8 घंटे सोने के बाद भी थकान? वजह सिर्फ नींद की कमी नहीं
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
23 अगस्त 2026, (अपडेटेड 23 अगस्त 2026, 12:56 अपराह्न IST)

हेल्थ डेस्क, नीमच | Sleep Quality अगर 8 घंटे सोने के बाद भी थकान महसूस होती है और सुबह उठते ही शरीर सुस्त या दिमाग भारी लगता है, तो इसकी वजह सिर्फ कम नींद लेना नहीं हो सकती। अच्छी नींद के लिए केवल बिस्तर पर बिताए घंटों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि यह भी जरूरी है कि उन घंटों में शरीर और दिमाग को कितना आराम मिला।

एक्सपर्ट के मुताबिक, कई बार व्यक्ति 8 घंटे तक सोता है, लेकिन नींद बार-बार टूटने, सोने-जागने का समय बदलने, रात में मोबाइल इस्तेमाल करने या कैफीन लेने जैसी आदतों के कारण स्लीप क्वालिटी प्रभावित हो सकती है। इसका असर अगले दिन की ऊर्जा और काम करने की क्षमता पर दिखाई दे सकता है।

8 घंटे की नींद के बाद भी क्यों रहती है थकान?

8 घंटे सोने के बाद भी थकान का एक कारण खराब स्लीप क्वालिटी हो सकती है। यदि रात में नींद लगातार नहीं रहती या बार-बार टूटती है, तो सुबह उठने के बाद भी शरीर को पर्याप्त आराम महसूस नहीं हो सकता। इस स्थिति में व्यक्ति को सुबह थकान, दिनभर सुस्ती, दिमाग में भारीपन या काम पर ध्यान लगाने में परेशानी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। इसलिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि आप कितने घंटे सोए, बल्कि नींद की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

सोने से पहले चाय-कॉफी से रहें सावधान

रात में सोने के आसपास चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक या अन्य कैफीन वाली चीजों का सेवन कुछ लोगों की नींद को प्रभावित कर सकता है। कैफीन शरीर में कई घंटों तक रह सकता है और नींद आने में परेशानी पैदा कर सकता है। अगर रात में नींद आने में परेशानी रहती है, तो सोने से कुछ घंटे पहले कैफीन वाली चीजों से दूरी बनाने की कोशिश की जा सकती है।

बदलता स्लीप शेड्यूल भी बिगाड़ सकता है नींद

कभी जल्दी और कभी बहुत देर से सोने की आदत भी नींद की नियमितता को प्रभावित कर सकती है। शरीर को एक नियमित रूटीन की आदत होती है। इसलिए रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करना बेहतर माना जाता है। छुट्टी वाले दिन भी सोने और जागने के समय में बहुत ज्यादा बदलाव करने से बचना चाहिए। नियमित नींद का शेड्यूल स्लीप रूटीन को बेहतर रखने में मदद कर सकता है।

सोने से पहले मोबाइल चलाना पड़ सकता है भारी

रात में बिस्तर पर जाने के बाद मोबाइल चलाने की आदत भी आपकी नींद को प्रभावित कर सकती है। सोशल मीडिया, वीडियो और लगातार स्क्रीन देखने से दिमाग सक्रिय रह सकता है और सोने का समय आगे खिसक सकता है। इसलिए बेहतर नींद के लिए सोने से पहले मोबाइल और दूसरी स्क्रीन से दूरी बनाने की कोशिश करें।

कैसे पहचानें खराब स्लीप क्वालिटी ?

यदि पर्याप्त समय सोने के बावजूद रोज सुबह ताजगी महसूस नहीं होती, तो इन संकेतों पर ध्यान दें:

  • सुबह उठते ही थकान महसूस होना
  • दिनभर सुस्ती या नींद आना
  • दिमाग भारी लगना
  • काम पर ध्यान न लगना
  • रात में बार-बार नींद टूटना
  • सिरदर्द महसूस होना

अच्छी नींद के लिए इन बातों का रखें ध्यान

  • रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।
  • सोने की जगह को शांत और अंधेरा रखें।
  • सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करें।
  • रात में कैफीन वाली चीजों से बचने की कोशिश करें।
  • बिस्तर को आरामदायक रखें।
  • छुट्टी के दिन भी स्लीप शेड्यूल में बहुत ज्यादा बदलाव न करें।

8 घंटे सोने के बाद भी थकान लगातार बनी रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नींद की अवधि के साथ उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना भी जरूरी है। यदि थकान या नींद से जुड़ी परेशानी लगातार बनी रहती है, तो योग्य डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहेगा।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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