पीला मोजेक ने उजाड़ी फसल, अब बीमा राशि के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
28 जुलाई 2026, (अपडेटेड 28 जुलाई 2026, 2:28 अपराह्न IST)

नीमच। वर्ष 2025 की खरीफ फसल में पीला मोजेक रोग से नुकसान झेलने वाले जीरन तहसील के ग्राम भंवरासा और पालसोडा के किसान मंगलवार को फसल बीमा राशि की मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर लंबित बीमा भुगतान जल्द कराने की मांग की। किसानों का कहना है कि फसल खराब होने, नुकसान का सर्वे होने और शासन की ओर से राहत राशि वितरित किए जाने के बावजूद संबंधित बीमा कंपनी से अब तक बीमा राशि नहीं मिली है।

किसानों के अनुसार, भंवरासा और पालसोडा के दोनों पटवारी हलकों में वर्ष 2025 की खरीफ फसल पीला मोजेक रोग से प्रभावित हुई थी। ज्ञापन में दावा किया गया है कि सर्वेक्षण के दौरान 35 से 55 प्रतिशत तक फसल नुकसान दर्ज किया गया था। इसके बावजूद फसल बीमा राशि किसानों के खातों में जमा नहीं होने से अब उन्होंने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

पीला मोजेक से नुकसान, अब भुगतान का इंतजार

किसानों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के मुताबिक, खरीफ फसल 2025 के दौरान पीला मोजेक रोग के कारण दोनों पटवारी हलकों में फसलों को व्यापक नुकसान हुआ था। नुकसान के बाद सर्वेक्षण कराया गया और किसानों के अनुसार इसमें 35 से 55 प्रतिशत तक फसल नुकसान दर्ज किया गया। ज्ञापन में किसानों ने यह भी बताया कि शासन द्वारा प्रभावित किसानों को राहत राशि का वितरण किया गया था। किसानों की शिकायत है कि राहत राशि मिलने के बावजूद संबंधित बीमा कंपनी की ओर से फसल बीमा राशि अब तक उनके खातों में जमा नहीं की गई है।

लंबे इंतजार के बाद किसान अब अपनी मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं। उनका कहना है कि फसल खराब होने से पहले ही आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और अब बीमा भुगतान लंबित रहने से परेशानी और बढ़ गई है।

खेती की बढ़ती लागत के बीच किसानों की चिंता

किसानों ने ज्ञापन में अपनी आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर पिछली खरीफ फसल में हुए नुकसान ने उनकी परेशानी बढ़ाई है। ऐसे में फसल बीमा से मिलने वाली राशि उनके लिए महत्वपूर्ण आर्थिक राहत है। किसानों का कहना है कि फसल बीमा राशि समय पर मिलती है तो उससे आगामी कृषि कार्यों के लिए आर्थिक मदद मिल सकती है। भुगतान लंबित रहने के कारण आने वाले कृषि कार्यों की तैयारी पर भी असर पड़ने की चिंता बनी हुई है।

वर्ष 2025 की खरीफ फसल में हुए नुकसान के बाद से प्रभावित किसान बीमा भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब उन्होंने जिला प्रशासन के सामने अपनी मांग रखते हुए जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

35 से 55 प्रतिशत नुकसान दर्ज होने का दावा

किसानों के ज्ञापन में एक अहम तथ्य फसल नुकसान के सर्वेक्षण से जुड़ा है। किसानों के मुताबिक, भंवरासा और पालसोडा के दोनों पटवारी हलकों में किए गए सर्वेक्षण में 35 से 55 प्रतिशत तक फसल नुकसान दर्ज किया गया था। किसानों का कहना है कि फसल नुकसान के आधार पर शासन की ओर से राहत राशि का वितरण भी किया जा चुका है। इसके बाद उन्हें बीमा से भी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन संबंधित बीमा कंपनी द्वारा अब तक भुगतान नहीं किए जाने की शिकायत ज्ञापन में की गई है।

किसानों ने इसी आधार पर प्रशासन से मांग की है कि मामले में हस्तक्षेप कर बीमा भुगतान की स्थिति स्पष्ट कराई जाए और लंबित राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।

कलेक्टर के नाम ज्ञापन में क्या मांग?

जीरन तहसील के ग्राम भंवरासा और पालसोडा के किसानों ने कलेक्टर के नाम दिए ज्ञापन में मुख्य रूप से लंबित फसल बीमा राशि का मुद्दा उठाया है। किसानों की मांग है कि जिला प्रशासन संबंधित बीमा कंपनी के स्तर पर मामले में हस्तक्षेप करे। किसानों का कहना है कि फसल नुकसान के बाद मिलने वाली बीमा राशि उनके लिए केवल पुराने नुकसान की भरपाई का मामला नहीं है, बल्कि आगामी कृषि कार्यों के लिए भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है।

प्रभावित किसानों ने प्रशासन से संबंधित बीमा कंपनी से लंबित भुगतान जल्द सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि उन्हें समय रहते राहत मिल सके।

बीमा भुगतान पर अब प्रशासन से उम्मीद

कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपने के बाद किसानों की उम्मीद अब जिला प्रशासन पर टिकी है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित बीमा कंपनी से समन्वय कर उनके खातों में लंबित राशि जल्द जमा कराई जाए। किसानों के मुताबिक, खेती की बढ़ती लागत और फसल नुकसान के बीच बीमा राशि उनके लिए बड़ी राहत हो सकती है। भुगतान में हो रही देरी से आगामी कृषि कार्यों के लिए आर्थिक व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है।

फिलहाल किसानों ने अपनी मांग कलेक्टर के नाम ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचा दी है। संबंधित बीमा कंपनी द्वारा भुगतान अब तक क्यों नहीं किया गया और फसल बीमा राशि कब तक किसानों के खातों में आएगी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

भंवरासा और पालसोडा के किसानों को अब प्रशासनिक हस्तक्षेप और बीमा भुगतान का इंतजार है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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