रेत कारोबार में अनुमति का पेंच! नीमच में रॉयल्टी देकर माल लाने के बाद भी क्यों बढ़ी कार्रवाई की चिंता?
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
10 सितम्बर 2026, (अपडेटेड 10 सितम्बर 2026, 2:36 अपराह्न IST)

नीमच। नीमच में रेत कारोबार को लेकर व्यापारियों और खनिज विभाग के बीच अनुमति का मुद्दा सामने आया है। राजस्थान और गुजरात से रॉयल्टी चुकाकर रेत मंगाने वाले व्यापारियों ने कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। गुरुवार को रेत सामग्री व्यापारी संघ ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर वैध रेत के भंडारण और स्थानीय परिवहन के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की।

व्यापारियों का कहना है कि नीमच जिले में रेत की खदानें नहीं होने के कारण उन्हें राजस्थान और गुजरात से रॉयल्टी-पेड रेत मंगानी पड़ती है। डंपर और ट्रेलर से नीमच पहुंचने वाली रेत को छोटे निर्माण कार्यों और संकरी गलियों तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से सप्लाई किया जाता है। लेकिन इसी व्यवस्था के बीच अब रेत कारोबार में अनुमति का सवाल प्रमुख हो गया है। व्यापारियों का दावा है कि रॉयल्टी चुकाकर खरीदी गई रेत को भी स्टॉक करने और स्थानीय स्तर पर पहुंचाने के दौरान कार्रवाई की चिंता बनी रहती है।

रॉयल्टी देने के बाद भी कहां फंस रहा मामला?

रेत व्यापारियों के अनुसार, राजस्थान और गुजरात से रेत खरीदते समय नियमानुसार रॉयल्टी चुकाई जाती है। इसके बाद डंपर या ट्रेलर के जरिए रेत नीमच लाई जाती है। व्यापारियों का कहना है कि बड़े वाहनों से लाई गई रेत को सीधे हर ग्राहक के घर तक पहुंचाना हमेशा संभव नहीं होता।

खासकर छोटे निर्माण कार्यों और संकरी गलियों में बड़े वाहनों की जगह ट्रैक्टर-ट्रॉली से रेत पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। व्यापारियों का आरोप है कि इसी स्थानीय सप्लाई और स्टॉक को लेकर उन्हें कार्रवाई का डर रहता है। यही वजह है कि व्यापारी संघ ने प्रशासन के सामने स्पष्ट नियम बनाने की मांग रखी है, ताकि वैध रूप से खरीदी गई रेत को नीमच में रखने और ग्राहकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया साफ हो सके।

व्यापारियों ने खुद माना- लिखित भंडारण अनुमति नहीं

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू व्यापारियों की ओर से भी सामने आया है। व्यापारी प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि उनके पास रेत के भंडारण की लिखित अनुमति नहीं है।व्यापारियों का कहना है कि रेत वैध और रॉयल्टी-पेड है तथा इसे निजी जमीन पर रखा जाता है। उनका कहना है कि समस्या रेत की वैध खरीद से ज्यादा भंडारण की अनुमति लेने की प्रक्रिया को लेकर है।

व्यापारियों के अनुसार, भंडारण लाइसेंस की प्रक्रिया जटिल होने से छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले व्यापारियों को परेशानी होती है। उन्होंने प्रशासन से इस प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है। व्यापारियों ने यह भी कहा कि यदि रेत भंडारण की अनुमति लेने की प्रक्रिया आसान की जाती है तो वे आवश्यक लाइसेंस लेने के लिए तैयार हैं।

खनिज विभाग ने भी साफ कर दिया अपना रुख

मामले में खनिज विभाग की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई है। खनिज अधिकारी जेएस भिंडे ने बताया कि व्यापारियों से आवेदन लिए जा रहे हैं और नियमानुसार अनुमति देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना अनुमति रेत का भंडारण वैध नहीं है और ऐसी स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।  यानी व्यापारियों के लिए मुख्य सवाल केवल यह नहीं है कि रेत कहां से खरीदी गई है या उस पर रॉयल्टी दी गई है। भंडारण के लिए आवश्यक अनुमति भी इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

छोटे व्यापारियों के लिए सरल नियम की मांग

रेत सामग्री व्यापारी संघ ने छोटे व्यापारियों की समस्या को भी ज्ञापन में उठाया है। व्यापारियों ने एक-दो डंपर तक छोटे स्तर पर रेत रखने के लिए सरल अनुमति व्यवस्था बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि छोटे कारोबारियों और बड़े स्तर पर रेत का भंडारण करने वालों के लिए एक जैसी जटिल प्रक्रिया होने से परेशानी होती है। इसलिए छोटे स्तर पर रेत कारोबार करने वालों के लिए अलग और आसान व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इसके साथ ही ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रेत की सप्लाई को लेकर भी स्पष्ट नियम तय करने की मांग की गई है।

असली पेंच रेत की वैधता नहीं, भंडारण की अनुमति पर?

मौजूदा स्थिति में व्यापारियों और खनिज विभाग के बीच मुख्य मुद्दा रेत के भंडारण की अनुमति को लेकर दिखाई देता है। व्यापारियों का कहना है कि वे राजस्थान और गुजरात से रॉयल्टी देकर रेत खरीदते हैं और फिर उसे नीमच में ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। दूसरी ओर खनिज विभाग का कहना है कि बिना अनुमति रेत का भंडारण वैध नहीं है

ऐसे में रेत कारोबार से जुड़े व्यापारियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि रॉयल्टी-पेड रेत के नीमच में भंडारण, स्टॉक और स्थानीय परिवहन को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया स्पष्ट हो।

अब व्यापारियों की मांग पर नजर

व्यापारियों ने प्रशासन से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है जिसमें वैध रूप से खरीदी गई रेत के भंडारण और स्थानीय सप्लाई को लेकर भ्रम की स्थिति न रहे।

व्यापारियों की प्रमुख मांगें हैं:

  • रेत भंडारण की अनुमति की प्रक्रिया सरल की जाए।
  • छोटे व्यापारियों के लिए एक-दो डंपर तक भंडारण की आसान व्यवस्था हो।
  • रॉयल्टी-पेड रेत के स्थानीय परिवहन के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
  • ट्रैक्टर-ट्रॉली से छोटे निर्माण कार्यों तक रेत पहुंचाने की व्यवस्था स्पष्ट की जाए।
  • व्यापारियों को आवश्यक लाइसेंस और अनुमति लेने की प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।

व्यापारियों और विभाग के बीच स्पष्टता की जरूरत

फिलहाल रेत कारोबार को लेकर नीमच में स्थिति का केंद्र अनुमति और भंडारण का मुद्दा है। व्यापारी वैध और रॉयल्टी-पेड रेत के कारोबार के लिए स्पष्ट व्यवस्था चाहते हैं, जबकि खनिज विभाग बिना अनुमति भंडारण को नियमों के अनुरूप नहीं मान रहा है। अब देखना यह होगा कि व्यापारियों द्वारा दिए गए ज्ञापन के बाद प्रशासन की ओर से भंडारण और स्थानीय परिवहन को लेकर क्या व्यवस्था सामने आती है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच अनुमति की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता की जरूरत बनी हुई है।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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