मनासा (नीमच)। सरकारी सिस्टम की लालफीताशाही और अधिकारियों की मनमानी किस कदर एक आम आदमी को दशकों तक परेशान कर सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण मनासा तहसील के ग्राम देवरी खवासा में देखने को मिला है। मनासा PWD सड़क विवाद अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है, जहां 25 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद एक पीड़ित किसान ने सिस्टम को घुटनों पर ला दिया है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा एक किसान की निजी जमीन पर जबरन सड़क बनाने के इस पुराने मामले में न्यायालय के आदेश के बाद पीड़ित ने अपना हक वापस ले लिया है। न्याय मिलने पर किसान ने बीच सड़क पर लोहे के एंगल गाड़ दिए हैं और तार से फेंसिंग कर दी है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि मनासा-आंतरी माता मुख्य मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है और प्रशासन अब भी मूकदर्शक बना हुआ है।
पीएमजीएसवाई और प्रशासन की ‘जबरन’ विकास नीति
विकास के नाम पर किसी आम नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन कैसे होता है, यह देवरी खवासा का मामला साफ बयां करता है। बात साल 2002 की है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत ग्रामीण इलाकों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा था। इसी दौरान PWD के अधिकारियों ने बिना किसी वैध अधिग्रहण प्रक्रिया के स्थानीय किसान घासीराम शर्मा की निजी कृषि भूमि पर बुल्डोजर चला दिया और वहां से सड़क निकाल दी।
तत्कालीन समय में घासीराम शर्मा ने अधिकारियों के सामने खूब गुहार लगाई। आपत्तियां दर्ज कराई गईं, लेकिन सत्ता और रसूख के नशे में चूर PWD अधिकारियों ने एक गरीब किसान की आवाज को पूरी तरह अनसुना कर दिया। यह केवल एक जमीन का टुकड़ा छिनने का मामला नहीं था, बल्कि यह सिस्टम द्वारा एक नागरिक के अधिकारों को कुचलने का सीधा प्रयास था।
25 सालों का वो काला अध्याय: एक पीढ़ी गुजर गई न्याय की आस में
जब प्रशासनिक दरवाजे बंद हो गए, तो घासीराम शर्मा ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया। यहां से शुरू हुई एक ऐसी कानूनी मैराथन, जिसने एक पूरी पीढ़ी का समय लील लिया।
2002 से 2013 तक का संघर्ष (पहला फैसला): सिविल कोर्ट मनासा में मामला दायर किया गया। पेशियों पर पेशियां पड़ीं। करीब 11 साल की लंबी जिरह और सबूतों के अवलोकन के बाद 2013 में कोर्ट ने किसान घासीराम के पक्ष में फैसला सुनाया। लेकिन विडंबना देखिए, कोर्ट के आदेश के बावजूद रसूखदार अधिकारियों ने फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दीं। डिक्री का पालन नहीं कराया गया।
2018 का वह दौर जब बेटे ने थामी पिता की मशाल: न्याय की आस में लड़ते-लड़ते मूल फरियादी घासीराम शर्मा का निधन हो गया। वह अपनी आंखों से अपनी जमीन वापस मिलते नहीं देख सके। इसके बाद उनके वारिस बेटे नरहरि शर्मा ने इस कानूनी लड़ाई को अपर सत्र न्यायालय में चुनौती दी। यह सिर्फ जमीन की लड़ाई नहीं रह गई थी, यह पिता के सम्मान और सिस्टम से आर-पार की जंग बन चुकी थी।
उल्टे चोर कोतवाल को डांटे: 2023 की प्रशासनिक ज्यादती
साल 2023 में प्रशासन की बेशर्मी अपने चरम पर पहुंच गई। न्यायालयीन विवाद के लंबित रहने के बावजूद PWD ने उस विवादित सड़क की रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया। जब नरहरि शर्मा ने न्यायालय के पुराने आदेशों का हवाला देकर इस अवैध निर्माण को रोकने की कोशिश की, तो विभाग ने अपनी गलती सुधारने के बजाय अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल किया।
प्रशासन ने उल्टे नरहरि शर्मा पर ही ‘शासकीय कार्य में बाधा’ डालने का पुलिस मुकदमा दर्ज करा दिया। यह कदम साफ तौर पर किसान को डराने और केस वापस लेने का दबाव बनाने के लिए उठाया गया था।
न्यायालय का अंतिम अल्टीमेटम और किसान का ‘हल्ला बोल’
प्रशासनिक ज्यादतियों को देखते हुए न्यायालय ने अंततः बेहद सख्त रुख अख्तियार किया। अप्रैल 2026 में कोर्ट ने प्रशासन को अंतिम अल्टीमेटम देते हुए 3 मई 2026 तक हर हाल में पीड़ित किसान को उसकी जमीन का आधिपत्य सौंपने का स्पष्ट आदेश दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में यह साफ कर दिया कि यदि प्रशासन समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं करता है, तो पीड़ित किसान खुद अपनी जमीन पर कब्जा लेने के लिए स्वतंत्र होगा।
यही वह टर्निंग पॉइंट था जिसने पूरी कहानी पलट दी। 3 मई की डेडलाइन गुजर जाने के बाद भी प्रशासन ने अपनी चिर-परिचित सुस्ती दिखाई। कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद फरियादी नरहरि शर्मा ने कोर्ट की डिक्री के तहत खुद ही अपनी जमीन पर कब्जा कर लिया। उन्होंने बीच सड़क पर लोहे के मोटे एंगल गाड़ दिए, मिट्टी डाल दी और तार फेंसिंग कर दी।
देवरी खवासा-आंतरी माता मार्ग: पिस रही आम जनता
अधिकारियों की हठधर्मिता और समय पर कोर्ट के आदेशों का पालन न करने का सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। देवरी खवासा से आंतरी माता को जोड़ने वाला यह मुख्य मार्ग है। फेंसिंग के कारण अब यहां से केवल बाइक और कार ही रेंग कर निकल पा रहे हैं।
इस रूट पर चलने वाली यात्री बसों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद हो गया है। इन वाहनों को अब अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे न केवल लोगों का समय और पैसा बर्बाद हो रहा है, बल्कि क्षेत्र के व्यापार और रोजमर्रा की आवाजाही पर भी गहरा असर पड़ा है।
समाधान क्या है और आगे क्या?
