भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने नगरीय निकाय कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत देने वाला एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मध्य प्रदेश योजना के तहत अब सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को आर्थिक सहायता के रूप में अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा। सरकार द्वारा तय की गई व्यवस्था के अनुसार पात्र परिवारों को अधिकतम 1 लाख 25 हजार रुपये तक की सहायता राशि मिल सकेगी। यह निर्णय प्रदेश के नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर परिषदों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश योजना के तहत मिलने वाली यह सहायता उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जिनके घर का आर्थिक आधार किसी कर्मचारी की आय पर निर्भर है।
नगरीय निकाय कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार मध्य प्रदेश योजना का लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जो मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अंतर्गत आते हैं और प्रदेश के नगरीय निकायों में कार्यरत हैं। यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके पात्र आश्रितों को अनुग्रह अनुदान प्रदान किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि कर्मचारी की असामयिक मृत्यु के बाद परिवार को अचानक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में यह सहायता राशि परिवार को तत्काल राहत प्रदान करने में मददगार होगी।
कैसे तय होगी सहायता राशि?
सरकार द्वारा जारी प्रावधानों के अनुसार कर्मचारी के बैंड वेतन और ग्रेड पे के संयुक्त योग का छह गुना हिस्सा अनुग्रह अनुदान के रूप में दिया जाएगा। हालांकि इस सहायता राशि की अधिकतम सीमा 1 लाख 25 हजार रुपये निर्धारित की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य मृतक कर्मचारी के परिवार को प्रारंभिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है ताकि वे कठिन परिस्थितियों में अपनी आवश्यक जरूरतों को पूरा कर सकें।
हजारों परिवारों को मिलेगा फायदा
प्रदेश के नगरीय निकायों में बड़ी संख्या में कर्मचारी विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, कर संग्रहण, प्रशासनिक कार्य और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई विभाग शामिल हैं।
ये कर्मचारी शहरों की मूलभूत व्यवस्थाओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ उनके परिवारों को सुरक्षा का भरोसा देने वाला कदम माना जा रहा है।
1 अप्रैल 2025 से लागू मानी जाएगी व्यवस्था
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश योजना को 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी माना जाएगा। इसका अर्थ है कि 1 अप्रैल 2025 या उसके बाद सेवा अवधि के दौरान मृत्यु होने वाले पात्र कर्मचारियों के मामलों में यह सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस निर्णय से उन परिवारों को भी राहत मिलने की संभावना है जो निर्धारित अवधि के बाद हुए मामलों में सहायता की उम्मीद लगाए बैठे थे।
प्रशासनिक प्रक्रिया होगी आसान
नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया तैयार की जा रही है। विभागीय दिशा-निर्देश जारी होने के बाद संबंधित नगरीय निकायों के माध्यम से आवेदन, परीक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
विभाग का कहना है कि पात्र परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि किसी भी परिवार को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
कर्मचारी संगठनों ने किया स्वागत
सरकार के इस फैसले का कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित में उठाया गया सकारात्मक कदम है। संगठनों के अनुसार किसी कर्मचारी की अचानक मृत्यु होने पर परिवार आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करता है। ऐसे में सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता संकट की घड़ी में सहारा प्रदान करेगी।
सामाजिक सुरक्षा को मिलेगा बल
कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं किसी भी कल्याणकारी शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। कई परिवार पूरी तरह एक व्यक्ति की आय पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सेवा के दौरान मृत्यु की स्थिति में परिवार पर गंभीर आर्थिक संकट आ सकता है।
मध्य प्रदेश योजना के तहत दिया जाने वाला अनुग्रह अनुदान भले ही दीर्घकालिक समाधान न हो, लेकिन कठिन समय में यह आर्थिक सहायता परिवार को तत्काल राहत देने का काम करेगी। सरकार का दावा है कि यह निर्णय कर्मचारियों और उनके आश्रितों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करेगा तथा भविष्य में कर्मचारी कल्याण से जुड़ी अन्य योजनाओं के लिए भी आधार तैयार करेगा।
प्रदेश सरकार का यह कदम नगरीय निकाय कर्मचारियों के हितों की रक्षा और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इस योजना का लाभ प्रदेश के हजारों कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों तक पहुंचने की उम्मीद है।
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