जमीन के नीचे बसा अनोखा संसार — तामिया का पातालकोट बना पर्यटकों की पसंद

छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश) — पातालकोट, नाम सुनते ही ज़हन में एक रहस्यमयी दुनिया की तस्वीर उभरती है — धरती के नीचे बसा वो संसार, जिसका ज़िक्र धर्मग्रंथों में मिलता है। लेकिन यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा जिले की तामिया तहसील में बसा एक वास्तविक स्थान है, जो अब देश-विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
3,000 फीट नीचे बसा आदिवासी संसार
धरातल से करीब 3,000 फीट नीचे और 79 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला यह इलाका 12 भारिया जनजाति गांवों का समूह है। यही है “पातालकोट” — जहां आदिवासी सैकड़ों वर्षों से प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन जी रहे हैं। यह इलाका औषधीय जड़ी-बूटियों के खजाने के लिए भी प्रसिद्ध है, जिनका उपयोग आज भी पारंपरिक चिकित्सा में होता है।
प्रसिद्ध क्रिकेटर का भी हुआ था इलाज
रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीलंका के क्रिकेटर सनथ जयसूर्या का इलाज भी पातालकोट की जड़ी-बूटियों से किया गया था।
वन विभाग के मुताबिक, यहां 188 वृक्ष प्रजातियाँ, 577 छोटे पौधे, 132 बेल प्रजातियाँ, 290 औषधीय पौधे और 21 प्रकार के ऑर्किड्स पाई जाती हैं — जो इसे एक जैव विविधता विरासत स्थल बनाते हैं।
मिलेट्स से पोषण और परंपरा
पातालकोट के आदिवासी मोटे अनाज (मिलेट्स) और प्राकृतिक शहद को अपने भोजन का प्रमुख हिस्सा मानते हैं। “कोदो”, “कुटकी” और “बालर” जैसे मिलेट्स यहां की मिट्टी से जुड़ी फसलों में शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मन की बात कार्यक्रम में इन फसलों की प्रशंसा की थी।
जहां दिन सिर्फ 5 घंटे का होता है
घाटी की गहराई के कारण यहांसूर्य की रोशनी मात्र 5 घंटेही पहुंचती है। यह प्राकृतिक विचित्रता इसे और भी अनोखा बनाती है। अब पर्यटन बोर्ड ने यहांहोम स्टे सुविधाशुरू की है, जिससे पर्यटक स्थानीय जीवन और संस्कृति का अनुभव ले सकें।
लाखों साल पुराना भू-भाग
रिसर्च के अनुसार, यह घाटी लगभग 6 मिलियन वर्ष पुरानी है। इसमें पाई जाने वाली दुर्लभ वनस्पतियाँ, कीट, पक्षी और जीव-जंतु इस क्षेत्र को प्राकृतिक इतिहास का जीवित नमूना बनाते हैं। 2019 में इसे जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Site) घोषित किया गया था।

