MP Cyber Fraud Refund: साइबर ठगी का पैसा वापस लेना भी महंगा, ₹500 के रिफंड पर ₹1000 का बॉन्ड
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
26 अगस्त 2026, (अपडेटेड 26 अगस्त 2026, 10:32 पूर्वाह्न IST)

नीमच (MP Cyber Fraud Refund): मध्यप्रदेश में साइबर ठगी की रकम वापस पाने की प्रक्रिया में पीड़ितों को ₹1000 का क्षतिपूर्ति बॉन्ड भरना पड़ रहा है। खास बात यह है कि अगर किसी व्यक्ति के सिर्फ ₹500 साइबर फ्रॉड में फंसे हैं, तब भी बॉन्ड के लिए ₹1000 की स्टाम्प ड्यूटी देनी पड़ रही है। यह व्यवस्था इंडियन स्टाम्प एक्ट-1899 के तहत लागू होने की जानकारी दी गई है। राज्य साइबर पुलिस ने इस राशि को कम करने के लिए गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में क्षतिपूर्ति बॉन्ड की राशि ₹100 करने की सिफारिश की गई है। वहीं राजस्थान और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में बॉन्ड राशि घटाकर ₹200 किए जाने की जानकारी सामने आई है।

₹500 की ठगी पर भी ₹1000 का बॉन्ड

मध्यप्रदेश में साइबर ठगी के मामलों में बैंक खातों में होल्ड कराई गई रकम को पीड़ितों तक वापस पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। लेकिन इस प्रक्रिया में बॉन्ड की राशि पीड़ितों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। मध्यप्रदेश में रिफंड लेने के लिए ₹1000 का क्षतिपूर्ति बॉन्ड भरना पड़ता है। बॉन्ड की यह राशि ठगी की रकम के आधार पर कम नहीं होती। यानी यदि किसी पीड़ित के ₹500 फंसे हैं, तो उसे भी ₹1000 के बॉन्ड की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। छोटी रकम वाले मामलों में यही खर्च पीड़ितों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है।

क्यों लिया जाता है क्षतिपूर्ति बॉन्ड?

क्षतिपूर्ति बॉन्ड को राशि वापस करने की प्रक्रिया में कानूनी सुरक्षा के तौर पर देखा जाता है। यदि रकम वापस किए जाने के बाद किसी अन्य व्यक्ति की ओर से उस राशि पर दावा किया जाता है या अदालत के किसी आदेश के कारण रकम वापस करने की स्थिति बनती है, तो बॉन्ड के माध्यम से जिम्मेदारी तय की जा सकती है। साइबर ठगी की राशि वापस करने की प्रक्रिया में बॉन्ड की आवश्यकता कई राज्यों में रखी गई है। हालांकि, समस्या इसकी राशि को लेकर है।

मध्यप्रदेश में लागू व्यवस्था के संबंध में यह भी बताया गया है कि संबंधित SOP में अलग-अलग राशि के मामलों के लिए स्टाम्प ड्यूटी की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण छोटी रकम के मामलों में भी ₹1000 का बॉन्ड लागू हो रहा है।

राजस्थान में ₹200, MP में ₹1000

साइबर ठगी की रकम वापस लेने के मामले में अलग-अलग राज्यों में बॉन्ड राशि अलग है। राजस्थान में बॉन्ड राशि को घटाकर ₹200 किए जाने की जानकारी दी गई है। जम्मू-कश्मीर समेत कुछ अन्य राज्यों में भी कम राशि के बॉन्ड की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इसके मुकाबले मध्यप्रदेश में फिलहाल ₹1000 की राशि पीड़ितों के लिए अधिक बोझ वाली साबित हो रही है। खासकर उन मामलों में जहां साइबर ठगी की रकम खुद ₹1000 से कम है।

साइबर पुलिस ने गृह विभाग को भेजा प्रस्ताव

मध्यप्रदेश साइबर पुलिस ने इस समस्या को लेकर गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा है। इसमें क्षतिपूर्ति बॉन्ड की राशि ₹100 करने की सिफारिश की गई है। गृह विभाग इस प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्तर पर भेजेगा। प्रस्ताव पर निर्णय होने के बाद ही बॉन्ड राशि में बदलाव हो सकेगा। फिलहाल प्रस्ताव मंजूर होने तक मध्यप्रदेश में मौजूदा व्यवस्था के अनुसार ही प्रक्रिया जारी रहने की जानकारी दी गई है।

साइबर ठगी की होल्ड रकम कैसे वापस मिलेगी?

राज्य साइबर पुलिस के IG शियाज ए. के मुताबिक, साइबर ठगी की होल्ड राशि वापस लेने की प्रक्रिया एक पोर्टल के जरिए पूरी की जाती है। पीड़ित को अपनी शिकायत से संबंधित जानकारी के आधार पर पोर्टल पर लॉगइन करना होता है। इसके बाद बैंक खाते में होल्ड की गई रकम की जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देती है।

MP Cyber Fraud Refund के लिए जरूरी प्रक्रिया

  • Money Restoration Citizen Portal पर जाना होता है।
  • शिकायत के Acknowledgement Number या OTP से लॉगइन करना होता है।
  • बैंक खाते में होल्ड राशि की जानकारी देखनी होती है।
  • संबंधित IFSC Code और बैंक डिटेल्स दर्ज करनी होती हैं।
  • धोखाधड़ी की रकम से जुड़ी जानकारी भरनी होती है।
  • PAN Card अपलोड करना होता है।
  • FIR की कॉपी उपलब्ध होने पर अपलोड करनी होती है।
  • यदि उपलब्ध हो तो कोर्ट का Refund Order भी अपलोड किया जा सकता है।
  • इसके बाद “Raise Request For Refund” विकल्प से आवेदन करना होता है।
  • आवेदन के बाद एक Unique ID Number जनरेट होता है।
  • यह रिक्वेस्ट संबंधित जांच अधिकारी के पास सत्यापन के लिए जाती है।
  • सत्यापन और बॉन्ड जमा करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राशि खाते में वापस आने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

रिफंड प्रक्रिया में सत्यापन जरूरी

साइबर ठगी की राशि वापस करने से पहले संबंधित मामले और रकम का सत्यापन किया जाता है। इसके लिए आवेदन जांच अधिकारी के पास जाता है। पीड़ित की ओर से दी गई बैंक संबंधी जानकारी, शिकायत और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही रिफंड की कार्रवाई आगे बढ़ती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि होल्ड की गई राशि सही दावेदार को ही वापस की जाए।

छोटी रकम वाले पीड़ितों पर ज्यादा असर

₹1000 के बॉन्ड की व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर छोटी रकम वाले साइबर फ्रॉड मामलों में दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति के ₹500 फंसे हैं, तो ₹1000 के बॉन्ड की लागत उसकी मूल ठगी की रकम से अधिक हो सकती है। इसी वजह से बॉन्ड राशि कम करने का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय होने तक मध्यप्रदेश में वर्तमान व्यवस्था में कोई बदलाव होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

पोर्टल पर आवेदन से पहले क्या रखें तैयार?

रिफंड प्रक्रिया शुरू करने वाले पीड़ितों के पास शिकायत से जुड़ी जानकारी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होना जरूरी है। विशेष रूप से शिकायत का Acknowledgement Number, बैंक की जानकारी, IFSC Code, PAN Card और FIR की कॉपी जैसी जानकारी मांगी जा सकती है। यदि कोर्ट का Refund Order उपलब्ध है, तो उसे भी प्रक्रिया के दौरान अपलोड किया जा सकता है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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