सिंगोली। सिंगोली में डेंगू और मलेरिया के बढ़ते प्रकोप के बीच एक नाबालिग की इलाज के दौरान मौत हो गई। वार्ड क्रमांक 10 निवासी नाबालिग की तबीयत बिगड़ने पर उसे स्थानीय निजी चिकित्सालय ले जाया गया था, जहां प्लेटलेट्स कम होने के बाद चिकित्सक की सलाह पर परिजन उसे कोटा लेकर गए। जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद सिंगोली की सफाई व्यवस्था, मच्छर नियंत्रण और बरसात के दौरान नगर परिषद की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है, तो मच्छररोधी दवाओं के छिड़काव और सफाई व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीरता बरती जा रही है।
परिजनों के अनुसार नाबालिग की हालत बिगड़ने के बाद उसे पहले स्थानीय निजी चिकित्सालय ले जाया गया था। प्लेटलेट्स काफी कम होने पर डॉक्टर ने उसे अन्यत्र ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजन उसे कोटा लेकर गए, जहां जांच में डेंगू पाया गया। इलाज के दौरान नाबालिग ने दम तोड़ दिया।
मच्छरों का आतंक, अस्पतालों में बढ़े मरीज
स्थानीय जानकारी के अनुसार सिंगोली में पिछले कुछ दिनों से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा हुआ है। शासकीय और निजी चिकित्सालयों में मलेरिया तथा डेंगू जैसी बीमारियों से संबंधित मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है।
यही स्थिति अब नगर की सफाई व्यवस्था को लेकर भी चर्चा का विषय बन गई है। बरसात के दिनों में मच्छरों के बढ़ने के बीच नगर परिषद की ओर से डीडीटी और मच्छररोधी दवाओं के छिड़काव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि बरसात के दौरान जिस तरह मच्छरों से बचाव के लिए प्रभावी छिड़काव और सफाई की जरूरत होती है, वैसी सक्रियता दिखाई नहीं दे रही। हालांकि, नगर परिषद की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है।
‘मच्छर बढ़ते रहे, इंतजाम कागजों में?’—उठ रहा सवाल
सिंगोली की स्थिति पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि मच्छर दिखाई देने के बाद भी मच्छररोधी इंतजाम कब दिखाई देंगे? बरसात आते ही नालियों, गंदगी और मच्छरों की समस्या कोई नई बात नहीं होती। ऐसे में सवाल यह नहीं होना चाहिए कि मच्छर इतने क्यों बढ़ गए, बल्कि सवाल यह होना चाहिए कि उनकी रोकथाम के लिए समय रहते क्या किया गया।
स्थानीय लोगों की शिकायतों के मुताबिक नगर में मच्छरों का आतंक बढ़ा है। दूसरी ओर, डीडीटी और मच्छररोधी दवाओं के छिड़काव को लेकर भी सवाल हैं। ऐसे में व्यवस्था पर कटाक्ष होना स्वाभाविक है—क्या नगर की सफाई व्यवस्था भी मच्छरों के साथ ‘बरसाती मेहमान’ बनकर आती है और मौसम खत्म होते ही गायब हो जाती है?
यह सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अब एक नाबालिग की डेंगू से इलाज के दौरान मौत की जानकारी सामने आई है।
स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी पर भी सवाल
स्थानीय जानकारी के मुताबिक डेंगू और मलेरिया के मरीज बढ़ने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी प्रकार की एडवाइजरी जारी किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। बरसात के मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को लेकर लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता और एडवाइजरी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसलिए विभाग की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
पहले इलाज के लिए कोटा, फिर नहीं बच सकी जान
परिजन कन्हैयालाल जंगम के अनुसार नाबालिग की तबीयत खराब होने पर उसे स्थानीय निजी चिकित्सालय ले जाया गया था। वहां प्लेटलेट्स कम होने के बाद चिकित्सक ने उसे अन्यत्र ले जाने की सलाह दी। डॉक्टर की सलाह पर परिजन उसे कोटा लेकर पहुंचे। वहां जांच के बाद डेंगू की पुष्टि हुई। इलाज चलने के दौरान सोमवार को नाबालिग की मौत हो गई।
घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं, स्थानीय स्तर पर इस मौत के बाद नगर में डेंगू और मच्छरों की समस्या को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अब सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं, व्यवस्था का है
एक नाबालिग की मौत के बाद उठ रहे सवालों को केवल एक परिवार की त्रासदी तक सीमित नहीं किया जा सकता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नगर में डेंगू और मलेरिया के मरीज बढ़ने की बात सामने आ रही है और मच्छरों का प्रकोप भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
ऐसे में नगर परिषद से यह सवाल पूछा जाना स्वाभाविक है कि मच्छररोधी दवा का छिड़काव कब और कितने प्रभावी तरीके से किया गया? स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को क्या सावधानियां बताईं? और यदि नगर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा था तो उसे नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इन सवालों के जवाब नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सामने नहीं आए हैं।
व्यंग्य: सिंगोली में मच्छरों ने अपनी ‘सरकार’ बना ली है और अब जनता इंतजार कर रही है कि नगर परिषद कब इस सरकार के खिलाफ अभियान चलाएगी। लेकिन इस व्यंग्य के पीछे सवाल बेहद गंभीर है—स्वच्छता और मच्छर नियंत्रण जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं में देरी की कीमत कहीं किसी और परिवार को न चुकानी पड़े।
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