New Labour Codes: नौकरीपेशा लोगों के लिए बदला ‘सैलरी’ और ‘छुट्टी’ का गणित; 29 पुराने कानूनों की छुट्टी, अब लागू हुए 4 नए कोड

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नीमच : केंद्र सरकार ने देश के श्रम सुधारों के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव करते हुए 29 पुराने कानूनों को मिलाकर बनाए गए 4 नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) को लागू करने की घोषणा कर दी है। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य मजदूरों को बेहतर सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देना है, जबकि कंपनियों के लिए अनुपालन (Compliance) को आसान बनाना है।

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ये कानून मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़े हैं। यहाँ इन नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) की 20 सबसे बड़ी और विस्तृत बातें दी गई हैं, जो सीधे आपकी नौकरी और जेब पर असर डालेंगी:

I. वेतन और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े बड़े बदलाव (Wage & Financial Security)

1. न्यूनतम मजदूरी की गारंटी विवरण: सरकार अब एक ‘स्टैच्यूटरी फ्लोर वेज’ यानी राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी की एक सीमा तय करेगी। राज्यों को अपनी न्यूनतम मजदूरी अनिवार्य रूप से इस ‘फ्लोर वेज’ से ऊपर ही रखनी होगी, जिससे पूरे देश में मजदूरों को जीवनयापन के लिए एक समान न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।

2. सैलरी की परिभाषा में बदलाव विवरण: ‘वेजेज’ यानी मजदूरी की परिभाषा बदल दी गई है। अब कर्मचारियों की कुल कमाई का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक पे (मूल वेतन) होना अनिवार्य होगा (इसमें बेसिक, DA और रिटेनिंग अलाउंस शामिल)। यह कदम कंपनियों को केवल भत्ते (Allowances) बढ़ाकर पीएफ और ग्रेच्युटी अंशदान को कम करने से रोकेगा, जिससे रिटायरमेंट फंड बढ़ेगा।

3. ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान विवरण: यदि कोई कर्मचारी निर्धारित कार्य घंटों (48 घंटे प्रति सप्ताह) से अधिक काम करता है, तो उसे अब सामान्य मजदूरी से कम से कम दोगुना पैसा ओवरटाइम के रूप में मिलेगा। यह नियम कर्मचारियों को उनके अतिरिक्त समय का उचित मूल्य दिलाएगा।

4. एक साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी विवरण: ‘फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉइज’ (निश्चित अवधि के कर्मचारी) को अब ग्रेच्युटी (Gratuity) के लिए पांच साल पूरे करने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उन्हें काम की अवधि के हिसाब से प्रो-राटा आधार पर ग्रेच्युटी का लाभ तुरंत मिलना शुरू हो जाएगा। यह कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा लाभ है।

5. यूनिवर्सल वेज पेमेंट कवरेज विवरण: सभी कर्मचारियों (जिन्हें मासिक ₹24,000 तक वेतन मिलता है) को समय पर तनख्वाह मिले, इसके लिए ‘यूनिवर्सल वेज पेमेंट कवरेज’ लाया गया है। यह सुनिश्चित करेगा कि वेतन में देरी या कटौती न हो।

II. सामाजिक सुरक्षा और काम की शर्तें (Social Security & Working Conditions)

6. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सुरक्षा विवरण: डिलीवरी बॉय या कैब ड्राइवर जैसे गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। इसके लिए, एग्रीगेटर्स (जैसे Uber, Zomato) को अपने टर्नओवर का 1-2% टैक्स सोशल सिक्योरिटी स्कीम चलाने के लिए देना होगा।

7. सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा का विस्तार विवरण: अब असंगठित क्षेत्र के मजदूर हों या संगठित क्षेत्र के, हर मजदूर को PF, ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम), बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों का कवरेज मिलेगा।

8. लैंगिक समानता और समान वेतन विवरण: नए कानून में लैंगिक समानता पर विशेष जोर है। समान काम के लिए भर्ती और सेवा शर्तों में लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। यानी महिला और पुरुष को एक जैसे काम के लिए बराबर वेतन मिलेगा।

9. महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट के दरवाजे खुले विवरण: महिलाओं को अब रात की शिफ्ट (Night Shift) में काम करने की कानूनी इजाजत मिल गई है। हालांकि, कंपनियों को उनकी सहमति लेना और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (जैसे ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा गार्ड) करना अनिवार्य होगा।

10. 40+ उम्र वालों के लिए स्वास्थ्य जांच विवरण: 40 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए कई तरह के प्रतिष्ठानों में साल में एक बार स्वास्थ्य जांच (Health Checkup) करवाना जरूरी कर दिया गया है। यह कर्मचारियों की सेहत सुनिश्चित करने के लिए है।

11. वर्क-फ्रॉम-होम को बढ़ावा विवरण: सर्विस सेक्टर में अब वर्क-फ्रॉम-होम को आधिकारिक मान्यता दी जाएगी। कंपनी और कर्मचारी आपसी सहमति से काम करने के तरीके, समय और स्थान तय कर सकेंगे।

12. नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) अनिवार्य विवरण: अब असंगठित क्षेत्र समेत सभी कर्मचारियों के लिए नियुक्ति पत्र लेना अनिवार्य होगा। इससे उनके काम और शर्तों का लिखित प्रमाण रहेगा, जो विवाद की स्थिति में सहायक होगा।

13. काम के घंटे की सीमा विवरण: काम के घंटे प्रति सप्ताह 48 घंटे ही रहेंगे। हालाँकि, रोज़ के काम के घंटे (डेली शिफ्ट) 12 घंटे तक बढ़ाए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ओवरटाइम का भुगतान दोगुना दर से करना अनिवार्य होगा।

III. औद्योगिक संबंध और अनुपालन (Industrial Relations & Compliance)

14. छंटनी की सीमा में बदलाव विवरण: कंपनियों के लिए छंटनी (Layoffs), रिट्रेंचमेंट या प्रतिष्ठान बंद करने की अनुमति लेने की सीमा बढ़ा दी गई है। पहले यह सीमा 100 कर्मचारियों की थी, जिसे अब बढ़ाकर 300 कर्मचारी कर दिया गया है। यह कंपनियों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में बड़ा कदम है।

15. हड़ताल से पहले नोटिस अनिवार्य विवरण: अब कर्मचारियों को हड़ताल करने से पहले कम से कम 14 दिन का अनिवार्य नोटिस देना होगा। इससे बातचीत और विवाद सुलझाने के लिए समय मिलेगा और अचानक होने वाली हड़तालों में कमी आएगी।

16. शीघ्र विवाद समाधान विवरण: काम से जुड़े विवादों को जल्दी निपटाने के लिए अब दो सदस्यों वाली ट्रिब्यूनल बनाई जाएगी। इससे फैसले जल्दी होंगे और लंबे कानूनी विवादों से बचा जा सकेगा।

17. इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर सिस्टम विवरण: निरीक्षण अब रैंडम और कंप्यूटर-आधारित (Computerised) होंगे। इंस्पेक्टर को अब ‘फैसिलिटेटर’ का दर्जा दिया गया है, जिससे अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न की गुंजाइश कम होगी।

18. कंपाउंडिंग ऑफ ऑफेंसेस विवरण: कुछ छोटे-मोटे अपराधों के लिए अब कोर्ट-कचहरी जाने की बजाय सीधे जुर्माना भरकर मामला सुलझाया जा सकेगा। इससे अदालतों का बोझ कम होगा।

19. वन लाइसेंस, वन रजिस्ट्रेशन विवरण: कंपनियों के लिए अलग-अलग लाइसेंस, रजिस्टर और रिटर्न फाइलिंग की जटिलता खत्म की गई है। अब ‘वन लाइसेंस, वन रजिस्ट्रेशन’ का नियम होगा, जिससे कंपनियों का काम आसान होगा और अनुपालन लागत (Compliance Cost) घटेगी।

20. फैक्ट्री की परिभाषा का विस्तार विवरण: फैक्ट्री के लिए थ्रेशोल्ड बढ़ा दिया गया है। पावर वाले मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए यह सीमा 10 से बढ़ाकर 20 वर्कर और बिना पावर वाले यूनिट्स के लिए 20 से बढ़ाकर 40 वर्कर कर दी गई है।