नीमच से खत्म नहीं हो रहा खाद्य अधिकारी राजू सोलंकी का मोह: पुराने विवादों और निलंबन के बाद भी वापसी, पूर्व में लगे ‘मासिक बंदी’ के आरोपों की फिर चर्चा
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
02 सितम्बर 2026, (अपडेटेड 02 सितम्बर 2026, 3:47 अपराह्न IST)

नीमच। प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों के तबादले एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब किसी अधिकारी का बार-बार एक ही जिले में लौटना हो, तो वह प्रशासनिक गलियारों और आम जनता के बीच गंभीर चर्चा का विषय बन जाता है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू सोलंकी की नीमच जिले में पदस्थापना को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।

2025 को उज्जैन से उनकी नीमच में पुनः पदस्थापना हुई। उनके इस मौजूदा कार्यकाल के दौरान विभागीय कार्रवाइयां तो जारी हैं, लेकिन इसके साथ ही उनके पुराने विवादित सेवा रिकॉर्ड, निलंबन की कार्रवाइयों और पूर्व में व्यापारियों द्वारा लगाए गए कथित ‘मासिक बंदी’ के आरोपों की चर्चाएं भी जिले के बाजार में फिर से गरमाने लगी हैं।

पुराने विवाद और प्रशासनिक कार्रवाइयों का रिकॉर्ड

पूर्व प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजू सोलंकी का नीमच से जुड़ाव काफी पुराना रहा है। इस दौरान उनके कार्यकाल से कई प्रशासनिक आपत्तियां और विवाद जुड़े रहे हैं:

  • 2019 की प्रशासनिक कार्रवाई: वर्ष 2019 में तत्कालीन कलेक्टर अजय सिंह गंगवार के कार्यकाल में राजू सोलंकी के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की खबरें प्रकाशित हुई थीं। उनके सैंपलिंग और निरीक्षण संबंधी अधिकार वापस लेकर उन्हें जिला मुख्यालय से हटाकर सिंगोली तहसील कार्यालय में अटैच किया गया था। इस आदेश के खिलाफ वे हाईकोर्ट पहुंचे थे, जहां से उन्हें तात्कालिक राहत मिली थी।

  • 2020 का तबादला और संगठन का ज्ञापन: जुलाई 2020 में शासन द्वारा उनका स्थानांतरण राजगढ़ जिले में किया गया था। तत्कालीन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अजाक्स (AJAX) संगठन की ओर से इस तबादले को निरस्त करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। ज्ञापन में संगठन का जिलाध्यक्ष होने के आधार पर 4 वर्ष तक स्थानांतरण से छूट संबंधी नियमों का हवाला देकर आदेश वापस लेने का आग्रह किया गया था।

  • 2022 का इंदौर रिश्वत कांड और निलंबन: सोलंकी के करियर का सबसे चर्चित मामला फरवरी 2022 में इंदौर में सामने आया था। रिपोर्टों के अनुसार, एक मसाला व्यापारी से ₹10,000 की कथित रिश्वत मांगने का वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित हुआ था। वीडियो में उनके अधीनस्थ नमूना सहायक रिश्वत लेते दिखे थे। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद जिला प्रशासन (तत्कालीन एडीएम) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था।

‘मासिक बंदी’ के पुराने आरोप फिर चर्चा के केंद्र में

नीमच में राजू सोलंकी की वापसी के बाद स्थानीय व्यापारी वर्ग में एक बार फिर उन पुराने आरोपों की फुसफुसाहट शुरू हो गई है, जो पूर्ववर्ती सरकारों के समय भी चर्चा में रहे थे।

पूर्व में युवा कांग्रेस के तत्कालीन पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री तक लिखित शिकायत कर आरोप लगाया था कि व्यापारियों पर अनुचित दबाव बनाया जाता है और कथित ‘मासिक बंदी’ न देने वालों पर सैंपलिंग के नाम पर कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। वर्तमान में भी नीमच के किराना, डेयरी और मसाला व्यापारियों के बीच दबी जुबान में यही चिंता व्यक्त की जा रही है कि पूर्व के तौर-तरीके फिर से प्रभावी न हो जाएं।

