आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: खतरनाक कुत्तों को मिलेगी मौत, अफसरों पर होगा अवमानना का केस
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
19 मई 2026, (अपडेटेड 19 मई 2026, 3:12 अपराह्न IST)

नई दिल्ली: देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और डॉग बाइट के मामलों पर देश की सर्वोच्च अदालत ने अब तक का सबसे सख्त रवैया अपनाया है। आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेशों को वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है। मंगलवार को एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) की एसओपी को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि खतरनाक और रेबीज से संक्रमित कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर (दया मृत्यु/यूथेनेशिया) मारा जा सकता है। लोगों की जान बचाना और गरिमा के साथ जीना सबसे ऊपर है। राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन मूक दर्शक बने नहीं रह सकते। अगर इन आदेशों को लागू करने में कोताही बरती गई, तो सीधे अधिकारियों पर अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

‘कुत्तों के डर के बिना जीना सबका हक़’

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान उन जमीनी हकीकतों का जिक्र किया जिन्हें अब तक नजरअंदाज किया जा रहा था। अदालत ने कहा कि छोटे बच्चों को बुरी तरह नोचा जा रहा है, बुजुर्गों पर हमले हो रहे हैं और यहां तक कि विदेशी यात्रियों को भी शिकार बनाया जा रहा है।

पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “गरिमा के साथ जीने के अधिकार में यह भी शामिल है कि व्यक्ति कुत्तों के हमलों के डर के बिना स्वतंत्र रूप से जीवन जी सके। संविधान ऐसे समाज की कल्पना नहीं करता, जहां बच्चों और बुजुर्गों का जीवन केवल उनकी शारीरिक ताकत या किस्मत के भरोसे हो।”

सार्वजनिक जगहों से हमेशा के लिए हटेंगे कुत्ते

सुप्रीम कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के आदेश को बरकरार रखा है। इसके तहत स्कूल, अस्पताल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों की बाड़बंदी की जाएगी।

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट

सबसे अहम बात यह है कि इन सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा। अब ऐसे आवारा कुत्तों को अनिवार्य रूप से डॉग शेल्टर होम्स में ही रखा जाएगा। सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर पहले ही बैन लगाया जा चुका है।

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के 8 बड़े निर्देश

अदालत ने पूरे देश के लिए एक स्पष्ट और सख्त गाइडलाइन जारी की है:

  1. नियमों की सख्ती: राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों को मजबूत करें और जमीन पर कड़ाई से लागू करें।

  2. हर जिले में ABC सेंटर: हर जिले में पूरी तरह से सक्रिय एक एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर बनाया जाए। आबादी के हिसाब से इनकी संख्या बढ़ाई जाए।

  3. दया मृत्यु (Euthanasia): रेबीज से संक्रमित और जानलेवा हो चुके बेहद खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत मौत का इंजेक्शन दिया जा सकता है, ताकि लोगों का जीवन सुरक्षित रहे।

  4. अफसरों पर सीधा एक्शन: जो अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उन पर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चलेगा।

  5. हाईवे से पशुओं की शिफ्टिंग: NHAI नेशनल हाईवे पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए पुराने ट्रांसपोर्ट वाहनों का इस्तेमाल कर उन्हें हटाए और इसकी मॉनिटरिंग करे।

  6. दवाओं का स्टॉक: सभी जगहों पर एंटी-रेबीज दवाओं (Vaccines) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

  7. पब्लिक सेफ्टी सर्वोपरि: जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी ये नियम लागू किए जाएं।

  8. अधिकारियों को कानूनी ढाल: कोर्ट के आदेश लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को लीगल प्रोटेक्शन मिले। उनके खिलाफ सामान्य तौर पर FIR दर्ज न की जाए।

इन राज्यों के खौफनाक आंकड़ों ने अदालत को किया हैरान

सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने जो आंकड़े रखे गए, वे बेहद डराने वाले थे:

  • राजस्थान: अकेले श्री गंगानगर में एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं सामने आईं। बच्चों के चेहरों पर गहरे घाव थे।

  • तमिलनाडु: साल के पहले चार महीनों में डॉग बाइट की 2 लाख घटनाएं दर्ज की गईं।

  • गुजरात (सूरत): एक जर्मन यात्री को कुत्ते ने अपना शिकार बनाया।

राज्यों की वर्तमान स्थिति:

