Trump Tariff on Indian Rice: भारत से आने वाले सस्ते चावल पर ट्रम्प की टेढ़ी नजर, अमेरिकी किसानों के लिए छेड़ा ‘टैरिफ वॉर’
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
09 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 09 दिसम्बर 2025, 11:51 पूर्वाह्न IST)

वॉशिंगटन डीसी/नई दिल्ली: अमेरिका में सत्ता में वापसी के साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को और अधिक आक्रामक तरीके से लागू करना शुरू कर दिया है। Trump Tariff on Indian Rice को लेकर उनकी हालिया घोषणा ने वैश्विक व्यापार बाजार में हलचल मचा दी है। सोमवार को व्हाइट हाउस में एक अहम बैठक के दौरान ट्रम्प ने साफ संकेत दिए कि भारत से आने वाले सस्ते चावल और कनाडा की खाद (फर्टिलाइजर) पर अमेरिका एक्स्ट्रा टैरिफ (अतिरिक्त आयात शुल्क) लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

ट्रम्प का मानना है कि विदेशी बाजारों से होने वाली ‘डंपिंग’ के कारण अमेरिकी किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या है ट्रम्प का ‘डंपिंग’ वाला आरोप?

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिकी किसानों के लिए नई आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा करते हुए अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने भारत, वियतनाम और थाईलैंड जैसे एशियाई देशों का नाम लेते हुए कहा कि ये देश अमेरिका में चावल की “डंपिंग” कर रहे हैं।

ट्रम्प ने कहा,

“भारत और वियतनाम जैसे देश हमारे बाजार में इतना सस्ता चावल भेज रहे हैं कि हमारे अपने किसान उनसे मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। उनकी कमाई घट रही है। इसे डंपिंग कहते हैं और ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।”

Trump Tariff on Indian Rice मुद्दे पर उन्होंने तुरंत अपने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) से सवाल किया कि क्या चावल आयात के मामले में भारत को कोई विशेष छूट मिली हुई है? जवाब में मंत्री ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते (Trade Deal) पर अभी बातचीत चल रही है, लेकिन ट्रम्प के तेवर बताते हैं कि वे बातचीत के नतीजों का इंतजार करने के मूड में नहीं हैं।

कनाडाई खाद पर भी लटकी टैरिफ की तलवार

Trump Tariff on Indian Rice सिर्फ चावल ही नहीं, ट्रम्प ने अपने पड़ोसी देश कनाडा को भी निशाने पर लिया है। अमेरिका अपनी पोटाश (Potash) खाद की सबसे बड़ी आपूर्ति कनाडा से करता है। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर कनाडा से आने वाली खाद बहुत सस्ती हुई और उसने अमेरिकी उत्पादकों को नुकसान पहुंचाया, तो उस पर भी कड़े टैरिफ लगाए जाएंगे।

हालांकि, Trump Tariff on Indian Rice एक दोधारी तलवार साबित हो सकता है। अमेरिका में किसान पहले ही बढ़ती लागत और महंगाई से परेशान हैं। अमेरिका ने हाल ही में पोटाश और फॉस्फेट को ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ की लिस्ट में डाला था ताकि सप्लाई न रुके। अगर खाद पर टैरिफ लगता है, तो अमेरिकी किसानों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ सकती हैं।

डंपिंग (Dumping) का अर्थशास्त्र और भारत पर असर

Trump Tariff on Indian Rice आम भाषा में समझें तो डंपिंग का मतलब है जब कोई देश अपने किसी उत्पाद को दूसरे देश में अपनी घरेलू कीमत या उत्पादन लागत से भी कम दाम पर बेचता है। इसका उद्देश्य दूसरे देश के मार्केट पर कब्जा करना और वहां के लोकल कॉम्पिटिशन को खत्म करना होता है।

अगर Trump Tariff on Indian Rice लागू होता है, तो इसके निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:

  1. महंगा होगा चावल: अमेरिका में भारतीय चावल (खासकर बासमती और नॉन-बासमती) की कीमतें बढ़ जाएंगी। इसका सीधा असर वहां रह रहे भारतीय समुदाय और चावल प्रेमियों की जेब पर पड़ेगा।

  2. निर्यातकों को झटका: भारत के चावल निर्यातक, जो अमेरिका को एक बड़ा बाजार मानते हैं, उनकी मांग में कमी आ सकती है। महंगा होने के कारण अमेरिकी खरीदार अन्य विकल्पों की तलाश कर सकते हैं।

  3. व्यापार युद्ध (Trade War): भारत भी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी उत्पादों (जैसे बादाम, सेब) पर टैरिफ बढ़ा सकता है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते तनावपूर्ण हो सकते हैं।

चावल के बाजार में भारत का दबदबा

वैश्विक चावल बाजार में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है:

  • ग्लोबल शेयर: दुनिया भर में होने वाले कुल चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40% है।

  • निर्यात के आंकड़े: वित्त वर्ष 2022-23 में भारत ने लगभग 15 मिलियन टन चावल का निर्यात किया था।

  • अमेरिकी बाजार: वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत ने अमेरिका को लगभग 2,81,873 टन चावल एक्सपोर्ट किया था।

भारत मुख्य रूप से दो तरह के चावल भेजता है—बासमती और गैर-बासमती। अमेरिका में भारतीय बासमती चावल की खासी मांग है। हालांकि, बासमती का सबसे बड़ा बाजार सऊदी अरब, ईरान और इराक जैसे खाड़ी देश हैं, लेकिन अमेरिका एक प्रीमियम मार्केट है जिसे कोई भी निर्यातक खोना नहीं चाहेगा।

क्या टैरिफ ही एकमात्र समाधान है?

विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रम्प का यह कदम अमेरिकी किसानों को लुभाने के लिए राजनीतिक हो सकता है, लेकिन आर्थिक रूप से इसके परिणाम जटिल हो सकते हैं। यदि Trump Tariff on Indian Rice हकीकत बनता है, तो यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भी चुनौती का विषय बन सकता है। फिलहाल, भारत सरकार और निर्यातक इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। क्या भारत कूटनीतिक बातचीत से इस टैरिफ को रुकवा पाएगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।


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Aakash Sharma
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