वर्षों से पक्के मकान की आस लगाए बैठा परिवार मलबे में दब गया, हादसे के बाद खुली व्यवस्थाओं की पोल
सिंगोली (राजेश कोठारी): नीमच जिले के सिंगोली नगर में सोमवार-मंगलवार की मध्य रात्रि हुई दर्दनाक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड क्रमांक 13 में तेज बारिश और आंधी के बीच एक जर्जर तीन मंजिला मकान की छत भरभराकर गिर गई। मलबे में दबने से 62 वर्षीय सौसर बाई धनोतिया की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पुत्र निलेश धनोतिया ने कोटा में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
निलेश वही युवक था जो रोज सुबह लोगों के घरों तक अखबार पहुंचाता था, लेकिन विडंबना देखिए कि उसकी अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी खबर उसके ही घर के मलबे से निकली।
हादसा नहीं, व्यवस्था पर बड़ा सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मृतक परिवार लंबे समय से जर्जर मकान में रह रहा था और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने की उम्मीद लगाए बैठा था।
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अब सवाल यह उठ रहा है कि जब मकान की हालत वर्षों से खराब थी तो उसे चिन्हित क्यों नहीं किया गया? अगर परिवार मदद मांग रहा था तो उसकी सुनवाई क्यों नहीं हुई? और यदि सब कुछ प्रक्रिया में था तो आखिर प्रक्रिया पूरी होने से पहले दो जिंदगियां क्यों खत्म हो गईं?
हादसे के बाद 9 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत हो गई। लेकिन नगर में लोग पूछ रहे हैं कि यदि यही तत्परता पहले दिखाई जाती तो क्या आज मां-बेटा जिंदा नहीं होते?
मलबे से शव और सिस्टम से निकले सवाल
रात करीब 12 बजे पूरा परिवार घर में सो रहा था। अचानक छत गिरी और कुछ ही सेकंड में घर मलबे में बदल गया।
पुलिस, स्थानीय नागरिकों और नगर परिषद कर्मचारियों ने राहत कार्य शुरू किया। घंटों की मशक्कत के बाद लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
एक तरफ मलबा हटाया जा रहा था, दूसरी तरफ नगर की व्यवस्थाओं की परतें भी खुल रही थीं।
सरकारी रिपोर्ट में क्या सामने आया?
घटना के बाद सामने आई प्रशासनिक रिपोर्ट में बताया गया है कि—
- हादसा 1 जून 2026 की रात करीब 12:56 बजे हुआ।
- मकान पुराना और जर्जर बताया गया है।
- मृतकों को संबल योजना के तहत 5-5 हजार रुपए अंतिम सहायता राशि देने की प्रक्रिया बताई गई है।
- रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मृतकों का किसी प्रकार का बीमा होना संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं है।
- पीएम आवास योजना 1.0 की पात्र/अपात्र सूची में संबंधित परिवार का नाम नहीं बताया गया।
- पीएम आवास योजना 2.0 में भी परिवार द्वारा आवेदन प्राप्त नहीं होने का उल्लेख किया गया है।
यहीं से अब नया विवाद खड़ा हो गया है।
आवेदन नहीं हुआ या व्यवस्था तक पहुंच ही नहीं पाई?
स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतक परिवार लंबे समय से पक्के मकान की मांग कर रहा था। वहीं प्रशासनिक दस्तावेजों में पीएम आवास योजना में आवेदन प्राप्त नहीं होने की बात सामने आई है। अब नगर में चर्चा इस बात को लेकर है कि आखिर गरीब और मजदूरी कर जीवन यापन करने वाला परिवार सरकारी योजनाओं तक पहुंच क्यों नहीं बना पाया?
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि आवेदन नहीं था, तो क्या नगर निकाय और जिम्मेदार अमले ने कभी जर्जर मकान में रह रहे परिवार की स्थिति का सर्वे किया?
एम्बुलेंस भी जवाब दे गई
स्थानीय लोगों के अनुसार गंभीर घायल निलेश को रेफर करने के दौरान एम्बुलेंस व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। बताया जा रहा है कि एक एम्बुलेंस अन्य कार्य में लगी हुई थी जबकि दूसरी की स्थिति खराब थी। परिणाम यह हुआ कि घायल युवक को निजी वाहन से कोटा भेजना पड़ा।
ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब सांसद निधि और सरकारी योजनाओं से एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं तो जरूरत के समय आम आदमी को उनका लाभ क्यों नहीं मिल पाता?
तस्वीरें देखिए…



नगर परिषद बिना नियमित सीएमओ, जनता के काम भगवान भरोसे?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सिंगोली नगर परिषद लंबे समय से नियमित मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) के बिना संचालित हो रही है। लोगों का आरोप है कि नगर के कई महत्वपूर्ण कार्य फाइलों और प्रक्रियाओं के बीच अटके हुए हैं। जर्जर मकानों की सूची, निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था जैसे विषय भी प्राथमिकता में नजर नहीं आते।
हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या जिले को एक और हादसे का इंतजार है?
सिंगोली की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है। जिले के कई कस्बों और गांवों में ऐसे दर्जनों जर्जर मकान मौजूद हैं, जिनकी दीवारें और छतें हर बारिश के साथ कमजोर होती जा रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को अब किसी अगले हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए। वर्षाकाल शुरू हो चुका है और समय रहते एक विशेष फास्ट रिस्पॉन्स टीम गठित कर जिलेभर में जर्जर मकानों का सर्वे कराया जाना चाहिए।
खतरनाक भवनों को चिन्हित कर उनमें रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। क्योंकि हर बार मलबे से शव निकालना प्रशासनिक सफलता नहीं कहलाती।
9 लाख की सहायता स्वीकृत
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर प्रशासन ने मृतकों के वारिस रवि पिता प्रभुलाल जैन निवासी सिंगोली को कुल 9 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है।
एसडीएम प्रीति संघवी नाहर के अनुसार—
• दो व्यक्तियों की मृत्यु पर 8 लाख रुपए
• मकान क्षतिग्रस्त होने पर 1 लाख रुपए
• कुल सहायता राशि 9 लाख रुपए
अंतिम सवाल
सिंगोली में अब बारिश थम चुकी है, लेकिन कई सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं।
- क्या जर्जर मकानों का सर्वे होगा?
- क्या पात्र परिवारों को समय पर आवास मिलेगा?
- क्या आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था सुधरेगी?
- या फिर अगली बारिश के साथ किसी और घर की छत गिरने का इंतजार किया जाएगा?
फिलहाल सिंगोली एक मां और बेटे को खो चुका है। और यह हादसा सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के लिए चेतावनी बनकर सामने आया है।
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