157 ASI को SI पद पर प्रमोशन, दागी कर्मी को प्रभार देने पर SP जिम्मेदार
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
05 सितम्बर 2026, (अपडेटेड 05 सितम्बर 2026, 1:31 अपराह्न IST)

मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने रिव्यू डीपीसी के बाद 157 सहायक उपनिरीक्षकों (ASI) को सब-इंस्पेक्टर (SI) पद पर प्रमोट किया है। इनमें पांच ऐसे पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जो आदेश जारी होने से पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। पुलिस मुख्यालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दागी कर्मियों को नई जिम्मेदारी का प्रभार देने में लापरवाही होने पर संबंधित SP या यूनिट प्रमुख जिम्मेदार होंगे।

यह आदेश पुलिस मुख्यालय की कार्मिक शाखा की ओर से जारी किया गया है। आदेश डीआईजी (कार्मिक) रियाज इकबाल द्वारा जारी किया गया है।

रिव्यू DPC के बाद 157 ASI को प्रमोशन

पुलिस मुख्यालय ने रिव्यू डीपीसी यानी Departmental Promotion Committee की प्रक्रिया के बाद 157 ASI के प्रमोशन का रास्ता साफ किया है। इन्हें सब-इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति का लाभ दिया गया है।जानकारी के मुताबिक, 20 जुलाई 2025 को हुई प्रमोशन प्रक्रिया में कुछ पात्र पुलिसकर्मी तकनीकी कारणों से सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। अब रिव्यू प्रक्रिया के बाद उन्हें पदोन्नति का लाभ दिया गया है।

इस प्रमोशन के साथ संबंधित कर्मियों को पे-मैट्रिक्स लेवल-9 का लाभ दिया गया है।

पांच रिटायर्ड पुलिसकर्मी भी सूची में

157 ASI की सूची में पांच ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं, जो आदेश जारी होने से पहले रिटायर हो चुके हैं।

इनमें—

  • जबलपुर के कृष्ण कुमार शुक्ला
  • भिंड के विनिश्वर दयाल
  • छतरपुर के छोटू लाल पटेल
  • रीवा के अशोक कुमार मिश्रा
  • भोपाल के गणपत सिंह

शामिल हैं।

आदेश के अनुसार इन कर्मियों को पात्रता तिथि पर सेवा में मानते हुए काल्पनिक प्रमोशन तिथि का लाभ दिया गया है। इसके आधार पर उनका अंतिम मूल वेतन संबंधित पद के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

पेंशन और दूसरे लाभों पर भी असर

रिटायर्ड कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलने से उनके अंतिम मूल वेतन में बदलाव होगा। इसके परिणामस्वरूप उन्हें पेंशन में लाभ मिल सकता है। इसके अलावा ग्रेच्युटी और अवकाश एनकैशमेंट में भी बढ़ा हुआ आर्थिक लाभ मिलने की बात सामने आई है। इस तरह रिव्यू DPC के बाद जारी आदेश का असर केवल पदोन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्र रिटायर्ड कर्मियों के सेवानिवृत्ति लाभों पर भी पड़ेगा।

दागी कर्मियों के मामले में सख्त शर्तें

157 ASI प्रमोशन के आदेश में दागी या नियमों के तहत तत्काल कार्यमुक्त नहीं किए जा सकने वाले कर्मियों को लेकर विशेष शर्तें रखी गई हैं। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप पत्र जारी हो चुका है, तो उसे तत्काल रिलीव नहीं किया जाएगा। इसी तरह जिन कर्मचारियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश हो चुका है, उन्हें भी इस स्थिति में तुरंत नई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

इसके अलावा—

  • निलंबित कर्मचारी को कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा।
  • बेसिक ट्रेनिंग पास नहीं करने वाले कर्मियों पर भी यही व्यवस्था लागू होगी।
  • संबंधित कर्मचारी की स्थिति की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।

दागी को प्रभार दिया तो SP की जिम्मेदारी

आदेश में सबसे अहम बात यह है कि नई पोस्टिंग या पदोन्नति का लाभ देते समय संबंधित कर्मचारी की स्थिति की जांच करना जरूरी होगा। यदि किसी ऐसे कर्मी को प्रभार दे दिया जाता है, जिसके खिलाफ ऊपर बताई गई परिस्थितियां लागू हैं, तो संबंधित SP या यूनिट प्रमुख की जिम्मेदारी तय होगी। इसका मतलब है कि जिले या संबंधित यूनिट के अधिकारियों को प्रमोशन के बाद प्रभार देने से पहले कर्मचारी की विभागीय और न्यायालयीन स्थिति की जांच करनी होगी।

यह प्रावधान पुलिस विभाग में पदोन्नति के बाद जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन प्रमोशन

पुलिस मुख्यालय के आदेश में प्रमोशन को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी शर्त भी रखी गई है। आदेश की कंडिका-7 के अनुसार सभी पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। बताया गया है कि पदोन्नति आरक्षण नियम 2002 को हाईकोर्ट द्वारा निरस्त किया जा चुका है और इससे संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद वर्तमान पदोन्नतियों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। वरीयता सूची में भी बदलाव की संभावना बनी हुई है।

बालाघाट से 79 पुलिसकर्मियों का तबादला

इसी बीच पुलिस मुख्यालय ने बालाघाट जिले से 79 पुलिसकर्मियों के तबादले का भी फैसला लिया है। यह कार्रवाई स्थापना बोर्ड की मंजूरी के बाद की गई है।

तबादला सूची में शामिल कर्मचारियों में—

  • 74 आरक्षक
  • 4 कार्यवाहक प्रधान आरक्षक
  • 1 प्रधान आरक्षक

शामिल हैं।

इन पुलिसकर्मियों को भोपाल सहित अलग-अलग जिलों में स्थानांतरित किया गया है।

अपने खर्च पर होगा तबादला

बालाघाट से किए गए इन तबादलों की एक खास शर्त यह है कि संबंधित कर्मचारियों को अपने खर्च पर स्थानांतरण करना होगा। उन्हें यात्रा भत्ता या स्थानांतरण भत्ता नहीं दिया जाएगा।

पुलिस मुख्यालय ने तबादले के लिए चार प्रमुख शर्तें निर्धारित की हैं—

  1. कर्मचारी की सेवा अवधि कम से कम पांच वर्ष पूरी हो चुकी हो।
  2. तबादला कर्मचारी के गृह जिले में नहीं होना चाहिए।
  3. कर्मचारी ने बेसिक ट्रेनिंग पूरी कर ली हो।
  4. कर्मचारी वर्तमान में निलंबित नहीं होना चाहिए।

यदि इनमें से कोई शर्त पूरी नहीं होती है, तो संबंधित कर्मचारी की रवानगी रोक दी जाएगी।

प्रमोशन और तबादले में नियमों पर जोर

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय के इन दोनों फैसलों में पात्रता और नियमों के पालन पर जोर दिखाई देता है। एक तरफ रिव्यू DPC के बाद 157 ASI को SI पद पर प्रमोशन दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ दागी, निलंबित या आवश्यक प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले कर्मियों को लेकर स्पष्ट शर्तें रखी गई हैं। साथ ही, बालाघाट से 79 पुलिसकर्मियों के तबादले में भी सेवा अवधि, गृह जिला, बेसिक ट्रेनिंग और निलंबन की स्थिति को अनिवार्य शर्तों से जोड़ा गया है।

157 ASI प्रमोशन फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन है। इसलिए पदोन्नति पाने वाले पुलिसकर्मियों की स्थिति पर आगे आने वाला न्यायिक फैसला महत्वपूर्ण रहेगा।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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