Bamboo Man National Award: नीमच के किसान का राष्ट्रीय स्तर पर डंका, ‘पुनर्योजी खेती’ के लिए मिला देश का प्रतिष्ठित सम्मान
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
06 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 06 दिसम्बर 2025, 3:24 अपराह्न IST)

Bamboo Man National Award
भोपाल/नीमच।
मध्य प्रदेश की माटी के सपूतों ने जब भी कुछ नया करने की ठानी है, तो उसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर तक सुनाई दी है। एक बार फिर नीमच जिले का नाम देशभर में रोशन हुआ है। जिले के ग्राम भाटखेड़ी के प्रगतिशील किसान कमलाशंकर विश्वकर्मा, जिन्हें अब पूरा क्षेत्र और कृषि जगत ‘Bamboo Man’ (बैंबू मैन) के नाम से जानता है, ने खेती में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भोपाल में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें राष्ट्रीय स्तर के “प्रोफेसर रतनलाल अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन रिजनरेटिव एग्रीकल्चर – 2025” से नवाजा गया है।

यह सम्मान न केवल कमलाशंकर विश्वकर्मा की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह मालवा क्षेत्र के उन हजारों किसानों के लिए भी प्रेरणा है जो परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करने का जज्बा रखते हैं।

देशभर से चुने गए सिर्फ 14 दिग्गज, नीमच के लाल ने मारी बाजी

5 दिसंबर 2025, यानी ‘विश्व मृदा दिवस’ के अवसर पर भोपाल के होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में एक गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अधीन ‘भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद’ (ICAR), ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सॉइल साइंस’ (IISS) और अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘सॉलिडैरिडाड’ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश भर के उन चुनिंदा विशेषज्ञों और किसानों को सम्मानित करना था, जिन्होंने मिट्टी की सेहत सुधारने और खेती को टिकाऊ बनाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। चयन समिति ने पूरे भारत से केवल 14 लोगों (विशेषज्ञों और किसानों) को इस लिस्ट में शामिल किया, जिसमें नीमच के Bamboo Man National Award विजेता कमलाशंकर विश्वकर्मा ने अपनी जगह बनाकर प्रदेश का मान बढ़ाया।

आखिर क्यों मिला ‘Bamboo Man’ को यह सम्मान ?

कमलाशंकर विश्वकर्मा को यह अवार्ड ‘फार्मर (इंडिविजुअल) श्रेणी’ में दिया गया है। जूरी का मानना था कि विश्वकर्मा ने केवल फसल उगाना ही नहीं सीखा, बल्कि उन्होंने “धरती को पुनर्जीवित” करने का काम किया है।

  1. मिट्टी की सेहत में सुधार (Soil Health Improvement): उन्होंने अपने खेतों में रसायनों का अंधाधुंध प्रयोग बंद कर जैविक और रिजनरेटिव (पुनर्योजी) तकनीकों को अपनाया।

  2. बांस आधारित खेती का मॉडल: उन्होंने बांस की खेती (Bamboo Farming) को मुख्य फसल के साथ जोड़कर एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया, जिससे न केवल मिट्टी का कटाव रुका, बल्कि खेत की जैव विविधता भी बढ़ी। इसी वजह से उन्हें Bamboo Man National Award के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार माना गया।

  3. फसल अवशेष प्रबंधन: जहां किसान पराली जलाने को मजबूर हैं, वहीं कमलाशंकर ने फसलों के अवशेषों को खेत में ही गलाकर खाद बनाने की तकनीक विकसित की, जिससे मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा में भारी इजाफा हुआ।

भारत रत्न डॉ. एम.एच. मेहता के हाथों मिला सम्मान

समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंच पर देश के शीर्ष कृषि वैज्ञानिक मौजूद थे। कमलाशंकर विश्वकर्मा को यह सम्मान प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत रत्न (कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित व्यक्तित्व) डॉ. एम.एच. मेहता, राष्ट्रीय मृदा विज्ञान संस्थान के डायरेक्टर डॉ. मनोरंजन मोहंती, डॉ. शताद्रु चट्टोपाध्याय और डॉ. सुरेश मोटवानी ने प्रदान किया।

वैज्ञानिकों ने मंच से कहा,

“आज के दौर में जब मिट्टी बंजर हो रही है, कमलाशंकर जैसे किसान एक उम्मीद की किरण हैं।

उन्होंने साबित किया है कि अगर किसान चाहे तो खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा भी कर सकता है।”

क्या है रिजनरेटिव एग्रीकल्चर (Regenerative Agriculture)?

जिस श्रेणी में Bamboo Man National Award दिया गया है, वह ‘रिजनरेटिव एग्रीकल्चर’ है। आम भाषा में इसे ‘पुनर्योजी खेती’ कहते हैं। यह जैविक खेती से एक कदम आगे की प्रक्रिया है। इसमें किसान का लक्ष्य सिर्फ जहर मुक्त अनाज उगाना नहीं होता, बल्कि खराब हो चुकी मिट्टी को वापस उपजाऊ बनाना होता है। कमलाशंकर ने अपने खेतों में कार्बन की मात्रा बढ़ाई है, जो ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में भी मददगार है। उनका यह मॉडल अब कृषि छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक केस स्टडी बन चुका है।

नीमच के लिए गर्व का क्षण

अवार्ड मिलने के बाद कमलाशंकर विश्वकर्मा ने कहा,

“यह सम्मान मेरा नहीं, बल्कि धरती मां का सम्मान है। बांस की खेती ने मुझे नई पहचान दी है।

मैं चाहता हूं कि मेरा हर किसान भाई रसायनों की गुलामी छोड़े और अपनी मिट्टी को बचाए।”

भाटखेड़ी गांव में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके गांव के ‘बैंबू मैन’ ने यह साबित कर दिया है कि छोटे से गांव का किसान भी अपनी मेहनत से राष्ट्रीय पटल पर चमक सकता है।


यह भी पढ़ें:  नीमच के लिए गौरव का क्षण: ‘बैंबू मैन’ कमलाशंकर विश्वकर्मा को मिलेगा प्रतिष्ठित Prof. Rattan Lal Awards 2025, विश्व मृदा दिवस पर भोपाल में होंगे सम्मानित

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Aakash Sharma
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