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि गलती पूरी तरह प्रशासन की है। जब कोर्ट ने 3 मई का समय दिया था, तो प्रशासन नींद में क्यों था? अब जब किसान ने अपना कानूनी हक ले लिया है, तो प्रशासन को चाहिए कि वह सड़क के सामने मौजूद सरकारी जमीन से रसूखदारों का अतिक्रमण हटाए और तुरंत नया मार्ग चालू करे।
यह मनासा PWD सड़क विवाद हर उस नागरिक के लिए एक मिसाल है जो सरकारी तंत्र के आगे खुद को बेबस महसूस करता है। देखना यह है कि अब मनासा प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए जोर-जबर्दस्ती करता है या न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए कोई जनहितैषी बीच का रास्ता निकालता है।
किसका क्या कहना है?
नरहरि शर्मा (फरियादी किसान): “सिस्टम ने मेरे पिता की जान ले ली, लेकिन हमने हार नहीं मानी। कोर्ट का फैसला मेरे पक्ष में है। मैंने आम जनता की परेशानी को ध्यान में रखते हुए अपनी 4 आरी जमीन में से केवल 2 आरी पर ही फेंसिंग की है, ताकि छोटे वाहन निकल सकें। सड़क के ठीक सामने सरकारी जमीन पड़ी है, जिस पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। प्रशासन चाहे तो वहां से अतिक्रमण हटाकर आसानी से नया रास्ता निकाल सकता है, लेकिन वे ऐसा करने के बजाय मुझे ही परेशान कर रहे हैं।”
नीरज अमलावर (SDO, PWD मनासा): अधिकारियों के पास अब भी ठोस जवाब नहीं है। नीरज अमलावर का कहना है, “हमें हाईकोर्ट से इस मामले में स्टे मिल गया है।” (हालांकि, जब उनसे आदेश की कॉपी मांगी गई, तो वे इसे प्रस्तुत नहीं कर सके)। उन्होंने आगे कहा, “हम जल्द ही एसडीएम के मार्गदर्शन और पुलिस बल की मदद से खंभे हटाकर फेंसिंग हटाने की कार्रवाई करेंगे।”
किरण आंजना (SDM, मनासा): प्रशासनिक अमला अभी भी ‘देख रहे हैं’ वाले मोड में है। एसडीएम किरण आंजना ने कहा, “यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। न्यायालय का जो भी अंतिम और वैधानिक आदेश होगा, प्रशासन उसका अक्षरशः पालन सुनिश्चित करवाएगा।”
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1: मनासा PWD सड़क विवाद क्या है?
A: यह 2002 का मामला है जहां PWD ने देवरी खवासा में एक किसान की निजी जमीन पर जबरन सड़क बना दी थी। 25 साल बाद कोर्ट ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया है।
Q2: किसान ने बीच सड़क पर एंगल क्यों गाड़ दिए?
A: न्यायालय ने प्रशासन को 3 मई 2026 तक किसान को जमीन का कब्जा सौंपने का आदेश दिया था। प्रशासन के कार्रवाई न करने पर किसान ने कोर्ट के आदेशानुसार खुद अपनी जमीन पर फेंसिंग कर ली।
Q3: देवरी खवासा-आंतरी माता मार्ग बंद होने से क्या असर पड़ा है?
A: मुख्य मार्ग बंद होने से भारी वाहनों और यात्री बसों को आवाजाही के लिए करीब 10 किलोमीटर का लंबा अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे आम जनता भारी परेशान है।
Q4: क्या PWD के पास इस मामले में हाईकोर्ट का स्टे है?
A: PWD के SDO का दावा है कि उनके पास स्टे है, लेकिन उन्होंने मीडिया या फरियादी को अब तक कोर्ट के आदेश की कोई कॉपी नहीं दिखाई है।
Q5: इस समस्या का त्वरित समाधान क्या हो सकता है?
A: स्थानीय लोगों और फरियादी के अनुसार, विवादित सड़क के ठीक सामने सरकारी जमीन मौजूद है। प्रशासन वहां से अतिक्रमण हटाकर आसानी से नया रास्ता बना सकता है।
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