  • उत्तर प्रदेश और कर्नाटक: देश में सबसे अधिक आवारा कुत्ते इन्ही दो राज्यों में हैं। हालांकि, यूपी में कड़े नियमों (सार्वजनिक जगहों पर अनियंत्रित फीडिंग बैन) के कारण 2012 के मुकाबले 2019 में संख्या घटकर 20.59 लाख रह गई।

  • केरल: यहां कुत्तों की संख्या बढ़कर 2.89 लाख हो गई है। निगरानी के लिए विशेष समितियां बनी हैं।

  • गोवा: यह देश का पहला रेबीज कंट्रोल्ड राज्य था, लेकिन कुत्तों की अधिक आबादी के चलते 2023 में यहां रेबीज से एक मौत दर्ज की गई।

  • मुंबई: यहां आवारा कुत्तों को खाना खिलाना कानूनी है, लेकिन इसके लिए चुनिंदा और साफ जगहें तय हैं।

डॉग बाइट पर राज्यों को देना होगा ‘भारी मुआवजा’

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों की लापरवाही पर उन्हें आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पिछले 5 सालों में राज्यों ने नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया। अगर अब किसी बच्चे या बुजुर्ग को कुत्ता काटता है, उसे चोट लगती है या मौत होती है, तो अदालत राज्य सरकारों से पीड़ित परिवार को भारी मुआवजा दिलवाएगी। कोर्ट ने डॉग लवर्स से भी कहा, “जो आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित हैं, वे उन्हें अपने घर ले जाएं; उन्हें ऐसे सड़कों पर नहीं छोड़ सकते।”

पिछली सुनवाइयों की कुछ अहम बातें जो आपको जाननी चाहिए

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट

  • जज का पर्सनल एक्सपीरियंस (8 जनवरी 2026): जस्टिस नाथ ने कहा था कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं इसलिए काटते हैं। इस पर जब कुत्तों का पक्ष ले रहे एक वकील ने असहमति जताई, तो जज ने सख्ती से कहा- “अपना सिर मत हिलाइए, ये बात मैं पर्सनल एक्सपीरियंस से बोल रहा हूं।”

  • शर्मिला टैगोर के वकील को फटकार (9 जनवरी 2026): एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के वकील ने दलील दी कि एम्स में गोल्डी नाम का कुत्ता सालों से है और उसने किसी को नहीं काटा। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा- “ऐसे कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें।”

  • बिहार के मुख्य सचिव को तलब (3 नवंबर 2025): कोर्ट ने मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से बुलाया था। जब बिहार के सचिव ने चुनाव का हवाला देकर छूट मांगी, तो कोर्ट ने मना कर दिया और कहा- “चुनाव में आपकी भूमिका विशेष नहीं है, आपको पेश होना ही होगा।”


FAQ Section

Q1: आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला क्या है?
Ans: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि स्कूल, अस्पताल और बस स्टैंड जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाकर डॉग शेल्टर होम में रखा जाएगा। इंसान की सुरक्षा के लिए खतरनाक कुत्तों को मारा जा सकता है।

Q2: क्या पकड़े गए कुत्तों को वापस मोहल्ले में छोड़ा जाएगा?
Ans: नहीं। कोर्ट ने साफ किया है कि रेलवे स्टेशन, अस्पताल जैसी सार्वजनिक जगहों से रेस्क्यू किए गए कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस उसी जगह पर नहीं छोड़ा जाएगा।

Q3: खतरनाक और रेबीज संक्रमित कुत्तों का क्या होगा?
Ans: अदालत ने निर्देश दिया है कि जो कुत्ते बेहद खूंखार हो चुके हैं या रेबीज से संक्रमित हैं, उन्हें कानून के तहत ‘दया मृत्यु’ (मौत का इंजेक्शन) दी जा सकती है।

Q4: अगर प्रशासन आदेश लागू नहीं करता है तो क्या सजा होगी?
Ans: निर्देशों की अनदेखी करने वाले प्रशासनिक और नगर निगम अधिकारियों पर सीधे कोर्ट की अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Q5: कुत्ते के काटने पर मुआवजे का क्या नियम है?
Ans: सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि राज्य सरकारों की विफलता के कारण अगर किसी बच्चे या बुजुर्ग को कुत्ता काटता है या जान जाती है, तो राज्य सरकार को भारी मुआवजा देना होगा।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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