नीमच। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में आजीविका मिशन लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। नीमच जिले के जावद विकासखंड अंतर्गत ग्राम ढाबा में महिलाओं ने स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। मिशन की मदद से गांव की कई महिलाएं अब अपने व्यवसाय संचालित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से गांव में महिला स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया। इन समूहों से जुड़कर महिलाओं ने बचत, बैंकिंग और छोटे व्यवसायों की शुरुआत की। आज गांव में 10 महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे करीब 125 परिवार जुड़े हुए हैं।
इन समूहों को यूको बैंक सरवानिया महाराज और एचडीएफसी बैंक नीमच के माध्यम से 55 लाख रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इस आर्थिक सहयोग से महिलाओं को रोजगार शुरू करने और अपने परिवार की आय बढ़ाने का अवसर मिला।
ब्यूटी पार्लर और जनरल स्टोर से आत्मनिर्भर बनी अंजू जाटव
ग्राम ढाबा निवासी श्रीमती अंजू जाटव की सफलता आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। पहले सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन करने वाली अंजू ने आजीविका मिशन से जुड़कर खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।
मिशन से ऋण सहायता मिलने के बाद उन्होंने गांव में ब्यूटी पार्लर और जनरल स्टोर की शुरुआत की। धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ता गया और आज वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को आसानी से पूरा कर रही हैं।
अंजू जाटव बताती हैं कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें व्यवसाय चलाने, बचत करने और आर्थिक प्रबंधन की जानकारी मिली। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा और अब वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
गांव में बढ़ा रोजगार और आत्मविश्वास
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को संगठित करने में आजीविका मिशन की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो रही है। गांव की महिलाएं अब सिलाई, किराना दुकान, डेयरी, कृषि कार्य और छोटे व्यापारों से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं।
महिलाओं के आर्थिक रूप से मजबूत होने का असर गांव के सामाजिक माहौल पर भी दिखाई देने लगा है। अब महिलाएं पंचायत और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
बैंकिंग सुविधा से मिला बड़ा लाभ
महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में भी आजीविका मिशन ने अहम भूमिका निभाई है। पहले जहां ग्रामीण महिलाएं बैंकिंग प्रक्रियाओं से दूरी बनाए रखती थीं, वहीं अब वे स्वयं ऋण लेकर व्यवसाय संचालित कर रही हैं।
यूको बैंक और एचडीएफसी बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए ऋण ने महिलाओं के छोटे कारोबार को नई गति दी है। इससे कई परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और गांव में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।
विकास की नई पहचान बना ग्राम ढाबा
ग्राम ढाबा में आजीविका मिशन के जरिए शुरू हुई यह पहल अब पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी है। महिलाओं के संगठित होने से गांव में विकास कार्यों को भी गति मिली है। पंचायत और प्रशासन की मदद से गांव में कई योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है।
यदि इसी तरह महिलाओं को प्रशिक्षण, बाजार और वित्तीय सहायता मिलती रही, तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक विकास को नई मजबूती मिलेगी।
आज ग्राम ढाबा की महिलाएं यह साबित कर चुकी हैं कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर महिलाएं न केवल खुद आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि पूरे गांव की तस्वीर बदल सकती हैं।
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