बड़ा खुलासा: प्रदूषण और शोषण के ‘पाप’ में डूबे सेठ को कर्मों की सजा; 2 करोड़ का Soybean Plant Gaban कर मुनीम ने खड़ी कर ली 70 लाख की कोठी!

Soybean Plant Gaban

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| Soybean Plant Gaban  : इनसाइड स्टोरी |

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शहर: कहते हैं कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती, लेकिन जब पड़ती है तो अच्छे-अच्छों की हेकड़ी निकल जाती है। शहर के औद्योगिक गलियारों में इन दिनों एक ऐसा ही मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे लोग ‘चोरी’ नहीं बल्कि ‘कर्मों का फल’ कह रहे हैं। एक नामी सोया प्लांट (Soybean Plant) के सेठ, जो अपनी तिजोरी भरने के लिए न तो पर्यावरण की परवाह करते हैं और न ही अपने कर्मचारियों की, उन्हें उनके ही सबसे वफादार मुनीम ने ऐसा चूना लगाया है कि वो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे। इस Soybean Plant Gaban की गूंज पूरे बाजार में सुनाई दे रही है।

प्रदूषण विभाग की लताड़ के बाद अब ‘घर के भेदी’ का वार

अभी इस सोया प्लांट के मालिक (सेठ) संभल भी नहीं पाए थे कि उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। कुछ ही दिन पहले फैक्ट्री से निकल रहे जानलेवा काले धुएं और नियमों की धज्जियां उड़ाने को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board) की टीम ने फैक्ट्री का दौरा किया था और सेठ को जमकर लताड़ लगाई थी। सेठ जी अभी अधिकारियों को ‘मैनेज’ करने और फैक्ट्री बचाने की जुगाड़ में लगे ही थे कि इधर उनकी नाक के नीचे एक और बड़ा खेल हो गया।

जिस ‘नंबर दो’ (काले कारोबार) की कमाई पर सेठ जी को गुमान था, उसी कमाई में उनके मुनीम ने सेंध लगा दी। सूत्रों की मानें तो मुनीम ने एक बाहरी दलाल के साथ सांठ-गांठ कर, कच्चे बिलों और नकद लेन-देन में हेरा-फेरी करते हुए सेठ को करीब 2 करोड़ (2 खोखे) का चूना लगा दिया।

किराए की कोठरी से ‘विकास नगर’ के बंगले तक का सफर

इस Soybean Plant Gaban का खुलासा तब हुआ जब मुनीम की जीवनशैली में अचानक ‘अंबानी’ जैसा बदलाव आ गया। जानकारी के मुताबिक, उक्त मुनीम वर्षों से शंकर ऑइल मिल क्षेत्र में एक साधारण से किराए के मकान में रहता था। उसकी हालत ऐसी थी कि महीने का खर्च चलाना भी मुश्किल था। लेकिन सेठ की ‘अंधी कमाई’ में हाथ साफ करते ही मुनीम ने शहर के पॉश इलाके ‘विकास नगर’ में 70 लाख रुपए का आलीशान मकान नकद (Cash) खरीद लिया।

जब सेठ जी को भनक लगी कि उनका मुनीम रातों-रात लखपति कैसे बन गया, तो उन्होंने अपनी पुरानी बहियां और कच्चा हिसाब खंगाला। जांच में जो सामने आया, उसे देखकर सेठ के पैरों तले जमीन खिसक गई। पता चला कि मुनीम और दलाल की जोड़ी ने पिछले कुछ समय में धीरे-धीरे करके करीब 2 करोड़ रुपए पार कर दिए हैं।

थाने में क्यों ‘भीगी बिल्ली’ बन गए सेठ जी?

कहानी में असली ट्विस्ट तब आया जब मामला पुलिस थाने पहुंचा। 2 करोड़ की चपत खाने के बाद सेठ जी गुस्से में तमतमाते हुए थाने तो गए, लेकिन वहां जाकर उनकी जुबान पर ताला लग गया। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह पूरा मामला ‘नंबर दो’ के धंधे का था। सेठ जी पुलिस को यह समझा ही नहीं पाए कि चोरी हुई रकम का स्रोत (Source of Income) क्या है।

  • अगर एफआईआर (FIR) दर्ज करवाते, तो पुलिस जांच करती।

  • जांच होती, तो बात आयकर विभाग (Income Tax) और प्रदूषण विभाग तक पहुंचती।

  • नतीजतन, फैक्ट्री सील होने और भारी पेनल्टी का डर सेठ को सताने लगा।

40 ‘पेटी’ पर हुआ अपमानजनक समझौता

अंत में, वही हुआ जो अक्सर काले धन के मामलों में होता है। थाने की चारदीवारी के भीतर ही एक ‘गुप्त पंचायत’ बैठी। मुनीम ने अपना जुर्म तो कबूल कर लिया, लेकिन साथ ही यह भी इशारा कर दिया कि वह सेठ की सारी पोल खोल सकता है। मरता क्या न करता, सेठ जी को झुकना पड़ा।

समझौते के तहत मुनीम ने गबन की गई राशि में से सिर्फ 40 लाख (40 पेटी) रुपए नकद लौटाने की बात मानी। बाकी के डेढ़ करोड़ से ज्यादा की रकम और विकास नगर वाला नया मकान मुनीम के पास ही रह गया। सेठ जी 40 लाख का थैला उठाकर, अपमान का घूंट पीकर अपने घर लौट आए।

बाजार में चर्चा: ‘चोर के घर चोरी’

इस घटना के बाद शहर के व्यापारियों में हड़कंप तो है, लेकिन सहानुभूति किसी को नहीं है। दबी जुबान में लोग कह रहे हैं कि यह सेठ के पापों का ही प्रायश्चित है। मजदूरों का शोषण करके और हवा में जहर घोलकर जो पैसा कमाया गया था, वह किसी ‘शुभ काम’ में तो लगने से रहा।

इस Soybean Plant Gaban कांड ने साबित कर दिया है कि जब आप सिस्टम और समाज को धोखा देते हैं, तो कोई न कोई ‘विभीषण’ आपके घर में ही पैदा हो जाता है। सेठ जी अब अपनी खाली तिजोरी और फैक्ट्री की चिमनी को देखकर बस यही सोच रहे हैं कि “लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई।”


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