मनासा (दिलीप बोराना)। मनासा में शासकीय जमीन पर बनी अवैध दुकानें शनिवार को प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान ध्वस्त कर दी गईं। नगर परिषद मनासा ने पुलिस और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में यह कार्रवाई करते हुए करीब 4800 वर्गमीटर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। प्रशासन के अनुसार जिस जमीन पर निर्माण किया गया था, उसकी अनुमानित कीमत लगभग 7 करोड़ रुपये है।
कार्रवाई शहर की माहेश्वरम कॉलोनी के पास स्थित शासकीय नजूल आबादी सर्वे नंबर 300 पर की गई। नगर परिषद अधिकारियों ने बताया कि यहां नियमों के विपरीत निर्माण कर कई अवैध दुकानें बनाई गई थीं, जिन्हें पहले भी नोटिस देकर हटाने के निर्देश दिए गए थे।
एक दुकान की अनुमति, लेकिन बना दी गईं 8 अवैध दुकानें

नगर परिषद के अनुसार पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। आरोप है कि उस समय शासकीय सर्वे नंबर 300 की भूमि पर अवैध रूप से नामांतरण कराया गया। इसके बाद वर्ष 2022 में केवल एक दुकान निर्माण की अनुमति ली गई, लेकिन मौके पर आठ अवैध दुकानें खड़ी कर दी गईं।
प्रशासन का कहना है कि निर्माण कार्य बिना नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति और बिना व्यावसायिक डायवर्सन के किया गया था। यही कारण रहा कि परिषद ने इस निर्माण को नियम विरुद्ध मानते हुए कार्रवाई शुरू की।
नगर परिषद ने रद्द की निर्माण अनुमति
अवैध दुकानें बनाए जाने के मामले को लेकर नगर परिषद मनासा ने 10 जनवरी 2024 को प्रस्ताव पारित किया था। परिषद ने प्रस्ताव में निर्माण अनुमति और नामांतरण दोनों को निरस्त कर दिया था।
इसके बाद संबंधित पक्ष ने जिला कलेक्टर कार्यालय नीमच में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान अपर कलेक्टर नीमच ने नगर परिषद के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। हालांकि नगर परिषद ने इस फैसले को चुनौती देते हुए इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ में याचिका दायर कर दी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
नगर परिषद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर ने नगर परिषद के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने नगर परिषद द्वारा निर्माण अनुमति और नामांतरण निरस्त किए जाने के प्रस्ताव को बरकरार रखा और अपर कलेक्टर नीमच के आदेश को निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद नगर परिषद ने कार्रवाई की तैयारी शुरू की। शनिवार को प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी मशीनों की मदद से सभी अवैध दुकानें हटाने की कार्रवाई की गई।
पहले भी दिए गए थे नोटिस
नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार संबंधित पक्ष को समय-समय पर नोटिस और सूचनाएं भी जारी की गई थीं। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया। अधिकारियों का कहना है कि एक दुकान की अनुमति लेकर आठ दुकानों का निर्माण करना पूरी तरह नियमों के विरुद्ध था।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण और अवैध व्यावसायिक निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। मौके पर तहसीलदार मुकेश निगम, सीएमओ संजय पाटीदार, उपयंत्री रविश कादरी, पुलिस थाना मनासा से एएसआई तेजसिंह सिसोदिया सहित नगर परिषद और पुलिस प्रशासन का स्टाफ मौजूद रहा।
कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में लोगों की भीड़ भी जुटी रही, हालांकि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी कराई गई।
प्रशासन ने दिया सख्त संदेश
नगर परिषद अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने लोगों से वैधानिक अनुमति और नियमों का पालन करते हुए ही निर्माण कार्य करने की अपील की है।
शहर में हुई इस कार्रवाई के बाद सरकारी जमीनों पर कब्जे और अवैध निर्माण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासन की इस कार्रवाई से भविष्य में सरकारी जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
ताज़ा ख़बरों का अपडेट सीधा अपने फोन पर पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।






