मनासा । मध्यप्रदेश के नीमच जिले की मनासा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत दाता के अमरपुरा और उप ग्राम संग्रामपुरा में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई पानी की टंकियां अब सवालों के घेरे में आ गई हैं। यहां “पानी की टंकी लीकेज” का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य इतना घटिया हुआ कि पहली टेस्टिंग में ही टंकी से पानी रिसने लगा।
ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि नई बनी पानी की टंकी कई जगहों से लीक हो रही है। लोगों ने यह वीडियो संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया, लेकिन अब तक न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही निर्माण एजेंसी ने सुधार कार्य शुरू किया।
गांव में पहले से पानी संकट, अब “पानी की टंकी लीकेज” बनी नई मुसीबत
अमरपुरा और संग्रामपुरा क्षेत्र में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। ऐसे में जल जीवन मिशन से लोगों को बड़ी उम्मीद थी, लेकिन “पानी की टंकी लीकेज” ने ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ गांव तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा। टंकी का निर्माण पूरा होने से पहले ही लीकेज शुरू होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वीडियो वायरल, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी गायब
स्थानीय लोगों ने जब टंकी से पानी रिसते देखा तो उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद गांव में चर्चा तेज हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि “पानी की टंकी लीकेज” की जानकारी कई बार अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली।
लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पूरी टंकी क्षतिग्रस्त हो सकती है। इससे सरकारी धन का बड़ा नुकसान होगा और ग्रामीणों को फिर पानी संकट झेलना पड़ेगा।
करोड़ों की योजना पर उठे भ्रष्टाचार के सवाल
जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है। लेकिन मनासा क्षेत्र में सामने आया “पानी की टंकी लीकेज” मामला योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण सही तरीके से हुआ होता तो नई टंकी पहली टेस्टिंग में ही लीक नहीं होती।
जांच की मांग, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
गांव के लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच करने वाले इंजीनियर और संबंधित ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि “पानी की टंकी लीकेज” मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आखिर जिम्मेदार कौन?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि “पानी की टंकी लीकेज” के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? निर्माण एजेंसी, ठेकेदार या फिर गुणवत्ता जांच करने वाले अधिकारी? ग्रामीणों का कहना है कि बिना उच्चस्तरीय जांच के सच्चाई सामने नहीं आएगी।
यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं बल्कि उन सभी सरकारी योजनाओं के लिए चेतावनी है, जहां करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता नजर नहीं आती।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी ग्रामीणों की उम्मीद
फिलहाल ग्रामीण प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
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