नीमच। क्या भारत की पूर्वी सीमा पर एक नया खतरा तेजी से आकार ले रहा है? नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की हालिया वार्षिक रिपोर्ट इसी ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार में अवैध अफीम उत्पादन अब अफगानिस्तान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में सबसे अधिक हो गया है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क मजबूत हुआ है, बल्कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के जरिए सक्रिय नए तस्करी मार्ग ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार में आर्थिक संकट और गृह-संघर्ष ने अफीम की खेती को तेजी से बढ़ावा दिया। नतीजतन वहां अवैध उत्पादन पिछले कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
शान राज्य बना अवैध अफीम का सबसे बड़ा केंद्र
एनसीबी के मुताबिक म्यांमार का शान राज्य अवैध अफीम की खेती का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। यहीं से संचालित होने वाले नेटवर्क भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की ओर नए रास्ते तलाश रहे हैं।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह तस्करी केवल नशीले पदार्थों तक सीमित नहीं है। इसके तार हथियारों की तस्करी, संगठित अपराध और आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां इसे केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय मान रही हैं।
खुली सीमा बनी सबसे बड़ी चुनौती
एनसीबी ने अपनी रिपोर्ट में भारत-म्यांमार सीमा पर लागू फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) और कई हिस्सों में अपेक्षाकृत खुली आवाजाही को तस्करी के लिए अनुकूल बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार इसका असर केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहता। इससे स्थानीय स्तर पर नशे की लत बढ़ने, अवैध नेटवर्क को आर्थिक मजबूती मिलने और उग्रवादी संगठनों तक धन पहुंचने की आशंका भी बढ़ती है। इसलिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई है।
अफगानिस्तान का रास्ता अब भी सक्रिय, लेकिन पूर्वी सीमा पर नया दबाव
एनसीबी का कहना है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर अभी भी वैश्विक स्तर पर अफीम तस्करी का सबसे बड़ा मार्ग बना हुआ है। हालांकि भारत के सामने अब पश्चिमी सीमा के साथ-साथ पूर्वी दिशा से भी नई चुनौती उभर रही है। रिपोर्ट में समुद्री मार्गों और पूर्वोत्तर सीमा पर विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
दुनिया में तेजी से बढ़ रहा नशे का जाल
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में दुनिया भर में लगभग 31.6 करोड़ लोगों ने कम से कम एक बार किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया, जबकि वर्ष 2013 में यह संख्या लगभग 24.6 करोड़ थी।
यानी एक दशक में वैश्विक स्तर पर ड्रग्स के उपयोग में करीब 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। एनसीबी का मानना है कि यह बढ़ता रुझान दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
सिंथेटिक ड्रग्स ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट में निटाजेन्स (Nitazenes) नामक सिंथेटिक ओपिओइड को उभरता हुआ वैश्विक खतरा बताया गया है। एनसीबी के अनुसार यह पदार्थ हेरोइन की तुलना में लगभग 500 गुना अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
इसके अलावा कई प्रकार के नशीले पदार्थों का एक साथ सेवन करने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ओवरडोज, गंभीर स्वास्थ्य जोखिम और मृत्यु की आशंका बढ़ सकती है।
मोबाइल ऐप्स और डार्कनेट से फैल रहा नेटवर्क
एनसीबी ने कहा है कि टेलीग्राम, व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अब ड्रग्स की सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। डार्कनेट, अंतरराष्ट्रीय डाक प्रणाली और डिजिटल प्लेटफॉर्म के संयोजन ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई तकनीकी चुनौती खड़ी कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार इन माध्यमों की वजह से ड्रग्स नेटवर्क पहले की तुलना में अधिक संगठित और तेज हो गया है।
NCB रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
- म्यांमार दुनिया का सबसे बड़ा अवैध अफीम उत्पादक बना।
- शान राज्य सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र।
- पूर्वोत्तर भारत से नया ड्रग्स तस्करी कॉरिडोर सक्रिय।
- आतंकवाद और हथियारों की तस्करी से जुड़ी चिंताएं बढ़ीं।
- सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट नई वैश्विक चुनौती।
- विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता।
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