Neemuch Tractor Theft: बघाना मंडी से चोरी, उज्जैन से गिरफ्तारी; 36 घंटे में पुलिस ने ऐसे सुलझाई 10 लाख की चोरी की गुत्थी

नीमच। कृषि उपज मंडी बघाना, जो किसानों और व्यापारियों की हलचल का केंद्र मानी जाती है, वहां दिनदहाड़े हुई एक वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। लेकिन, नीमच पुलिस ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक मुखबिरी के तालमेल से जिस तरह Neemuch Tractor Theft (नीमच ट्रैक्टर चोरी) का पर्दाफाश किया, वह काबिले तारीफ है। महज 36 घंटों के भीतर न केवल 10 लाख रुपये का मशरूका बरामद कर लिया गया, बल्कि चोरों को उज्जैन जिले के बड़नगर से दबोच लिया गया।
यह Neemuch Tractor Theft मामला सिर्फ एक वाहन चोरी का नहीं, बल्कि पुलिस की त्वरित कार्यप्रणाली और साइबर सेल की सक्रियता का एक बेहतरीन उदाहरण है। एसपी अंकित जायसवाल के ‘जीरो टॉलरेंस’ निर्देश और थाना प्रभारी राधेश्याम दांगी की रणनीतिक घेराबंदी ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
दिनदहाड़े वारदात: जब मंडी में मचा हड़कंप
Neemuch Tractor Theft घटना 16 दिसंबर 2025 की है। जावद थाना क्षेत्र के ग्राम चडौल निवासी किसान सुनील धाकड़ अपने साथियों के साथ मूंगफली की फसल बेचने नीमच की बघाना मंडी आए थे। उनके पास स्वराज कंपनी का नीला ट्रैक्टर (क्रमांक MP-44-M-9119) और केसरिया रंग की पट्टी वाली ट्रॉली थी।
सुबह करीब 9:00 बजे मंडी पहुंचने के बाद, उन्होंने अपनी उपज बेची। दोपहर करीब 12:30 बजे, सुनील ने अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली मंडी में गायत्री कॉम्प्लेक्स के सामने खड़ा किया और फोटोकॉपी करवाने चले गए। मंडी की भीड़भाड़ में किसी को अंदाजा नहीं था कि चोर इसी मौके की तलाश में थे।
महज आधे घंटे बाद, जब दोपहर 1:00 बजे सुनील वापस लौटे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस जगह उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई का साधन खड़ा किया था, वहां अब खाली जमीन थी। उन्होंने आसपास तलाश की, साथियों से पूछा, लेकिन ट्रैक्टर का कहीं पता नहीं चला। यह स्पष्ट हो चुका था कि कोई अज्ञात बदमाश दिनदहाड़े ट्रैक्टर उड़ा ले गया है। पीड़ित ने तुरंत बघाना थाने पहुंचकर Neemuch Tractor Theft रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस का एक्शन प्लान: हाईवे से लेकर टोल नाकों तक बिछा जाल
Neemuch Tractor Theft की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक (SP) अंकित जायसवाल ने इसे गंभीरता से लिया। संपत्ति संबंधी अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवलसिंह सिसोदिया और सीएसपी किरण चौहान के मार्गदर्शन में तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया गया। बघाना थाना प्रभारी राधेश्याम दांगी ने कमान संभाली और टीम को अलग-अलग दिशाओं में रवाना किया।
चुनौती बड़ी थी क्योंकि चोरों के पास भागने के लिए कई रास्ते थे। पुलिस ने पारंपरिक जांच के साथ-साथ ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ खंगालने शुरू किए।
CCTV सर्विलांस: पुलिस टीमों ने मंदसौर और रतलाम हाईवे के टोल टैक्स कैमरों को खंगालना शुरू किया।
रूट ट्रैकिंग: संदिग्धों के भागने के संभावित रास्तों पर स्थित पेट्रोल पंपों और ढाबों के फुटेज चेक किए गए।
एक गलती और साइबर सेल का प्रहार
अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक गलती जरूर करता है। इस मामले में भी वही हुआ। पुलिस टीम जब सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही थी, तो उन्हें दो संदिग्ध व्यक्ति चोरी गए ट्रैक्टर-ट्रॉली को लेकर बड़नगर (उज्जैन) की तरफ जाते हुए दिखाई दिए।
लेकिन सबसे अहम सुराग मिला रुनिजा-बड़नगर रोड स्थित ‘शिव शक्ति पेट्रोल पंप’ से। मुखबिर तंत्र और तकनीकी जांच में पता चला कि आरोपियों ने वहां ट्रैक्टर में डीजल डलवाया है। डीजल के भुगतान के लिए आरोपियों ने नकद राशि के बजाय ‘PhonePe’ (ऑनलाइन ट्रांजैक्शन) का इस्तेमाल किया।
यहीं से नीमच साइबर सेल, विशेषकर प्रधान आरक्षक प्रदीप शिंदे और उनकी टीम का रोल शुरू हुआ। उस डिजिटल पेमेंट की डिटेल निकाली गई, जिससे आरोपियों की पहचान और लोकेशन ट्रेस हो गई।
36 घंटे में ‘गेम ओवर’: बड़नगर से दबोचे गए आरोपी
Neemuch Tractor Theft साइबर सेल से मिली सटीक लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए बड़नगर क्षेत्र में दबिश दी। 16 दिसंबर को हुई चोरी का खुलासा 18 दिसंबर तक कर दिया गया। पुलिस ने घेराबंदी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया:
अल्ताफ पिता याकूब (25 वर्ष), निवासी ग्राम उमरिया, थाना बड़नगर, जिला उज्जैन।
गोपाल पिता कालु भील (20 वर्ष), निवासी ग्राम गोदडिया, थाना बामनिया, जिला झाबुआ।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी गया स्वराज ट्रैक्टर और ट्रॉली (कीमत लगभग 10 लाख रुपये) बरामद कर लिया। पूछताछ में एक अन्य साथी का नाम भी सामने आया है, जिसकी तलाश जारी है।
सराहनीय भूमिका
इस हाई-प्रोफाइल Neemuch Tractor Theft केस को सुलझाने में थाना प्रभारी राधेश्याम दांगी के नेतृत्व में पूरी टीम ने दिन-रात एक कर दिया। टीम में उ.नि. आर.के. सिंघावत, सउनि सुनील सिंह, आनंद निषाद, प्रधान आरक्षक दिलीप जाट, कैलाश चौधरी, मनोज ओझा, मोनवीर सिंह और आरक्षक ओमप्रकाश, पंकज, दीपेश, चेतन, रोहित, कारूलाल, गिरधारी लाल शामिल थे। वहीं, साइबर सेल से प्रदीप शिंदे, लखन सिंह और कुलदीप सिंह की तकनीकी सहायता ने इस केस को अंजाम तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
पुलिस की इस सफलता ने न केवल पीड़ित किसान के चेहरे पर मुस्कान लौटाई है, बल्कि अपराधियों में यह संदेश भी दिया है कि नीमच पुलिस की पहुंच से बचना अब आसान नहीं है।
यह भी पढ़ें: घासुंडी फंटे पर 1 भीषण हादसा, बेकाबू कार ने बाइक सवार को रौंदा; अस्पताल ले जाते समय बुजुर्ग ने तोड़ा दम

