नीमच । नीमच जिले के रामपुरा थाना क्षेत्र स्थित खिमला प्लांट में रविवार को हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। ग्रीनको प्रोजेक्ट में ऊंचाई पर पाइपलाइन का काम कर रहे मजदूर अचानक लिफ्ट सहित करीब 100 फीट नीचे जा गिरे। इस हादसे में छह मजदूर घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा उस समय हुआ जब मजदूर पाइपलाइन पर वेल्डिंग का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान मजदूरों को ऊपर ले जा रही लिफ्ट अचानक असंतुलित होकर नीचे गिर गई। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया।
पाइपलाइन पर चल रहा था काम, तभी टूटा संतुलन
प्लांट कर्मचारी नीरज मीणा के मुताबिक खिमला प्लांट में मजदूर ऊंचाई पर पाइपलाइन फिटिंग और वेल्डिंग का काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा बेहद अचानक हुआ। मजदूर कुछ समझ पाते उससे पहले ही लिफ्ट तेजी से नीचे आ गिरी।
घटना के बाद पूरे प्लांट में हड़कंप मच गया। आसपास काम कर रहे कर्मचारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकाला। कुछ मजदूर दर्द से कराहते हुए दिखाई दिए। स्थानीय कर्मचारियों के अनुसार हादसे की आवाज दूर तक सुनाई दी थी।
अस्पताल में भर्ती कराए गए सभी घायल मजदूर

हादसे में घायल मजदूरों की पहचान मनोहर सिंह, चिन्मय घोष, राहुल यादव, जहीरूद्दीन अंसारी, विपिन कुमार और कमलेश के रूप में हुई है। सभी को नीमच के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
डॉक्टरों के अनुसार दो मजदूरों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि अन्य घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन लगातार घायलों की निगरानी कर रहा है। गंभीर रूप से घायल मजदूरों का विशेष उपचार जारी है।
सूत्रों के मुताबिक कुछ मजदूरों को सिर, पीठ और हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई हैं। डॉक्टरों द्वारा एक्स-रे और अन्य मेडिकल जांच की जा रही हैं ताकि अंदरूनी चोटों की सही स्थिति सामने आ सके।
खिमला प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद खिमला प्लांट में सुरक्षा मानकों को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि इतनी ऊंचाई पर काम के दौरान सुरक्षा उपकरणों और तकनीकी जांच को लेकर अधिक सतर्कता जरूरी थी। कुछ लोगों का आरोप है कि औद्योगिक परियोजनाओं में कई बार सुरक्षा नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ही ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया था। इसके बावजूद इतना बड़ा हादसा सामने आने से लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है।
तकनीकी खराबी या लापरवाही? जांच शुरू
हादसे के बाद प्रशासन और प्लांट प्रबंधन दोनों सक्रिय हो गए हैं। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में लिफ्ट की तकनीकी खराबी, मेंटेनेंस और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि हादसे के समय सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि लिफ्ट का नियमित तकनीकी निरीक्षण हुआ था या नहीं।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के असली कारण साफ हो पाएंगे। फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
मजदूर सुरक्षा को लेकर फिर गरमाया मुद्दा
खिमला प्लांट हादसे के बाद एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर बहस शुरू हो गई है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि बड़ी परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ऊंचाई पर कार्य के दौरान इस्तेमाल होने वाली मशीनों और लिफ्ट की नियमित जांच बेहद जरूरी होती है। छोटी सी तकनीकी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
फिलहाल घायलों का इलाज जारी है और प्रशासन की नजर पूरे मामले पर बनी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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