ट टैंकर साइक्लोन 18 जून को भारत के पश्चिमी तट पर स्थित वाडिनार रिफाइनरी पहुंचा था। यहां उसने करीब 42,000 टन पेट्रोल लोड किया। इसके बाद 6 जुलाई को यह खेप मिस्र के डामिएटा पोर्ट पर ओमान के झंडे वाले गार्नेट जहाज में ट्रांसफर की गई।यह जहाज अगस्त की शुरुआत में रूस पहुंचा।
और भी खेप भेजे जाने के संकेत
रूस को भारत से पेट्रोल भेजे जाने का यह अकेला मामला नहीं बताया जा रहा है। केप्लर के मुताबिक, प्रोडक्ट टैंकर Varg ने भी 6 जुलाई को वाडिनार से करीब 40,000 टन फ्यूल लोड किया था। जुलाई के अंत में इसका डामिएटा में शिप-टू-शिप ट्रांसफर हुआ।
इसके अलावा कैमरून के झंडे वाला Photon 13 जुलाई को वाडिनार से रवाना हुआ। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 28-29 जुलाई को डामिएटा में इसका पेट्रोल कार्गो रूस के झंडे वाले Talisman जहाज में ट्रांसफर किया गया।
यूक्रेन हमलों से बदले हालात
यूक्रेन के हमलों से रूस की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है। इसी वजह से रूस को घरेलू बाजार में ईंधन उपलब्धता बनाए रखने के लिए पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर रोक लगाने की जरूरत पड़ी। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने भी वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ाई है। ऐसे हालात में रूस को भारत जैसे देशों से तैयार पेट्रोल मंगाना पड़ा है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से कच्चे तेल का कारोबार होता रहा है, लेकिन अब रूस को भारत से पेट्रोल भेजे जाने की स्थिति सामने आई है।
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