नीमच। जिस सिंगोली हादसे मे जर्जर मकान की छत गिरने से मां-बेटे की दर्दनाक मौत के बाद उठे सवालों और ‘द टाइम्स ऑफ एमपी’ द्वारा प्रकाशित खबर का असर अब प्रशासनिक स्तर पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने जिलेभर में जर्जर एवं क्षतिग्रस्त भवनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी करते हुए सभी अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर ऐसे भवनों को हटाने का आदेश दिया है।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए “मानसून से पहले जीरो रिस्क” अभियान के तहत व्यापक कार्रवाई की जाएगी।
सिंगोली हादसे के बाद उठे थे सवाल
सोमवार रात सिंगोली नगर में जर्जर मकान की छत गिरने से सोसर बाई धनोतिया और उनके बेटे नीलेश धनोतिया की मौत हो गई थी। हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाए थे कि आखिर वर्षों से जर्जर मकानों में रह रहे परिवारों की सुरक्षा को लेकर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
‘द टाइम्स ऑफ एमपी’ ने भी अपनी खबर में जर्जर भवनों की स्थिति, नगर परिषद की व्यवस्थाओं और मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। खबर में यह सवाल उठाया गया था कि यदि पहले सर्वे और कार्रवाई होती तो शायद ऐसी घटना टाली जा सकती थी।
अब प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों को इस पूरे घटनाक्रम के बाद हुई बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
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एक सप्ताह में हटाने होंगे सभी जर्जर भवन
कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में चिन्हित जर्जर और क्षतिग्रस्त भवनों को एक सप्ताह के भीतर डिस्मेंटल करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि वर्षाकाल में ऐसे भवन किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। इसलिए जोखिम वाले भवनों को तत्काल हटाने की कार्रवाई की जाए ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो।
सीएमओ और जनपद सीईओ पर रहेगी सीधी जिम्मेदारी
बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री अमन वैष्णव, एडीएम श्री बी.एस. कलेश, सभी एसडीएम, जनपद सीईओ, सीएमओ एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी नगरीय निकायों के सीएमओ और जनपद सीईओ को अपने क्षेत्रों का फील्ड सर्वे करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को प्रत्येक वार्ड और मोहल्ले का निरीक्षण कर यह प्रमाणित करना होगा कि वहां कोई भी खतरनाक जर्जर भवन शेष नहीं है।
यदि किसी निजी भवन की स्थिति खतरनाक पाई जाती है तो संबंधित परिवार को तत्काल सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
लिखित प्रमाण पत्र देना होगा
कलेक्टर ने कहा कि सभी सीएमओ और जनपद सीईओ लिखित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे कि उनके क्षेत्र में कोई जर्जर भवन शेष नहीं है।उन्होंने चेतावनी दी कि प्रमाण पत्र देने के बाद भी यदि किसी जर्जर भवन के कारण दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नाले-नालियों की सफाई और जलभराव रोकने पर जोर
बैठक में मानसून पूर्व तैयारियों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी छोटे-बड़े नाले और नालियों की सफाई तत्काल पूर्ण की जाए ताकि बारिश के दौरान जल निकासी प्रभावित न हो। निर्माण विभागों को भी निर्देशित किया गया कि किसी सड़क या निर्माण कार्य के कारण जलभराव की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
दिए गए प्रमुख निर्देश
- सभी जर्जर भवनों को एक सप्ताह में हटाया जाए।
- सभी वार्डों का फील्ड सर्वे अनिवार्य।
- निजी जर्जर भवनों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।
- नाले और नालियों की सफाई मानसून से पहले पूरी की जाए।
- जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी रखी जाए।
- सभी विभाग आपदा प्रबंधन की तैयारी सुनिश्चित करें।
पेयजल टंकियों की सफाई और क्लोरीनेशन अनिवार्य
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि पेयजल पाइप लाइनों की जांच कर सभी लीकेज तत्काल बंद कराए जाएं। इसके साथ ही सभी पेयजल टंकियों की सफाई, जल स्रोतों का क्लोरीनेशन और स्कूलों, अस्पतालों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों की पानी की टंकियों की विशेष सफाई कराने को कहा गया है।
जलभराव वाले पुलों पर नहीं चलेंगे स्कूल वाहन
कलेक्टर ने परिवहन विभाग को निर्देशित किया कि पुल और पुलियाओं पर जलभराव की स्थिति में किसी भी यात्री बस या स्कूल वाहन को नहीं गुजरने दिया जाए। प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही से जनहानि हो सकती है, इसलिए सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
अब नजर कार्रवाई पर
सिंगोली हादसे के बाद प्रशासनिक बैठकों में सख्त निर्देश जरूर जारी हुए हैं, लेकिन अब लोगों की नजर जमीनी कार्रवाई पर है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद जर्जर भवनों को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में आने वाला एक सप्ताह यह तय करेगा कि प्रशासनिक निर्देश कागजों तक सीमित रहते हैं या वास्तव में जर्जर भवनों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई होती है।
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