सोते समय गिरने का अहसास: नींद में क्यों लगता है जोरदार झटका? 5 मुख्य कारण
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
07 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 07 दिसम्बर 2025, 11:30 पूर्वाह्न IST)

 दिल्ली:-सोते समय गिरने का अहसास दिन भर की थकान के बाद जब आप अपने बिस्तर पर सुकून की तलाश में जाते हैं, आंखें मूंदते हैं और नींद की आगोश में समाने ही वाले होते हैं… तभी सोते समय गिरने का अहसास अचानक आपके शरीर में एक जोरदार झटका लगता है। ऐसा महसूस होता है मानो आप किसी ऊंँची इमारत या पहाड़ से नीचे गिर रहे हों। आपका दिल जोर से धड़कने लगता है और नींद पूरी तरह टूट जाती है।

क्या यह घटना आपके साथ भी हुई है? अगर हाँ, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अकेले नहीं हैं। दुनिया की एक बड़ी आबादी इस अनुभव से गुजरती है। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को हाइपनिक जर्क (Hypnic Jerk) कहा जाता है। हाल ही में  इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है और इसके पीछे के दिलचस्प विज्ञान को समझाया है।

क्या है ‘सोते समय गिरने का अहसास’?

 सोते समय गिरने का अहसास या हाइपनिक जर्क एक अनैच्छिक मांसपेशी ऐंठन (Involuntary Muscle Spasm) है। यह ठीक वैसा ही है जैसे कभी-कभी हमारी आंख फड़कती है या हिचकी आती है। सोते समय गिरने का अहसास यह घटना उस वक्त घटित होती है जब हम जागने और सोने की अवस्था के बीच (Transition Period) में होते हैं।वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘हाइपनगोगिक जर्क’ (Hypnagogic Jerk) या ‘स्लीप स्टार्ट’ (Sleep Start) भी कहा जाता है। 

     जब हम गहरी नींद में जाने की तैयारी कर रहे होते हैं, तो हमारा शरीर रिलैक्स होने लगता है, लेकिन दिमाग पूरी तरह शांत नहीं हुआ होता। इसी असमंजस में यह झटका लगता है।

दिमाग और मांसपेशियों के बीच का ‘मिसकम्यूनिकेशन’

सोते समय गिरने का अहसास  इस घटना के पीछे का विज्ञान बेहद रोचक है। जब आप सोने की कोशिश करते हैं, तो आपकी मांसपेशियां (Muscles) धीरे-धीरे शिथिल या रिलैक्स होने लगती हैं। आपकी धड़कन धीमी होती है और शरीर का तापमान गिरता है। “कई बार आपका दिमाग इस रिलैक्सेशन (मांसपेशियों के ढीलेपन) को गलत समझ लेता है। दिमाग को लगता है कि आप वास्तव में गिर रहे हैं। चूंकि दिमाग का काम आपकी रक्षा करना है, इसलिए वह तुरंत हरकत में आता है और आपको ‘बचाने’ के लिए मांसपेशियों को एक तेज संकेत (Signal) भेजता है।”

परिणामस्वरूप, आपके हाथ-पैर या पूरे शरीर में एक तेज झटका लगता है, ताकि आप गिरते समय खुद को संभाल सकें। असल में आप गिर नहीं रहे होते, यह केवल दिमाग का एक ‘फॉल्स अलार्म’ (False Alarm) होता है।

क्या हमारा आदिमानव इतिहास है जिम्मेदार?

वैज्ञानिकों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि सोते समय गिरने का अहसास होना हमारे विकासवादी इतिहास (Evolutionary History) से जुड़ा है। लाखों साल पहले, जब हमारे पूर्वज (आदिमानव) पेड़ों पर सोया करते थे, तब गिरने का मतलब गंभीर चोट या मौत हो सकता था।

उस समय यह रिफ्लेक्स (झटका) एक जीवन रक्षक प्रणाली की तरह काम करता था। सोते समय गिरने का अहसास जैसे ही शरीर का संतुलन बिगड़ता या मांसपेशियां ज्यादा ढीली होतीं, दिमाग तुरंत शरीर को जगा देता था ताकि इंसान पेड़ से नीचे न गिरे। आज हम आरामदायक बिस्तरों पर सोते हैं, लेकिन हमारे दिमाग में वह प्राचीन ‘सेफ्टी फीचर’ अभी भी मौजूद है, जो कभी-कभी सक्रिय हो जाता है।

किन 5 मुख्य कारणों से बढ़ जाता है सोते समय गिरने का अहसास  का खतरा? 

हालांकि यह सोते समय गिरने का अहसास एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में सोते समय गिरने का अहसास  हाइपनिक जर्क की आवृत्ति बढ़ सकती है।  एक्सपर्ट्स के अनुसार, निम्नलिखित कारण इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं:

  1. अत्यधिक तनाव (Stress): जब आप मानसिक रूप से बहुत थके होते हैं या तनाव में होते हैं, तो आपका दिमाग सोने के दौरान भी ‘हाइपरएक्टिव’ रहता है। इससे गलत सिग्नल भेजने की संभावना बढ़ जाती है।

  2. कैफीन का सेवन (Caffeine Intake): रात के समय कॉफी, चाय या एनर्जी ड्रिंक पीने से दिमाग सतर्क अवस्था में रहता है, जिससे नींद की प्रक्रिया बाधित होती है।

  3. शारीरिक थकान (Physical Fatigue): बहुत ज्यादा वर्कआउट या भागदौड़ भरा दिन भी मांसपेशियों को इतना थका देता है कि वे बहुत तेजी से रिलैक्स होती हैं, जिसे दिमाग खतरा समझ लेता है।

  4. नींद की कमी (Sleep Deprivation): अगर आपकी नींद का पैटर्न सही नहीं है, तो हाइपनिक जर्क होने की संभावना ज्यादा होती है।

क्या यह किसी बीमारी का संकेत है?

 सोते समय गिरने का अहसास होना पूरी तरह से सामान्य और सुरक्षित है। यह कोई बीमारी नहीं है और न ही इससे नर्वस सिस्टम को कोई नुकसान पहुंचता है। यह केवल शरीर का एक रिफ्लेक्स एक्शन है।हालांकि, अगर ये झटके इतने तेज और बार-बार आ रहे हैं कि आपकी नींद पूरी नहीं हो पा रही है या आपको सोने से डर लगने लगा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में आपको किसी स्लीप स्पेशलिस्ट या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स

अगर आप चाहते हैं कि आपको ये झटके कम लगें और आपकी नींद सुकून भरी हो, तो अपनी लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव करें:

  • सोने से कम से कम 6 घंटे पहले कैफीन का सेवन बंद कर दें।

  • सोने से पहले रिलैक्सेशन तकनीक जैसे मेडिटेशन या वार्म बाथ (गुनगुने पानी से नहाना) का सहारा लें।

  • अपने सोने और जागने का समय निश्चित करें।

  • बिस्तर पर जाने से पहले मोबाइल स्क्रीन से दूरी बना लें।

अगली बार जब आपको सोते समय गिरने का अहसास हो, तो घबराएं नहीं। करवट बदलें, लंबी सांस लें और मुस्कुराएं—क्योंकि आपका दिमाग बस आपकी सुरक्षा करने की कोशिश कर रहा है, भले ही उसकी जरूरत न हो।


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Aakash Sharma
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