Turkmenistan White Car Rule: दुनिया का 1 ऐसा अनोखा देश, जहां काली कार चलाने पर मिलती है ‘खौफनाक’ सजा
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
07 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 07 दिसम्बर 2025, 6:19 अपराह्न IST)

तुर्कमेनिस्तान । Turkmenistan White Car Rule दुनिया भर में अलग-अलग संस्कृतियों और भौगोलिक सीमाओं के साथ-साथ कानून भी बदलते रहते हैं। हम अक्सर सोशल मीडिया या इंटरनेट पर ऐसे देशों के बारे में पढ़ते हैं, जिनके नियम किसी को भी चौंका सकते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी ऐसे देश की कल्पना की है, जहां आपकी कार का रंग आपकी पसंद से नहीं, बल्कि सरकार के एक फरमान से तय होता है? जी हां, आज हम आपको रूबरू करा रहे हैं मध्य एशिया के एक ऐसे ही देश से, जहां सड़कों पर केवल ‘सफेद’ रंग का राज है। हम बात कर रहे हैं Turkmenistan White Car Rule की, जिसने इस देश को पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना दिया है।

अश्गाबात: ‘सफेद संगमरमर’ का चमकता शहर
तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात (Ashgabat) को विश्व स्तर पर ‘सिटी ऑफ व्हाइट मार्बल’ (City of White Marble) के नाम से जाना जाता है। यह केवल एक उपनाम नहीं है, बल्कि एक हकीकत है जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Guinness World Records) ने भी मान्यता दी है। इस शहर में दुनिया की किसी भी अन्य जगह के मुकाबले सबसे ज्यादा सफेद संगमरमर की इमारतें मौजूद हैं।

वर्ष 2000 के बाद, शहर के पुनर्विकास (Redevelopment) के लिए एक व्यापक योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत लगभग 550 से अधिक नई इमारतों का निर्माण किया गया, और शर्त यह थी कि हर इमारत सफेद संगमरमर से ही बनी होनी चाहिए। यह शहर इतना चमकदार है कि दिन के समय सूरज की रोशनी जब इन सफेद पत्थरों से टकराती है, तो चमक इतनी तेज होती है कि बिना धूप के चश्मे (Sunglasses) के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

क्या है Turkmenistan White Car Rule?
इस देश की सबसे विचित्र बात यहां का Turkmenistan White Car Rule है। राजधानी अश्गाबात में साल 2018 से एक सख्त नियम लागू है, जिसके तहत सड़कों पर केवल सफेद रंग की कारें ही दौड़ सकती हैं। हल्का सिल्वर रंग कुछ मामलों में स्वीकार्य है, लेकिन काला, लाल, नीला या कोई अन्य गहरा रंग पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

यह नियम रातों-रात लागू नहीं हुआ, बल्कि धीरे-धीरे इसे सख्त किया गया। प्रशासन का तर्क है कि सफेद रंग ‘शुभ’ और ‘पवित्रता’ का प्रतीक है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह नियम तत्कालीन राष्ट्रपति की निजी पसंद का परिणाम था।

राष्ट्रपति का ‘सफेद’ प्रेम और डेंटिस्ट कनेक्शन
इस अनोखे नियम के पीछे तुर्कमेनिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति गुरबांगुली बर्दीमुहामेदोव (Gurbanguly Berdimuhamedov) की अहम भूमिका मानी जाती है। राजनीति में आने से पहले वे पेशे से एक डेंटिस्ट (दंत चिकित्सक) थे। कहा जाता है कि सफेद रंग के प्रति उनका लगाव इसी पेशे से जुड़ा था। उन्हें सफेद रंग इतना पसंद था कि उन्होंने इसे पूरे शहर का ‘थीम कलर’ बना दिया।

उनकी यह सनक सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि शहर का हर कोना, चाहे वह फुटपाथ हो, स्ट्रीट लाइट हो, या फिर आम नागरिकों की गाड़ियां—सब कुछ उनकी पसंद यानी ‘सफेद’ रंग में रंगा हो।

नियम तोड़ने पर मिलती है कड़ी सजा

 अश्गाबात में Turkmenistan White Car Rule का उल्लंघन करना किसी के लिए भी भारी पड़ सकता है। पुलिस इस नियम को लेकर बेहद सख्त है।

  • गाड़ी जब्त: यदि कोई व्यक्ति काली या रंगीन कार चलाता हुआ पाया जाता है, तो पुलिस बिना किसी चेतावनी के गाड़ी को जब्त कर लेती है।

  • महंगा जुर्माना: गाड़ी छुड़वाने के लिए मालिक को भारी जुर्माना भरना पड़ता है।

  • कंपलसरी री-पेंट (Repaint): जुर्माना भरने के बाद भी गाड़ी तब तक वापस नहीं मिलती, जब तक मालिक उसे सफेद रंग में पेंट कराने का लिखित समझौता नहीं करता।

इस नियम ने वहां के नागरिकों की जेब पर भारी असर डाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब यह नियम लागू हुआ, तो शहर में सफेद पेंट की मांग अचानक बढ़ गई, जिससे री-पेंटिंग की कीमतें आसमान छूने लगीं। जो लोग अपनी महंगी काली कारों का रंग नहीं बदलवा सके, उन्हें अपनी गाड़ियां कौड़ियों के दाम दूसरे शहरों में बेचनी पड़ीं।

सिर्फ कारें ही नहीं, सौंदर्य भी ‘सफेद’ चाहिए

तुर्कमेनिस्तान के इस ‘व्हाइट रूल’ की हदें सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं हैं। शहर के सौंदर्यशास्त्र (Aesthetics) को बनाए रखने के लिए कड़े निर्देश हैं:

  1. विज्ञापन: होर्डिंग्स और पोस्टर्स में भड़कीले रंगों का प्रयोग कम से कम किया जाता है।

  2. इंटीरियर: सरकारी दफ्तरों, होटलों और मॉल के अंदरूनी हिस्सों में भी सफेद और चमकदार संगमरमर का ही इस्तेमाल अनिवार्य है।

  3. सार्वजनिक उत्सव: यहां तक कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में सजावट भी इसी ‘श्वेत थीम’ के इर्द-गिर्द घूमती है।

निष्कर्ष: सनक या अनुशासन?

बाहरी दुनिया के लिए Turkmenistan White Car Rule एक तानाशाही फरमान या सनक जैसा लग सकता है। यह मानवाधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नजरिए से बहस का मुद्दा भी है। लेकिन वहां की सरकार इसे शहर की सुंदरता और एकरूपता (Uniformity) के लिए आवश्यक कदम बताती है। चाहे जो भी हो, इस नियम ने अश्गाबात को दुनिया के नक्शे पर एक ‘अनोखे अजूबे’ के रूप में स्थापित जरूर कर दिया है।


डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और मीडिया दावों पर आधारित है। Times of MP इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।
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Aakash Sharma
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