रतनगढ़ (प्रदीप तिवारी)| रतनगढ़ स्थित बरेखण गौशाला में चल रही सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। जैसे ही कृष्ण जन्म प्रसंग शुरू हुआ, पूरा पंडाल “जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा।
यह आयोजन श्री शंभू दयाल शर्मा एवं हिम्मत सिंह यादव परिवार द्वारा कराया जा रहा है। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म और संस्कारों से जुड़ी सीख प्राप्त की। कथा वाचक पंडित कमलकिशोर नागर ने अपने प्रवचनों में कहा कि
आज लोग डॉक्टर और वकील की बात तुरंत मान लेते हैं, लेकिन जब संत-महात्मा जीवन सुधारने की बात कहते हैं तो उसे अनदेखा कर देते हैं। जबकि सच्चे संतों के मार्गदर्शन से ही जीवन का कल्याण संभव होता है।
उन्होंने कहा कि मां, महात्मा और परमात्मा तीनों जीवन के सबसे बड़े आधार हैं। मां संस्कार देती है, महात्मा सही दिशा दिखाते हैं और परमात्मा मनुष्य को मोक्ष का मार्ग प्रदान करते हैं। लेकिन आज का मनुष्य इन तीनों के महत्व को समझने में पीछे रह गया है।
भागवत कथा के दौरान पं. नागर ने सरल उदाहरण देकर श्रद्धालुओं को भक्ति का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि
जिस प्रकार बिना नाम बताए किसी दुकान से सामान नहीं मिल सकता, उसी तरह बिना भगवान का नाम लिए उसकी कृपा प्राप्त नहीं होती। उन्होंने कहा कि लोग समय बदलने के लिए घड़ी बदलते हैं, लेकिन असली परिवर्तन भगवान की शरण में जाने से आता है।
कथा में गुरु की महिमा पर भी विशेष प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि गुरु के वचन जीवन का सबसे बड़ा सत्य होते हैं। जो व्यक्ति गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, उसका जीवन सफल हो जाता है। साथ ही उन्होंने राम नाम और सत्य के महत्व को बताते हुए लोगों को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी।
प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य को दोषों से दूर रहकर सरल और निष्कलंक जीवन जीना चाहिए। दुखी होकर जीवन बिताना स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन दोषी बनकर नहीं। उन्होंने लोगों से अवगुणों को छोड़कर सद्गुण अपनाने का आह्वान किया।
भागवत कथा में बाल संत गोविंद हाटकेश नागर ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति, त्याग और पुण्य कभी व्यर्थ नहीं जाते। उन्होंने लकड़ी का उदाहरण देते हुए बताया कि उसका हर रूप किसी न किसी काम आता है, उसी तरह सच्चे मन से की गई भक्ति भी एक दिन अवश्य फल देती है।
कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान महिलाओं और युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए। आयोजन समिति द्वारा अंत में आरती और प्रसादी वितरण किया गया। धार्मिक माहौल से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है और भागवत कथा लगातार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
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