भोपाल। मध्यप्रदेश नर्सिंग कॉलेज घोटाला मामले में हाईकोर्ट की निगरानी के दौरान करीब 800 नर्सिंग कॉलेजों की जांच हुई, जिसमें लगभग 600 कॉलेज अपात्र या गंभीर कमियों वाले पाए गए। जांच के दौरान कुछ कॉलेज गैराज, एटीएम और स्कूल भवनों में संचालित होने की जानकारी सामने आई। मामले की जांच के दौरान सीबीआई के दो इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
यह मामला सितंबर 2021 में एक शिकायत से शुरू हुआ था। इसके बाद जनवरी 2022 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। न्यायालय की लगातार निगरानी के बाद नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, निरीक्षण प्रक्रिया और नर्सिंग काउंसिल की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आईं।
शिकायत के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला
सितंबर 2021 में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने सरकार को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आदिवासी क्षेत्रों के 55 नर्सिंग कॉलेजों को जरूरी सुविधाओं के बिना मान्यता दी गई। इन कॉलेजों में भवन, लैब और अस्पताल जैसी आवश्यक सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए गए थे। शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद जनवरी 2022 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित रिकॉर्ड की जांच की गई। इस दौरान फाइलों में बड़ी संख्या में दस्तावेज नहीं होने की जानकारी सामने आई।
फाइलों में मिलीं गंभीर कमियां
रिकॉर्ड के अवलोकन के दौरान करीब 37,759 पृष्ठ फाइलों में संलग्न नहीं होने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा लगभग 90 प्रतिशत फाइलों में भवन का स्वीकृत लेआउट नहीं मिलने की बात भी सामने आई। जांच के दौरान यह भी पता चला कि कुछ कॉलेजों में एक ही फैकल्टी को कई संस्थानों में दर्शाया गया था। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए गए।
सीबीआई की जांच में करीब 800 नर्सिंग कॉलेजों में से लगभग 600 कॉलेज अपात्र या कमियों से प्रभावित पाए गए। कुछ कॉलेजों के गैराज, एटीएम और स्कूल भवनों में संचालित होने की जानकारी भी सामने आई।
रजिस्ट्रार की नियुक्तियों पर भी उठे सवाल
मध्यप्रदेश नर्सिंग कॉलेज घोटाला केवल कॉलेजों की मान्यता तक सीमित नहीं रहा। जांच के दौरान नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रार की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठे। उपलब्ध सामग्री में अंगूरी सिंह, जस्सी फिलिप, जयंती चौरसिया और चंद्रकला दिवगैया समेत कई नामों का उल्लेख किया गया है। आरोप लगाया गया कि नियमों के विपरीत अयोग्य नर्सों को अस्थायी रूप से रजिस्ट्रार बनाया गया।
मामले में डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन डॉ. एनएम श्रीवास्तव से जुड़ा आरोप भी सामने आया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, नर्सिंग काउंसिल के पदेन अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 2014 में भोपाल में 3,000 वर्गफीट के मकान में सविता नर्सिंग कॉलेज शुरू किया था। दावा है कि इस कॉलेज को सात साल तक मान्यता मिली और डिग्रियां प्रदान की गईं। इन आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
जांच के दौरान रिश्वतखोरी का मामला
नर्सिंग कॉलेजों की जांच के दौरान ही रिश्वतखोरी का एक अलग मामला सामने आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीबीआई के दो इंस्पेक्टर सहित कुल 13 लोगों को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोप था कि कॉलेजों की जांच और मान्यता प्रक्रिया से जुड़े मामलों में प्रति कॉलेज 2 लाख से 10 लाख रुपये तक की रिश्वत ली जा रही थी।
इसी बीच जांच के दौरान 49 नए कॉलेजों को मान्यता मिलने का मामला भी सामने आया। इसके बाद रजिस्ट्रार सुनीता सिजू को निलंबित किए जाने की जानकारी दी गई। निलंबन की कार्रवाई और उसके बाद की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे। हाईकोर्ट की आपत्ति के बाद सरकार को इस मामले में सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।
