आजीविका मिशन सफलता कहानी: खानखेड़ी की महिलाओं ने बदली गांव की तस्वीर, राधा बैरागी बनीं मिसाल
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
09 मई 2026, (अपडेटेड 09 मई 2026, 1:52 अपराह्न IST)

मनासा। मध्यप्रदेश के नीमच जिले के मनासा विकासखंड का छोटा सा गांव खानखेड़ी आज महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बन चुका है। आजीविका मिशन सफलता कहानी के रूप में यह गांव अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। वर्ष 2018 से पहले गांव में महिलाओं का कोई स्वयं सहायता समूह सक्रिय नहीं था। महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं और आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बेहद कम थी।

मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने गांव में महिलाओं को संगठित करने की पहल शुरू की। लगातार बैठकों और जागरूकता अभियान के बाद महिलाओं ने समूहों से जुड़ना शुरू किया। आज गांव में 24 महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

राधा बैरागी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

गांव के “राधे-राधे” स्वयं सहायता समूह की सदस्य राधा बैरागी इस बदलाव की सबसे बड़ी उदाहरण बनकर सामने आई हैं। आजीविका मिशन सफलता कहानी में राधा बैरागी का नाम अब प्रेरणा के रूप में लिया जा रहा है।

राधा ने समूह और बैंक से ऋण लेकर शुरुआत में मनिहारी की छोटी दुकान शुरू की थी। मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। वर्ष 2023 में उन्होंने साड़ी की दुकान और जनरल स्टोर शुरू किया, जिससे आज उन्हें प्रतिदिन करीब 540 रुपये की आय हो रही है।

महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रहीं राधा

राधा बैरागी अब गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे महिलाओं को घर से बाहर निकलकर रोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

समूह बैठकों में राधा महिलाओं को बचत, बैंकिंग और स्वरोजगार के महत्व के बारे में समझाती हैं। यही वजह है कि अब गांव की कई महिलाएं किराना दुकान, पशुपालन और कृषि आधारित कार्यों से जुड़ रही हैं।

समूहों को मिला आर्थिक सहयोग

महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए आजीविका मिशन के तहत वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई। राधा बैरागी के समूह को रिवॉल्विंग फंड के रूप में 20 हजार रुपये मिले। इसके अलावा सामुदायिक निवेश निधि (CIF) से एक लाख रुपये और बाद में छह लाख रुपये तक की सहायता दी गई।

समूह की महिलाओं ने इस राशि का उपयोग कृषि कार्य, पशुपालन, किराना दुकान और अन्य आय बढ़ाने वाले व्यवसायों में किया। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिला।

गांव की बदल रही सामाजिक तस्वीर

गांव के लोगों का कहना है कि पहले महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब वे आर्थिक फैसलों में भी भागीदारी निभा रही हैं। आजीविका मिशन सफलता कहानी ने गांव की बेटियों और महिलाओं की सोच बदल दी है।

अब महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। गांव में सामाजिक जागरूकता बढ़ी है और परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

ग्रामीण विकास का बन रहा सफल मॉडल

मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की यह पहल अब ग्रामीण विकास का सफल मॉडल बनती जा रही है। यदि इसी तरह महिलाओं को प्रशिक्षण, बाजार और आर्थिक सहयोग मिलता रहा तो खानखेड़ी जैसे गांव आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मिसाल बन सकते हैं।

आजीविका मिशन सफलता कहानी यह साबित करती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी समाज और परिवार की तस्वीर बदल सकती हैं।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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