नीमच । नीमच जिले में भूजल स्तर लगातार गिरने के बाद प्रशासन ने बोरवेल और ट्यूबवेल खनन पर सख्त प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसके बावजूद जिला मुख्यालय पर ही अवैध बोरवेल खनन का बड़ा मामला सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा मामला कलेक्टर कार्यालय से महज करीब 800 मीटर की दूरी पर हुआ, जहां देर रात तक मशीन लगाकर खुदाई की जाती रही।
भोलियावास रोड स्थित आनंद विहार कॉलोनी में बुधवार रात भारी मशीनरी के जरिए बोरवेल खनन किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात तक मशीनों की आवाज गूंजती रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में शहर के बीचों-बीच खुलेआम हो रहे अवैध बोरवेल खनन ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात के अंधेरे में शुरू हुई खुदाई
जानकारी के अनुसार बुधवार रात करीब 8 बजे बोरवेल की मशीन आनंद विहार कॉलोनी पहुंची। इसके बाद देर रात तक बोरवेल खनन का काम चलता रहा। स्थानीय लोगों ने बताया कि मशीन काफी देर तक लगातार चलती रही, जिससे आसपास के लोग भी हैरान रह गए।
लोगों का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही जिले में नए बोरवेल खनन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, फिर भी शहर के बीचों-बीच इस तरह खुलेआम अवैध बोरवेल खनन होना कई सवाल खड़े करता है। खास बात यह भी रही कि पूरा काम रात के समय किया गया, जिससे मामले को लेकर और ज्यादा संदेह पैदा हो गया।
भाजपा नेता की कॉलोनी का नाम आने से बढ़ी चर्चा
जिस कॉलोनी में यह खनन किया गया, उसे भाजपा नेता संतोष चौपड़ा की कॉलोनी बताया जा रहा है। इसके बाद मामला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। शहर में लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रभावशाली लोगों के कारण प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी हो रही है।
हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक भाजपा नेता की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन कॉलोनी का नाम सामने आने के बाद शहर में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
संचालक नहीं दिखा पाया परमिशन
मौके पर मौजूद बोरवेल के संचालक ने दावा किया कि उनके पास विजय दुआ के नाम से 200 फीट तक खुदाई की अनुमति है। हालांकि जब उनसे अनुमति से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई भी वैध प्रमाण पत्र नहीं दिखा सके।
यही बात पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। यदि अनुमति थी तो दस्तावेज मौके पर क्यों नहीं थे, और यदि अनुमति नहीं थी तो प्रतिबंध के बावजूद मशीन कैसे चलाई जा रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के शहर के बीचों-बीच इस तरह अवैध बोरवेल खनन संभव नहीं है।
कलेक्टर कार्यालय के पास ही खुली चुनौती
सबसे बड़ी बात यह है कि जहां यह खुदाई की जा रही थी, वह स्थान कलेक्टर कार्यालय से बेहद नजदीक बताया जा रहा है। ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक मुख्यालय के आसपास ही नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकता। यदि प्रतिबंध लागू किया गया है तो उसकी सख्ती से निगरानी भी जरूरी है। लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच इस तरह का अवैध बोरवेल खनन भविष्य में जल संकट को और गंभीर बना सकता है।
भूजल संकट के बीच बढ़ी चिंता
नीमच जिले में इस समय कई क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ पानी की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। इसी स्थिति को देखते हुए कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने जिले में नए बोरवेल और ट्यूबवेल खनन पर रोक लगाई थी।
लगातार हो रहा अवैध बोरवेल खनन भूजल स्तर को और नीचे धकेल सकता है। यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है।
एसडीएम बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद एसडीएम संजीव साहू ने कहा कि विभाग की ओर से इस प्रकार के खनन की कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम के बयान के बाद अब लोगों की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। शहरवासियों का कहना है कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो प्रतिबंध आदेश केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाएंगे।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शहर में चर्चा है कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद मशीन कैसे पहुंची और देर रात तक काम कैसे चलता रहा। अब देखने वाली बात होगी कि जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
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