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श्री सांवलियाजी मंदिर में बड़ा बदलाव: 5 सख्त नियम लागू, अब नहीं चढ़ेगा 56 भोग और मोरपंख

Sanwaliya Ji Temple Rules

चित्तौड़गढ़ Sanwaliya Ji Temple Rules। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। बढ़ती भीड़, अव्यवस्था और लगातार मिल रही शिकायतों के चलते मंदिर प्रबंधन ने अब मोरपंख और 56 भोग चढ़ाने की परंपरा पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही परिसर में फोटो और वीडियो बनाने पर भी सख्ती से प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।

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यह फैसला “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना बताया गया है।

भीड़ और लंबी कतारें बनी मुख्य वजह

मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही 56 भोग चढ़ाने की परंपरा ने व्यवस्था को और जटिल बना दिया था।

भोग लगाने के दौरान श्रद्धालु लंबे समय तक गर्भगृह के सामने रुक जाते थे। एक बार में 56 भोग चढ़ाने में लगभग एक घंटा लग जाता था, और दिनभर में कई बार ऐसा होने से दर्शन की प्रक्रिया बाधित हो रही थी।

“श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” के तहत अब यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी भक्त गर्भगृह के सामने ज्यादा देर तक नहीं रुके, ताकि सभी को समान अवसर मिल सके।

गाजे-बाजे और जुलूस जैसी गतिविधियों पर भी रोक

मंदिर प्रशासन ने पाया कि कई श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ समूह में आते थे और परिसर में नाचते-गाते हुए घूमते थे। इससे न केवल भीड़ बढ़ती थी बल्कि मंदिर का धार्मिक वातावरण भी प्रभावित होता था।

इसी कारण “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” में यह भी शामिल किया गया है कि परिसर में इस प्रकार की गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी।

फोटो-वीडियो पर सख्त कार्रवाई

मंदिर के गार्डन और अन्य क्षेत्रों में फोटो और वीडियो बनाने पर पहले से रोक थी, लेकिन इसका पालन सही तरीके से नहीं हो रहा था। भोग चढ़ाने के बाद कई श्रद्धालु फोटोशूट और वीडियो बनाने लगते थे, जिससे अन्य लोगों को असुविधा होती थी और कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती थी।

अब “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” के अनुसार, पूरे परिसर में फोटो और वीडियो बनाने पर सख्ती से निगरानी रखी जाएगी और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

नकली सामग्री ने बढ़ाई चिंता

प्रबंधन ने एक और गंभीर समस्या की ओर इशारा किया है—नकली सामग्री का बढ़ता उपयोग। मंदिर में चढ़ाई जा रही मिठाइयों में नकली मावा, कृत्रिम फूल और नकली मोरपंख का इस्तेमाल बढ़ गया था। यह न केवल धार्मिक आस्था के खिलाफ था, बल्कि स्वास्थ्य और गुणवत्ता के लिहाज से भी चिंताजनक था।

इसी कारण “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” के तहत इन सभी वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

अब कैसे होगा भोग और प्रसाद?

नई व्यवस्था के अनुसार, श्रद्धालु अब सीधे मंदिर में भोग नहीं चढ़ा सकेंगे।

  • केवल नकद, सोना-चांदी या अन्य मूल्यवान भेंट भंडार में जमा कराई जा सकेगी
  • मंदिर परिसर में खाली हाथ प्रवेश करना होगा
  • प्रसाद के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था की गई है
  • विशेष भोग के लिए आरती के बाद राजभोग की रसीद कटवानी होगी

“श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” का उद्देश्य दर्शन प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु बिना परेशानी के भगवान के दर्शन कर सकें।

श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस फैसले पर श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया अलग-अलग सामने आई है। कुछ लोग इसे जरूरी और सही कदम बता रहे हैं, उनका कहना है कि इससे भीड़ कम होगी और दर्शन आसान होंगे। वहीं कुछ श्रद्धालु परंपराओं में बदलाव को लेकर असहज हैं और भोग चढ़ाने के लिए अलग व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

हालांकि प्रशासन का साफ कहना है कि “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” केवल व्यवस्था सुधारने और अनुशासन बनाए रखने के लिए लागू किए गए हैं।

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