श्री सांवलियाजी मंदिर में बड़ा बदलाव: 5 सख्त नियम लागू, अब नहीं चढ़ेगा 56 भोग और मोरपंख
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
25 अप्रैल 2026, (अपडेटेड 25 अप्रैल 2026, 1:34 अपराह्न IST)

चित्तौड़गढ़ Sanwaliya Ji Temple Rules। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। बढ़ती भीड़, अव्यवस्था और लगातार मिल रही शिकायतों के चलते मंदिर प्रबंधन ने अब मोरपंख और 56 भोग चढ़ाने की परंपरा पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही परिसर में फोटो और वीडियो बनाने पर भी सख्ती से प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।

यह फैसला “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना बताया गया है।

भीड़ और लंबी कतारें बनी मुख्य वजह

मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही 56 भोग चढ़ाने की परंपरा ने व्यवस्था को और जटिल बना दिया था।

भोग लगाने के दौरान श्रद्धालु लंबे समय तक गर्भगृह के सामने रुक जाते थे। एक बार में 56 भोग चढ़ाने में लगभग एक घंटा लग जाता था, और दिनभर में कई बार ऐसा होने से दर्शन की प्रक्रिया बाधित हो रही थी।

“श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” के तहत अब यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी भक्त गर्भगृह के सामने ज्यादा देर तक नहीं रुके, ताकि सभी को समान अवसर मिल सके।

गाजे-बाजे और जुलूस जैसी गतिविधियों पर भी रोक

मंदिर प्रशासन ने पाया कि कई श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ समूह में आते थे और परिसर में नाचते-गाते हुए घूमते थे। इससे न केवल भीड़ बढ़ती थी बल्कि मंदिर का धार्मिक वातावरण भी प्रभावित होता था।

इसी कारण “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” में यह भी शामिल किया गया है कि परिसर में इस प्रकार की गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी।

फोटो-वीडियो पर सख्त कार्रवाई

मंदिर के गार्डन और अन्य क्षेत्रों में फोटो और वीडियो बनाने पर पहले से रोक थी, लेकिन इसका पालन सही तरीके से नहीं हो रहा था। भोग चढ़ाने के बाद कई श्रद्धालु फोटोशूट और वीडियो बनाने लगते थे, जिससे अन्य लोगों को असुविधा होती थी और कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती थी।

अब “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” के अनुसार, पूरे परिसर में फोटो और वीडियो बनाने पर सख्ती से निगरानी रखी जाएगी और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

नकली सामग्री ने बढ़ाई चिंता

प्रबंधन ने एक और गंभीर समस्या की ओर इशारा किया है—नकली सामग्री का बढ़ता उपयोग। मंदिर में चढ़ाई जा रही मिठाइयों में नकली मावा, कृत्रिम फूल और नकली मोरपंख का इस्तेमाल बढ़ गया था। यह न केवल धार्मिक आस्था के खिलाफ था, बल्कि स्वास्थ्य और गुणवत्ता के लिहाज से भी चिंताजनक था।

इसी कारण “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” के तहत इन सभी वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

अब कैसे होगा भोग और प्रसाद?

नई व्यवस्था के अनुसार, श्रद्धालु अब सीधे मंदिर में भोग नहीं चढ़ा सकेंगे।

  • केवल नकद, सोना-चांदी या अन्य मूल्यवान भेंट भंडार में जमा कराई जा सकेगी
  • मंदिर परिसर में खाली हाथ प्रवेश करना होगा
  • प्रसाद के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था की गई है
  • विशेष भोग के लिए आरती के बाद राजभोग की रसीद कटवानी होगी

“श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” का उद्देश्य दर्शन प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु बिना परेशानी के भगवान के दर्शन कर सकें।

श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस फैसले पर श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया अलग-अलग सामने आई है। कुछ लोग इसे जरूरी और सही कदम बता रहे हैं, उनका कहना है कि इससे भीड़ कम होगी और दर्शन आसान होंगे। वहीं कुछ श्रद्धालु परंपराओं में बदलाव को लेकर असहज हैं और भोग चढ़ाने के लिए अलग व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

हालांकि प्रशासन का साफ कहना है कि “श्री सांवलियाजी मंदिर नियम” केवल व्यवस्था सुधारने और अनुशासन बनाए रखने के लिए लागू किए गए हैं।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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