चित्तौड़गढ़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नए एडमिशन बंद, फर्जी डिग्री और गड़बड़ियों की जांच के बाद सरकार का फैसला
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
03 जून 2026, (अपडेटेड 03 जून 2026, 2:12 अपराह्न IST)

चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नए छात्रों के एडमिशन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। राज्य सरकार ने यह निर्णय फर्जी डिग्री और प्रशासनिक गड़बड़ियों से जुड़ी जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद लिया है। ताजा अपडेट के मुताबिक अब यूनिवर्सिटी के किसी भी कोर्स में नए प्रवेश नहीं किए जाएंगे।

उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में नए छात्रों को प्रवेश देना उनके भविष्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। सरकार ने छात्रों के हित और उच्च शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है।

जांच रिपोर्ट के बाद बढ़ी कार्रवाई

मेवाड़ यूनिवर्सिटी के खिलाफ लंबे समय से फर्जी डिग्रियां जारी करने और प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद राजस्थान सरकार ने उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति का गठन किया था।

समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। इसके आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी चित्तौड़गढ़ अधिनियम-2009 की धारा 44(1) के तहत यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

सरकारी सूत्रों के अनुसार यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपना जवाब विभाग को सौंप दिया है, लेकिन उस जवाब की समीक्षा अभी जारी है। इसी दौरान सरकार ने नए एडमिशन पर रोक लगाने का निर्णय लिया।

एसओजी जांच और गिरफ्तारियों से मामला गंभीर

फर्जी डिग्री मामले की जांच के दौरान राजस्थान एसओजी ने भी कार्रवाई की है। जांच में यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ कर्मचारियों और पदाधिकारियों के खिलाफ कदम उठाए गए। मामले में यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रुल, पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा और कार्यालय सहायक वीरेंद्र सिंह समेत कई लोगों की गिरफ्तारी की गई है। हालांकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई अभी जारी है और पूरे मामले में आगे भी नई जानकारी सामने आ सकती है।

सरकार का मानना है कि मामला केवल प्रशासनिक गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है और विभिन्न स्तरों पर इसकी जांच की जा रही है।

नर्सिंग छात्रों के आंदोलन के बाद बढ़ा था विवाद

मेवाड़ यूनिवर्सिटी इससे पहले भी विवादों में रही है। इसी वर्ष फरवरी में बीएससी नर्सिंग के छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन किया था। छात्रों का आरोप था कि जिस नर्सिंग कोर्स में उन्हें प्रवेश दिया गया, उसे राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से आवश्यक मान्यता प्राप्त नहीं थी। इस विवाद के बाद छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच तनाव बढ़ गया था।

दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराई थीं। वहीं कुछ छात्रों को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

सरकार ने क्या कहा

राजस्थान सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने और स्थिति स्पष्ट होने तक नए छात्रों को प्रवेश देना उचित नहीं होगा। सरकार के मुताबिक यह फैसला छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक यूनिवर्सिटी के सभी कोर्सों में नए एडमिशन बंद रहेंगे।

चेयरमैन अशोक गदिया ने फैसले पर जताई आपत्ति

मेवाड़ यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अशोक गदिया ने सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जारी नोटिस का जवाब यूनिवर्सिटी पहले ही दे चुकी है और मामला अभी विभागीय स्तर पर विचाराधीन है।

अशोक गदिया ने दावा किया कि एसओजी ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ फर्जी डिग्री का कोई मामला दर्ज नहीं किया है। उनके अनुसार यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी ने व्यक्तिगत स्तर पर कोई गलत कार्य किया है तो उसका संस्थान से सीधा संबंध नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक किसी भी व्यक्ति को अदालत द्वारा दोषी घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में अंतिम जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट जाने की तैयारी

चेयरमैन अशोक गदिया के मुताबिक यूनिवर्सिटी प्रशासन सरकार के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देगा। उनका कहना है कि बिना अंतिम निष्कर्ष और पर्याप्त अवसर दिए एडमिशन पर रोक लगाना न्यायसंगत नहीं है। अब पूरे मामले में सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

फिलहाल छात्रों को करना होगा इंतजार

सरकार के आदेश के बाद अब नए छात्रों को मेवाड़ यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए इंतजार करना होगा। जांच पूरी होने और स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई और अदालत में संभावित सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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