India EU FTA Deal: भारत-यूरोपीय संघ में ऐतिहासिक समझौता; अब लग्जरी कारों से लेकर दवाओं तक सब होगा सस्ता
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
27 जनवरी 2026, (अपडेटेड 21 मार्च 2026, 10:40 अपराह्न IST)

नई दिल्ली/ब्रसेल्स (India EU FTA Deal): भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आर्थिक संबंधों के एक नए युग की शुरुआत करते हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगा दी है। 18 वर्षों के लंबे इंतजार और दर्जनों दौर की कठिन वार्ताओं के बाद, 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान इस India EU FTA Deal का आधिकारिक ऐलान किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ करार देते हुए स्पष्ट किया कि यह India EU FTA Deal न केवल दो क्षेत्रों के बीच व्यापार बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में चीन जैसी शक्तियों पर निर्भरता को भी कम करेगा।

टैरिफ की दीवारें गिरीं: कारों और शराब के शौकीनों के लिए बड़ी खबर

इस India EU FTA Deal का सबसे सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है। अब तक यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों (जैसे BMW, मर्सिडीज, ऑडी) पर भारत में लगभग 110% का भारी-भरकम आयात शुल्क (Import Duty) लगता था। नई डील के तहत इसे घटाकर महज 10% करने पर सहमति बनी है। हालांकि, घरेलू उद्योगों को सुरक्षा देने के लिए प्रति वर्ष 2.5 लाख खिलाड़ियों का एक कोटा निर्धारित किया गया है।

शराब और प्रीमियम वाइन के बाजार में भी बड़ी क्रांति आने वाली है। वर्तमान में यूरोपीय शराब पर 150% तक का टैरिफ लगता है, जिसे इस समझौते के बाद घटाकर 20 से 30% के दायरे में लाया जाएगा। इसी तरह, बीयर पर लगने वाले 110% शुल्क को अब सीधे 50% कर दिया गया है। इससे न केवल प्रीमियम उत्पादों की कीमतें गिरेंगी, बल्कि भारत के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी।

India EU FTA Deal
उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा का पीएम मोदी ने स्वागत किया। इस दौरान तीनों लीडर दोस्तों की तरह हाथ मिलाते नजर आए।
India EU FTA Deal
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास से मुलाकात की।

किचन से लेकर क्लीनिक तक: क्या-क्या होगा सस्ता?

India EU FTA Deal के दायरे में सिर्फ विलासिता की वस्तुएं ही नहीं, बल्कि आम आदमी की जरूरतें भी शामिल हैं। समझौते के अनुसार, यूरोपीय संघ से आने वाले 90% से अधिक उत्पादों पर या तो टैक्स खत्म कर दिया गया है या उनमें भारी कटौती की गई है।

  • खाद्य उत्पाद: जैतून का तेल (Olive Oil), मार्जरीन और विभिन्न वनस्पति तेलों पर अब ‘जीरो टैक्स’ लगेगा। इसके अलावा फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड भी सस्ते होंगे।

  • मेडिकल और हेल्थकेयर: दवाओं और सर्जिकल उपकरणों पर लगने वाले 11% तक के शुल्क को काफी हद तक समाप्त कर दिया गया है। इससे भारत में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हो सकती हैं।

  • इंडस्ट्रियल कच्चे माल: मशीनरी पर लगने वाला 44% और केमिकल्स पर लगने वाला 22% टैक्स अब इतिहास की बात हो जाएगी। इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत कम होगी और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।

भू-राजनीतिक समीकरण और रोजगार के अवसर

प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई इस वार्ता का एक बड़ा पहलू रोजगार भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस India EU FTA Deal के चलते 2032 तक भारत को होने वाला यूरोपीय निर्यात दोगुना हो जाएगा। इससे भारत में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। विशेष रूप से एयरोस्पेस और विमानन क्षेत्र में टैरिफ ‘0’ होने से भारतीय एविएशन सेक्टर को ग्लोबल हब बनने में मदद मिलेगी।

इस India EU FTA Deal का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा ‘इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEEC) को मजबूती देना है। यह कॉरिडोर न केवल व्यापारिक दूरी कम करेगा बल्कि रणनीतिक रूप से भारत को यूरोप के और करीब लाएगा। यूरोपीय संघ ने यह भी घोषणा की है कि वह भारत को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में मदद करने के लिए अगले दो वर्षों में 500 मिलियन यूरो की सहायता प्रदान करेगा।

एंटोनियो कोस्टा का भारत से भावुक जुड़ाव

सम्मेलन के दौरान एक भावुक पल तब आया जब यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने खुद को ‘प्रवासी भारतीय’ (OCI कार्ड धारक) बताया। उन्होंने गर्व से कहा कि उनकी जड़ें गोवा में हैं और यह India EU FTA Deal उनके लिए केवल एक आधिकारिक समझौता नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत उपलब्धि जैसा है। उनका यह बयान भारत और यूरोप के बीच सांस्कृतिक और भावनात्मक सेतु का काम करता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, यह India EU FTA Deal भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है। जहां एक ओर भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप के विशाल बाजार के दरवाजे खुलेंगे, वहीं दूसरी ओर भारतीय उपभोक्ताओं को वैश्विक स्तर के उत्पाद किफायती दामों पर उपलब्ध होंगे। टैक्स में होने वाली इस कटौती से यूरोपीय निर्यातकों को हर साल लगभग 4 अरब यूरो की बचत होने का अनुमान है, जिसका एक बड़ा हिस्सा निवेश के रूप में वापस भारत आने की उम्मीद है।


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Aakash Sharma
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