नीमच। नीमच जिले के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश सरकार ने जिले की बहुप्रतीक्षित सिंचाई परियोजना को मंजूरी देते हुए 163.95 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में खुमानसिंह शिवाजी जलाशय (ठीकरिया तालाब) सूक्ष्म सिंचाई योजना को हरी झंडी दी गई। इस फैसले के बाद क्षेत्र के किसानों में खुशी का माहौल है।
यह सिंचाई परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की जरूरत मानी जा रही थी। लगातार जल संकट और बारिश पर निर्भर खेती के कारण किसानों को हर साल परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब इस योजना के लागू होने से हजारों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
विधायक दिलीप सिंह परिहार के प्रयास लाए रंग
क्षेत्रीय विधायक दिलीप सिंह परिहार लंबे समय से इस योजना को मंजूरी दिलाने के लिए प्रयासरत थे। उन्होंने कई बार सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाया था। आखिरकार कैबिनेट बैठक में इस सिंचाई परियोजना को स्वीकृति मिल गई।
परिहार ने इसे किसानों के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और पूरी कैबिनेट का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह योजना आने वाले समय में क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देगी।
बांध की ऊंचाई बढ़ेगी, जल संग्रहण होगा मजबूत
परियोजना के तहत ठीकरिया तालाब बांध की ऊंचाई में लगभग एक मीटर की वृद्धि की जाएगी। इससे जलाशय की भंडारण क्षमता बढ़ेगी और लंबे समय तक पानी उपलब्ध रह सकेगा।
यह सिंचाई परियोजना जल संरक्षण के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे सूखे जैसी स्थिति में भी किसानों को राहत मिल सकेगी और भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी।
आधुनिक तकनीक से खेतों तक पहुंचेगा पानी
इस योजना में आधुनिक ‘प्रेशराइज्ड सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली’ का उपयोग किया जाएगा। चंबल नदी का पानी पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए सीधे खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी कम होगी और किसानों को जरूरत के मुताबिक सिंचाई सुविधा मिलेगी।
सरकार का मानना है कि यह सिंचाई परियोजना पारंपरिक नहर व्यवस्था की तुलना में ज्यादा प्रभावी होगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।
22 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना से नीमच तहसील के करीब 22 गांवों की 5200 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। योजना में मेलकी मेवाड़, पालसोडा, बामनिया, पिपलिया व्यास, केनपुरिया, सकरानी, मालिया, रातडिया, डांसिया, अडमालिया, रामपुरिया, डसानी, बिसलवास बामनिया, कानाखेड़ा, बिसलवास सोनीगरा, बोरखेड़ी पानेड़ी और रेवली देवली सहित कई गांव शामिल हैं।
स्थायी सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों को गेहूं, सोयाबीन, लहसुन और अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पेयजल और उद्योगों को भी होगा फायदा
सरकार ने इस सिंचाई परियोजना में जल उपयोग की प्राथमिकता भी तय की है। सबसे पहले पेयजल जरूरतों को पूरा किया जाएगा, उसके बाद सिंचाई और फिर औद्योगिक उपयोग को प्राथमिकता मिलेगी।
इससे झांझरवाड़ा और कराड़िया महाराज क्षेत्र में विकसित हो रहे उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। जानकारों का कहना है कि यह योजना कृषि और औद्योगिक विकास दोनों को गति दे सकती है।
किसानों में उत्साह, विकास को मिलेगी नई रफ्तार
परियोजना की घोषणा के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। किसानों का कहना है कि यदि योजना समय पर पूरी हो जाती है तो खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
यह सिंचाई परियोजना भविष्य में प्रदेश की मॉडल योजनाओं में शामिल हो सकती है। इससे न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय में भी सुधार देखने को मिलेगा।
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