नीमच। कृषि उपज मंडी नीमच में ट्रॉली में तुलाई की नई व्यवस्था को लेकर मंगलवार को हम्मालों ने काम बंद कर विरोध जताया। रोजगार प्रभावित होने की आशंका के बीच बड़ी संख्या में हम्माल कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और एसडीएम पराग जैन को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की। प्रशासन के आश्वासन के बाद हम्मालों ने विरोध समाप्त कर मंडी में वापस काम शुरू करने पर सहमति जताई।
मामला उस समय सामने आया जब मंडी में नीलामी के दौरान उपज की तुलाई को लेकर नई व्यवस्था लागू किए जाने की बात सामने आई। हम्मालों ने ट्रॉली में तुलाई व्यवस्था से पारंपरिक तुलाई कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई और इसी को लेकर काम रोककर विरोध दर्ज कराया।
1099 हम्मालों के रोजगार पर असर की आशंका
हम्माल संघ के अनुसार नीमच कृषि उपज मंडी में करीब 1099 लाइसेंसधारी हम्माल कार्यरत हैं। इन हम्मालों और उनके परिवारों की आजीविका लंबे समय से मंडी में होने वाले काम पर निर्भर है। हम्मालों का कहना है कि यदि ट्रॉली में तुलाई को अनिवार्य किया जाता है तो पारंपरिक तुलाई के काम में कमी आ सकती है। इसका असर उनकी आय पर पड़ने की आशंका है। संघ के मुताबिक कई हम्माल मंडी में 30 से 40 वर्षों से काम कर रहे हैं और उम्र के इस पड़ाव पर उनके लिए नया रोजगार तलाशना मुश्किल हो सकता है।
हम्मालों ने प्रशासन के सामने इसी रोजगार संकट को प्रमुखता से रखा और मांग की कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले उनके पक्ष को भी सुना जाए।
किसान सुविधा के खिलाफ नहीं होने की बात
हम्माल संघ ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसान हित या तकनीकी सुधार के खिलाफ नहीं है। उनकी मुख्य आपत्ति ऐसी व्यवस्था को लेकर है, जिससे उनके रोजगार पर असर पड़ने की संभावना है। हम्मालों ने मांग की कि किसान की इच्छा के अनुसार तुलाई की सुविधा उपलब्ध रहनी चाहिए। उनका कहना है कि मंडी में किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले हम्माल और तुलावटी संगठनों के साथ चर्चा की जानी चाहिए।
इस मांग के पीछे हम्मालों का तर्क है कि आधुनिक व्यवस्था लागू होने के साथ उन श्रमिकों की आजीविका का भी ध्यान रखा जाए, जो लंबे समय से मंडी व्यवस्था का हिस्सा हैं।
रोजगार सुरक्षा नीति की मांग
हम्माल संघ ने प्रशासन से प्रभावित हम्माल और तुलावटी श्रमिकों के लिए रोजगार सुरक्षा नीति बनाने की मांग की है। इसके अलावा लंबे समय से मंडी में काम कर रहे और वृद्ध श्रमिकों के लिए वैकल्पिक रोजगार अथवा आर्थिक सहायता की व्यवस्था करने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई। हम्माल-तुलावटी संगठनों ने इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों के लाइसेंस उपलब्ध कराने की मांग भी की है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों के लिए ऋण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग प्रशासन के सामने रखी गई।
एसडीएम के आश्वासन के बाद खत्म हुआ विरोध
हम्मालों के कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद एसडीएम पराग जैन ने उनकी समस्याएं सुनीं। एसडीएम ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद हम्मालों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया। हम्मालों ने मंडी में वापस लौटकर तुलाई कार्य सुचारू रूप से शुरू करने पर सहमति जताई। इस तरह ट्रॉली में तुलाई को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद शांत हो गया है।
हम्मालों का कहना है कि कृषि उपज मंडी की व्यवस्था में किसान और व्यापारी के साथ हम्माल एवं तुलावटी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए तुलाई व्यवस्था में बदलाव करते समय किसानों की सुविधा के साथ श्रमिकों की आजीविका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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