जंगल बचाने वाले पक्षी: 65 लाख लोगों की सांसों के ‘सीक्रेट रक्षक’, पेड़ों को मौत से बचा रहे ये पक्षी
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
25 मई 2026, (अपडेटेड 25 मई 2026, 11:16 पूर्वाह्न IST)

मंदसौर‎। मध्य प्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य में इन दिनों छोटे-छोटे पक्षी जंगलों के सबसे बड़े रक्षक बनकर सामने आए हैं। खासकर कठफोड़वा और अन्य कीटभक्षी पक्षी लाखों पेड़ों को अंदर से खोखला करने वाले कीड़ों का सफाया कर रहे हैं। वन विभाग के अनुसार ये “जंगल बचाने वाले पक्षी” पेड़ों को बीमार होने से बचाकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

पेड़ों की रक्षा में जुटे पक्षी

जंगलों में मौजूद लकड़ी भेदक भृंग, दीमक और कई हानिकारक कीट पेड़ों को धीरे-धीरे कमजोर कर देते हैं। ऐसे में ब्लैक-रम्प्ड फ्लेमबैक यानी सुनहरा कठफोड़वा अपनी मजबूत चोंच से पेड़ों की छाल तोड़कर इन कीड़ों को बाहर निकालता है और उन्हें खा जाता है। इससे पेड़ लंबे समय तक स्वस्थ बने रहते हैं।

1.5 करोड़ पेड़ों से मिल रही करोड़ों किलो ऑक्सीजन

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार गांधीसागर क्षेत्र में करीब 1.5 करोड़ विकसित पेड़ मौजूद हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि एक विकसित पेड़ सालभर में औसतन 118 किलो ऑक्सीजन छोड़ता है। इस हिसाब से यहां के जंगल हर वर्ष लगभग 177 करोड़ किलो ऑक्सीजन वातावरण में पहुंचा रहे हैं, जो करीब 65 लाख लोगों की जरूरत पूरी करने के बराबर है।

पर्यावरण के असली प्रहरी

डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि “जंगल बचाने वाले पक्षी” केवल पक्षी नहीं, बल्कि जंगलों की सुरक्षा श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि इनकी संख्या कम हुई तो कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है, जिससे लाखों पेड़ों पर खतरा मंडराने लगेगा।

ये पक्षी भी निभा रहे बड़ी भूमिका

गांधीसागर अभयारण्य में केवल कठफोड़वा ही नहीं, बल्कि नटहैच, ट्रीक्रीपर, वार्बलर, फ्लाईकैचर और बार्बेट जैसे पक्षी भी पेड़ों की छाल और पत्तियों पर मौजूद कीड़ों को खत्म कर रहे हैं। ये पक्षी प्राकृतिक कीट नियंत्रण प्रणाली की तरह काम करते हैं।

जंगलों के लिए क्यों जरूरी हैं ये पक्षी

जंगल बचाने वाले पक्षी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में बेहद जरूरी हैं। यदि इनके प्राकृतिक आवास सुरक्षित नहीं रहे तो जंगलों में कीटों का खतरा बढ़ सकता है, जिससे पेड़ों के सूखने और ऑक्सीजन उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा। यही कारण है कि अब वन विभाग इन पक्षियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रहा है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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