नीमच: नीमच में मरीजों की सुरक्षा के नाम पर प्रशासन ने ‘कार्रवाई’ का जो चाबुक चलाया है, वह सीधे तौर पर सवालों के घेरे में आ गया है। एसडीएम संजीव साहू के नेतृत्व में विशेष दल ने जिले के तीन बड़े निजी अस्पतालों— श्रीराम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, चौरडिया हॉस्पिटल और गोमाबाई नेत्रालय में छापा मारा। वहां अग्नि सुरक्षा और विद्युत व्यवस्था में गंभीर लापरवाही मिलने के बाद फायर सेफ्टी नोटिस थमा दिए गए।
लेकिन इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ा झोल यह है कि प्रशासन की टीम शहर के सबसे बड़े और हाल ही में ‘मरीज की मौत’ को लेकर भारी हंगामे का केंद्र रहे ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का रुख करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन की यह सख्ती सिर्फ कुछ अस्पतालों को डराने के लिए है, या रसूखदार अस्पतालों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है?
ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर ‘आंखें बंद’ क्यों?
प्रशासन की टीम ने अलग-अलग तारीखों में तीन अस्पतालों की कमियां निकालीं, लेकिन कनावटी स्थित ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की तरफ झांकना भी मुनासिब नहीं समझा।
शहर का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद इसे जांच के दायरे से बाहर क्यों रखा गया?
क्या प्रशासन को वहां के फायर सिस्टम, बेसमेंट और इमरजेंसी एग्जिट के ‘परफेक्ट’ होने की कोई गुप्त गारंटी मिल गई है?
हाल ही में एक बुजुर्ग की मौत और ‘सहमति पत्र’ के सहारे लीपापोती करने वाले इस अस्पताल के मेडिकल स्टोर और सुरक्षा मानकों की जांच से अधिकारी क्यों बच रहे हैं?
साफ है कि प्रशासन की इस ‘पिक एंड चूज’ (चुनकर कार्रवाई करने) की नीति ने पूरी जांच प्रक्रिया की नीयत पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।
श्रीराम हॉस्पिटल: बिना अनुमति एनआईसीयू और फायर सेफ्टी फेल
गांधी नगर स्थित श्रीराम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के निरीक्षण में टीम को चौंकाने वाली खामियां मिलीं।
अस्पताल के स्टाफ को अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) चलाने का प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया था।
बिल्डिंग में कई जगह स्प्रिंकलर सिस्टम अधूरा पड़ा मिला।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि अस्पताल में छोटे बच्चों का एनआईसीयू (NICU) वार्ड बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के धड़ल्ले से संचालित हो रहा था। बेसमेंट सुरक्षा और इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था भी मानकों पर खरी नहीं उतरी।
चौरडिया हॉस्पिटल: फायर एनओसी गायब, ब्लड बैंक पर उठे सवाल
एलआईसी चौराहे के पास स्थित चौरडिया हॉस्पिटल में भी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ती पाई गईं।
अस्पताल प्रबंधन के पास स्थायी फायर एनओसी (NOC) ही नहीं थी।
स्मोक डिटेक्टर और फायर सिस्टम नाकाफी थे।
निरीक्षण टीम को बेसमेंट में बिना उचित दस्तावेजों के ब्लड बैंक संचालित होने की जानकारी मिली, जो मरीजों की जान के लिए बड़ा खतरा है।
अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर कोई फार्मासिस्ट मौजूद नहीं मिला, जो सीधे तौर पर ड्रग लाइसेंस नियमों का उल्लंघन है।
गोमाबाई नेत्रालय: धूल खा रहे सुरक्षा उपकरण
आंखों के इलाज के लिए पहचाने जाने वाले गोमाबाई नेत्रालय की हालत भी सुरक्षा के मामले में ‘अंधी’ पाई गई।
यहां लगाए गए फायर स्मोक डिटेक्टर काम ही नहीं कर रहे थे और उन पर धूल जमी थी।
कैंटीन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां आग लगने का सबसे ज्यादा खतरा होता है, वहां एक भी फायर एक्सटिंग्विशर नहीं था।
लिफ्ट के इमरजेंसी बटन खराब मिले और वायरिंग का जाल भी बेहद अव्यवस्थित पाया गया।
7 दिन में सुधार नहीं तो अस्पताल होंगे सील
एसडीएम संजीव साहू ने श्रीराम, चौरडिया और गोमाबाई को 7 दिन के भीतर सभी कमियां दूर कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय में सुधार नहीं हुआ, तो अस्पतालों के लाइसेंस निलंबित कर भवनों को सील कर दिया जाएगा।
कार्रवाई अपनी जगह सही है, लेकिन जब तक ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल जैसे बड़े और विवादित सेंटर्स की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक प्रशासन की इस सख्ती को केवल ‘दिखावा’ ही माना जाएगा।
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FAQs: नीमच अस्पताल फायर सेफ्टी नोटिस विवाद
1. नीमच प्रशासन ने किन अस्पतालों को फायर सेफ्टी का नोटिस दिया है?
प्रशासन ने श्रीराम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, चौरडिया हॉस्पिटल और गोमाबाई नेत्रालय में गंभीर खामियां मिलने पर नोटिस जारी किया है।
2. प्रशासन की जांच प्रक्रिया पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
शहर के सबसे बड़े और हाल ही में मौत के विवादों में रहे ‘ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल’ की जांच न करने के कारण प्रशासन की मंशा और ‘सिलेक्टिव कार्रवाई’ पर सवाल उठ रहे हैं।
3. श्रीराम हॉस्पिटल में क्या गंभीर लापरवाही मिली?
श्रीराम हॉस्पिटल में फायर सिस्टम अधूरा था, स्टाफ को ट्रेनिंग नहीं थी और सबसे बड़ी बात, बिना अनुमति के NICU वार्ड संचालित होता पाया गया।
4. चौरडिया हॉस्पिटल में मेडिकल नियमों का क्या उल्लंघन मिला?
चौरडिया हॉस्पिटल में स्थायी फायर NOC नहीं थी, बेसमेंट में संदिग्ध ब्लड बैंक का संचालन पाया गया और मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट गायब मिला।
5. प्रशासन ने इन तीनों अस्पतालों को कितना समय दिया है?
एसडीएम संजीव साहू ने 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। यदि कमियां दूर नहीं हुईं, तो लाइसेंस निलंबित कर अस्पताल सील करने की चेतावनी दी गई है।
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