अगली नियुक्ति पर भी विवाद
इसके बाद रजिस्ट्रार अनीता चांद की नियुक्ति को लेकर भी विवाद सामने आया। आरोप था कि उन्होंने आरकेएस नर्सिंग कॉलेज को झूठी रिपोर्ट के आधार पर मान्यता दिलाने में भूमिका निभाई। दिसंबर 2024 में हाईकोर्ट ने उन्हें और चेयरमैन को हटाने का आदेश दिया।
इसके बाद नर्सिंग काउंसिल कार्यालय से जांच से संबंधित सीसीटीवी फुटेज और हाई-लेवल कमेटी की मूल फाइलें गायब होने का मामला सामने आया। हाईकोर्ट ने इस मामले को भोपाल पुलिस कमिश्नर और साइबर सेल को सौंपे जाने के निर्देश दिए। जुलाई 2025 की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने काउंसिल की वेबसाइट से एक कथित फर्जी मार्कशीट डाउनलोड कर उसकी पुष्टि की।
भवन नियमों में बदलाव पर भी रोक
मामले की सुनवाई के दौरान नर्सिंग कॉलेजों के भवन क्षेत्रफल से जुड़े नियमों में बदलाव का मुद्दा भी सामने आया। सरकार ने भवन क्षेत्रफल की शर्त को करीब 23,000 वर्गफीट से घटाकर 8-9 हजार वर्गफीट करने का निर्णय लिया था। हाईकोर्ट ने इस बदलाव पर रोक लगा दी। इसके अलावा जांच में अपात्र पाए गए कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य का मुद्दा भी न्यायालय के सामने आया। कई छात्रों को दूसरे संस्थानों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद हजारों छात्रों की शिफ्टिंग सुनिश्चित की गई और दूसरे संस्थानों में स्थानांतरित छात्रों के परीक्षा परिणाम दिलाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।
अधिकारियों को नोटिस, फिर कार्रवाई पर सवाल
जवाबदेही तय करने के लिए सरकार की ओर से 14 डिप्टी कलेक्टर, 14 तहसीलदार और 111 नर्सिंग इंस्पेक्टरों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में इन नोटिसों के बाद सभी अधिकारियों के खिलाफ हुई अंतिम कार्रवाई की विस्तृत स्थिति स्पष्ट नहीं है।
800 से घटकर करीब 200 रह गए कॉलेज
जून 2025 में हाईकोर्ट ने नर्सिंग से जुड़े मामलों के लिए इस याचिका को लीड केस घोषित किया। इसके बाद मामले में दिन-प्रतिदिन सुनवाई शुरू हुई। न्यायिक निगरानी और जांच की प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में मान्यता प्राप्त नर्सिंग कॉलेजों की संख्या करीब 700-800 से घटकर लगभग 200 के आसपास रह गई।
यही आंकड़ा मध्यप्रदेश नर्सिंग कॉलेज घोटाला मामले की जांच के प्रभाव को समझने में महत्वपूर्ण है। हालांकि, अलग-अलग कॉलेजों की वर्तमान मान्यता स्थिति और उन पर हुई अंतिम कार्रवाई का विवरण उपलब्ध सामग्री में नहीं दिया गया है।
छात्रों और व्यवस्था पर पड़ा असर
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उन छात्रों से जुड़ा रहा, जिन्होंने इन कॉलेजों में प्रवेश लिया था। जांच में कॉलेजों की पात्रता और सुविधाओं पर सवाल उठने के बाद छात्रों को दूसरे संस्थानों में स्थानांतरित करने का मुद्दा हाईकोर्ट के सामने आया।
न्यायालय के निर्देशों के बाद छात्रों की शिफ्टिंग और परीक्षा परिणाम से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया, निरीक्षण व्यवस्था और नियामक संस्थाओं की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हाईकोर्ट की निगरानी में सामने आईं कई परतें
मध्यप्रदेश नर्सिंग कॉलेज घोटाला मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी, लेकिन हाईकोर्ट की निगरानी में जांच आगे बढ़ने के साथ कॉलेजों की मान्यता से लेकर निरीक्षण और प्रशासनिक नियुक्तियों तक कई मुद्दे सामने आते गए। करीब 800 कॉलेजों की जांच में लगभग 600 कॉलेजों के अपात्र या कमियों वाले पाए जाने की जानकारी, गैराज और अन्य जगहों पर कॉलेज संचालित होने के मामले तथा रिश्वतखोरी के आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।
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