38 करोड़ की जमीन मुक्त: नीमच में चला अतिक्रमण हटाओ अभियान, 4.80 हेक्टेयर भूमि आजाद

अतिक्रमण हटाओ अभियान

अतिक्रमण हटाओ अभियान

नीमच (ब्यूरो रिपोर्ट): अतिक्रमण हटाओ अभियान शहर के बहुचर्चित इलाके डाकबंगले के सामने शुक्रवार की सुबह भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। जिला प्रशासन और नगर पालिका ने संयुक्त रूप से अब तक का सबसे बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाते हुए करीब 38 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को मुक्त करा लिया है। वर्षों से इस बेशकीमती जमीन पर रसूखदारों का कब्जा था, जिसे हटाने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी।

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सुबह-सुबह भारी पुलिस बल के साथ दबिश

कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन ने इस कार्रवाई को बेहद गोपनीय रखा। शुक्रवार तड़के ही जेसीबी, पोकलेन मशीनें और पुलिस की गाड़ियों का काफिला डाकबंगले क्षेत्र की ओर कूच कर गया। जैसे ही अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू हुआ, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

अतिक्रमण हटाओ अभियान के मौके पर अतिरिक्त कलेक्टर श्री कनेश, तहसीलदार, और नगर पालिका सीएमओ दुर्गा बामनिया अपने दल-बल के साथ मौजूद थे। प्रशासन ने सबसे पहले बगीचा नंबर 38 और खेत नंबर 10 की कुल 4 हेक्टेयर 80 आरी भूमि की घेराबंदी की। इसके बाद वहां बने अवैध निर्माणों, टीन शेड्स और बाउंड्री वाल्स को जमींदोज करने की कार्रवाई शुरू की गई।

38 करोड़ की जमीन पर था ‘आंजना’ और अन्य का कब्जा

सूत्रों के मुताबिक, शहर के बीचों-बीच स्थित इस जमीन का बाज़ार मूल्य लगभग 38 करोड़ रुपये है। इस जमीन पर लंबे समय से आंजना परिवार और अन्य रसूखदार लोगों का कब्जा बताया जा रहा था। सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन नगर पालिका के स्वामित्व की है, लेकिन मौके पर लोगों ने अपने निजी उपयोग के लिए पक्के निर्माण तक कर लिए थे।

इस अतिक्रमण हटाओ अभियान के जरिए प्रशासन ने न केवल जमीन खाली कराई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कार्रवाई के दौरान जमीन के बड़े हिस्से पर खेती और व्यावसायिक गतिविधियों के सबूत भी मिले, जिन्हें प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया।

नोटिस का जवाब नहीं दिया, तो चला बुलडोजर

 

अतिक्रमण हटाओ अभियान कार्रवाई के दौरान मीडिया से बात करते हुए नगर पालिका सीएमओ दुर्गा बामनिया ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने नियमों का पूरा पालन किया है। उन्होंने बताया,

“हमने संबंधित कब्जाधारियों को कई बार नोटिस जारी किए थे। उनसे जमीन के दस्तावेज मांगे गए थे और कब्जा हटाने को कहा गया था। लेकिन, जब उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और कब्जा नहीं हटाया गया, तो हमें मजबूरन यह अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाना पड़ा।”

सीएमओ ने बताया कि अब इस जमीन पर नगर पालिका के स्वामित्व का बोर्ड लगा दिया गया है और भविष्य में यहां किसी भी तरह के अवैध कब्जे को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

हल्का विरोध, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे पस्त

जैसे ही प्रशासन का बुलडोजर चला, कुछ स्थानीय लोगों और कब्जाधारियों ने विरोध करने की कोशिश की। माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हुआ, लेकिन मौके पर मौजूद तीनों थानों के पुलिस बल ने स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया। पुलिस की सख्ती देख विरोध करने वाले पीछे हट गए और कार्रवाई बदस्तूर जारी रही। प्रशासन की इस मुस्तैदी ने सुनिश्चित किया कि यह अतिक्रमण हटाओ अभियान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो।

बाउंड्री वॉल और फेंसिंग का काम शुरू

अक्सर देखा जाता है कि अतिक्रमण हटने के कुछ दिन बाद दोबारा कब्जा हो जाता है। इससे निपटने के लिए प्रशासन ने इस बार “प्लान बी” भी तैयार रखा था। जमीन खाली होते ही नगर पालिका की टीम ने वहां प्री-कास्ट बाउंड्री वॉल (Pre-cast Boundary Wall) लगाने का काम शुरू कर दिया है। जमीन के चारों ओर फेंसिंग की जा रही है ताकि इसे सुरक्षित रखा जा सके।

शहर में और भी जगह चलेगा अभियान

प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। शहर में कई अन्य स्थानों पर भी सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे चिन्हित किए गए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में शहर के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह का सख्त अतिक्रमण हटाओ अभियान देखने को मिलेगा। भू-माफियाओं में इस कार्रवाई के बाद से खौफ का माहौल है।


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