बक्सवाहा, छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बक्सवाहा की डायमंड माइनिंग परियोजना को लेकर सरकार अब नए सिरे से निवेश की कोशिश कर रही है। 13 अगस्त 2026 को मुंबई में डायमंड माइनिंग कनेक्ट मीट आयोजित की जाएगी, जिसमें देश और विदेश की बड़ी कंपनियों और संभावित निवेशकों को आमंत्रित किया गया है। बक्सवाहा क्षेत्र में 22 लाख कैरेट से ज्यादा हीरे होने का अनुमान बताया गया है, ऐसे में अब इस परियोजना के भविष्य पर सबकी नजर है।
सरकार की कोशिश वर्षों से रुकी बक्सवाहा डायमंड माइनिंग परियोजना को आगे बढ़ाने की है। इसके लिए हीरा और खनन क्षेत्र की बड़ी कंपनियों से संपर्क किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डी बीयर्स, वेदांता और एनएमडीसी जैसी कंपनियों को मुंबई में होने वाली बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है।
13 अगस्त को मुंबई में होगी बड़ी बैठक
बक्सवाहा की प्रस्तावित हीरा खदान को लेकर 13 अगस्त को मुंबई में होने वाली डायमंड माइनिंग कनेक्ट मीट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में बक्सवाहा में मौजूद खनन संभावनाओं, निवेश और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी अनुमतियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। मध्य प्रदेश सरकार का उद्देश्य संभावित निवेशकों को परियोजना की जानकारी देना और उन्हें बक्सवाहा में निवेश के लिए आकर्षित करना है। सरकार चाहती है कि लंबे समय से रुकी परियोजना को नए निवेशक के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
फिलहाल 13 अगस्त की बैठक निवेशकों के साथ बातचीत और संभावनाएं तलाशने का अहम चरण होगी।
22 लाख कैरेट से ज्यादा हीरों का अनुमान
बक्सवाहा की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद संभावित हीरा भंडार है। क्षेत्र में 22 लाख कैरेट से ज्यादा हीरे होने का अनुमान है। कुछ पुराने आकलनों में इससे भी अधिक भंडार होने की संभावना बताई गई है। इसी अनुमान के कारण बक्सवाहा लंबे समय से खनन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। मध्य प्रदेश का पन्ना पहले से ही हीरों के लिए देशभर में पहचान रखता है। अब छतरपुर जिले का बक्सवाहा भी प्रदेश के एक बड़े डायमंड माइनिंग क्षेत्र के रूप में सामने आ सकता है।
हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 22 लाख कैरेट का आंकड़ा अनुमान पर आधारित है। उपलब्ध जानकारी में वास्तविक उत्पादन या खनन योग्य अंतिम मात्रा का कोई निश्चित आंकड़ा नहीं दिया गया है।
करीब दो दशक पहले हुई थी हीरों की खोज
बक्सवाहा में हीरों की खोज साल 2000 से 2005 के बीच हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऑस्ट्रेलियाई कंपनी रियो टिंटो ने यहां खोज का काम किया था। इस दौरान क्षेत्र में किम्बरलाइट के संकेत मिले थे और इसके बाद हीरों की मौजूदगी की पुष्टि हुई। हीरों की मौजूदगी सामने आने के बाद यह क्षेत्र खनन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो गया था। लेकिन खोज के बाद भी परियोजना खनन शुरू होने के चरण तक नहीं पहुंच सकी।
परियोजना के रास्ते में पर्यावरणीय मंजूरियां और कानूनी प्रक्रियाएं बड़ी चुनौती बनीं। करीब 382 हेक्टेयर वन क्षेत्र से जुड़ी मंजूरी भी इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रही।
रियो टिंटो के बाद एस्सेल माइनिंग से जुड़ा था प्रोजेक्ट
रियो टिंटो के बाद एस्सेल माइनिंग कंपनी को यह प्रोजेक्ट मिला था। हालांकि बाद में एस्सेल माइनिंग भी परियोजना से पीछे हट गई। इसके बाद बक्सवाहा की प्रस्तावित डायमंड माइनिंग परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। अब सरकार एक बार फिर नए निवेशकों की तलाश कर रही है। इसी प्रयास के तहत डायमंड माइनिंग कनेक्ट मीट आयोजित की जा रही है। सरकार की नजर उन कंपनियों पर है, जो बक्सवाहा की संभावित खनिज संपदा में निवेश करने की क्षमता और रुचि रखती हैं।
निवेश के साथ पर्यावरण की चुनौती
बक्सवाहा में हीरा खनन की संभावनाओं के साथ पर्यावरण का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित परियोजना वन क्षेत्र से जुड़ी है और क्षेत्र में पेड़ों तथा जैव विविधता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस वजह से परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए निवेश जुटाना ही एकमात्र चुनौती नहीं होगी। आवश्यक पर्यावरणीय और अन्य वैधानिक मंजूरियां भी महत्वपूर्ण होंगी।
एक तरफ सरकार संभावित खनिज संपदा का इस्तेमाल कर निवेश और रोजगार के अवसर पैदा करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र और पर्यावरण से जुड़े नियमों का पालन भी जरूरी होगा।
किन कंपनियों पर रहेगी नजर?
मुंबई में होने वाली बैठक में डी बीयर्स, वेदांता और एनएमडीसी जैसी कंपनियों को आमंत्रित किए जाने की जानकारी है। इन कंपनियों की मौजूदगी से बक्सवाहा परियोजना में संभावित निवेश को लेकर उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, किसी कंपनी द्वारा परियोजना को अपने हाथ में लेने या निवेश करने का अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इसे निवेशकों के साथ बातचीत और संभावनाओं की तलाश के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अब 13 अगस्त के बाद साफ होगी तस्वीर
बक्सवाहा डायमंड माइनिंग परियोजना को लेकर सबसे अहम घटनाक्रम अब 13 अगस्त की मुंबई बैठक होगी। इस बैठक में संभावित निवेशकों के साथ परियोजना की स्थिति और खनन की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। यदि किसी बड़ी कंपनी की ओर से परियोजना में रुचि दिखाई जाती है तो वर्षों से रुकी इस योजना को आगे बढ़ाने की दिशा में नई शुरुआत हो सकती है। इससे निवेश और रोजगार से जुड़े संभावित अवसरों पर भी चर्चा आगे बढ़ेगी।
लेकिन फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि 22 लाख कैरेट से ज्यादा हीरों के अनुमान वाली बक्सवाहा की जमीन पर आखिर कौन सी कंपनी दांव लगाएगी? इसका जवाब मुंबई में होने वाली बैठक और उसके बाद सामने आने वाले आधिकारिक निर्णयों से ही स्पष्ट होगा।
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