छोटे व्यापारियों का कहना है कि नियमों के दायरे में जांच से किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन जांच का इस्तेमाल भय पैदा करने के लिए नहीं होना चाहिए।

सैंपलिंग की प्रक्रिया और रिपोर्ट में देरी पर सवाल

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर बाजार से नमूने लिए जाने की खबरें सामने आती रहती हैं। हाल के महीनों में भी कई प्रतिष्ठानों पर सैंपलिंग की कार्रवाई की गई है। लेकिन स्थानीय मीडिया और व्यापारियों का सवाल इस बात को लेकर है कि इन नमूनों का अंतिम परिणाम क्या निकलता है।

जब भी मीडिया द्वारा पुराने नमूनों की जांच रिपोर्ट की स्थिति के बारे में पूछा जाता है, तो अमूमन यही आधिकारिक बयान मिलता है कि “रिपोर्ट भोपाल स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला से प्रतीक्षित है।” कई मामलों में महीनों बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। व्यापारियों का आरोप है कि रिपोर्ट लंबे समय तक लंबित रहने से संबंधित कारोबारी पर लगातार मानसिक दबाव बना रहता है। जब भी इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से औपचारिक आंकड़े मांगे जाते हैं, तो वे व्यस्तता का हवाला देकर स्पष्ट जानकारी देने से बचते नजर आते हैं।

तबादला नीति और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल

शासन की सामान्य तबादला नीति के अनुसार, संवेदनशील और जनहित से सीधे जुड़े विभागों में किसी भी अधिकारी को एक ही क्षेत्र में लंबे समय तक या बार-बार तैनात करने से परहेज किया जाता है, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

नीमच के जागरूक नागरिकों और व्यापारिक संगठनों का कहना है कि:

  • जब किसी अधिकारी के खिलाफ पूर्व में इंदौर में गंभीर वित्तीय अनियमितता के आधार पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी हो,

  • जब नीमच में ही पूर्व कलेक्टर द्वारा उनके अधिकार सीमित किए जाने का रिकॉर्ड रहा हो,

  • और जब उनके तबादलों को लेकर पहले भी विवाद खड़े हुए हों,

तो ऐसी स्थिति में उसी अधिकारी को बार-बार उसी जिले की कमान सौंपना प्रशासनिक नियमों की भावना के अनुकूल नहीं लगता। स्थानीय व्यापारी वर्ग और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि जिला प्रशासन और राज्य शासन को इस संबंध में संज्ञान लेना चाहिए। जनता के स्वास्थ्य और व्यापारियों के विश्वास को बहाल रखने के लिए जरूरी है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की पूरी कार्यप्रणाली पारदर्शी हो और लंबित सभी जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाए।


‘The Times of MP’ की खास अपील: भ्रष्टाचारियों से डरें नहीं, बेनकाब करें!

अगर कोई भी सरकारी अधिकारी आपसे किसी भी काम, सैंपलिंग, या जांच के नाम पर रिश्वत या ‘मासिक बंदी’ की मांग करता है, तो डरें नहीं और न ही घूस दें।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Lokayukta Police / EOW MP) में तुरंत इसकी शिकायत दर्ज कराएं:

  • एंटी करप्शन टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1064

  • लोकायुक्त उज्जैन: 0734-2518882 (कार्यालय) / मोबाइल: 9425103975

  • ईमेल के माध्यम से शिकायत: [email protected]/ [email protected]

हम आपके साथ हैं: ‘The Times of MP’ की टीम भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में पूरी तरह आपके साथ खड़ी है। अगर कोई अधिकारी आपको डरा-धमका कर प्रताड़ित कर रहा है, तो बेझिझक हमसे संपर्क करें। आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी और इन भ्रष्ट चेहरों को बेनकाब करने में हमारी टीम आपकी हर संभव कानूनी और पत्रकारीय मदद करेगी।
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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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