मंदसौर (Mandsaur News): मंदसौर गांधी चौराहे पर मल्हारगढ़ तहसील के ग्राम खड़पाल्या निवासी एक परिवार रविवार से दोबारा अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा हुआ है। परिवार का आरोप है कि उनकी पैतृक कृषि भूमि पर गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर रखा है और प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला। सोमवार तक भी धरना जारी रहा और परिवार ने समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
धरने पर बैठे परिवार का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी के विरोध में परिवार ने फिर से गांधी चौराहे पर आंदोलन शुरू किया।
पहले आश्वासन मिला, फिर दोबारा शुरू हुआ मंदसौर गांधी चौराहे पर धरना

पीड़ित परिवार शनिवार को भी गांधी चौराहे पर धरने पर बैठा था। देर रात प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और शिकायत की सुनवाई कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिवार ने धरना समाप्त कर दिया था। परिवार का आरोप है कि रविवार को उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर वे दोबारा गांधी चौराहे पहुंचे और रविवार दोपहर से पुनः अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। सोमवार तक भी प्रदर्शन जारी रहा।
रात दो बजे तक धरने पर डटा रहा परिवार

धरने पर मौजूद लोगों के अनुसार रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब दो बजे तक भी परिवार अपनी मांगों को लेकर गांधी चौराहे पर बैठा रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें उनकी जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं दिलाया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। परिवार का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को अपनी समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। इसी कारण उन्हें धरने का रास्ता अपनाना पड़ा।
प्रभावशाली लोगों पर कब्जे का आरोप
धरने पर बैठे परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक कृषि भूमि पर गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर रखा है। परिवार का कहना है कि जब भी वे अपनी जमीन पर जाने का प्रयास करते हैं, उन्हें रोका जाता है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया जाता है और डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। पीड़ितों के अनुसार उन्होंने कई बार जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई और अधिकारियों से न्याय की मांग की, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सीमांकन रिपोर्ट में भूमि अपने नाम होने का दावा
धरने पर बैठे मांगीलाल पिता उंकारलाल चमार निवासी ग्राम खड़पाल्या ने बताया कि उनकी कृषि भूमि ग्राम खड़पाल्या में सर्वे क्रमांक 258/6, रकबा 0.38 हेक्टेयर में स्थित है। मांगीलाल का कहना है कि भूमि का विधिवत सीमांकन कराया जा चुका है और सीमांकन रिपोर्ट में भूमि उनके स्वामित्व की होना दर्ज है। इसके बावजूद उन्हें जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई नहीं होने से समस्या लगातार बनी हुई है।
पंचायत पर लगाए मिलीभगत के आरोप
मांगीलाल ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत खड़पाल्या द्वारा उनकी भूमि पर पट्टे जारी कर दिए गए। उन्होंने पूर्व सरपंच और पंचायत सचिव पर मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
“तारीख पर तारीख मिल रही, समाधान नहीं”
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार तहसील कार्यालय में आवेदन दिए और तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर न्याय की मांग की। लेकिन हर बार उन्हें नई तारीख और आश्वासन ही मिले। परिवार का आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण उन्हें सार्वजनिक धरना शुरू करना पड़ा।
परिवार की प्रमुख मांगें
- पैतृक कृषि भूमि का वास्तविक कब्जा दिलाया जाए
- कथित कब्जे की प्रशासनिक जांच हो
- शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए
- सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर समाधान किया जाए
आर्थिक संकट से गुजर रहा परिवार
मांगीलाल ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है और वे लंबे समय तक अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ने की स्थिति में नहीं हैं। परिवार का कहना है कि पैतृक कृषि भूमि ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। परिवार के अनुसार संबंधित भूमि पर वर्षों से खेती होती रही है और उसी से घर का भरण-पोषण चलता था। जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण अब आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। मांगीलाल ने बताया कि उनका परिवार अनुसूचित जाति वर्ग से आता है और खेती ही आमदनी का प्रमुख स्रोत है। उनका कहना है कि यदि उन्हें जमीन का कब्जा नहीं मिला तो परिवार के सामने गंभीर आर्थिक कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं।
समाधान तक जारी रहेगा आंदोलन
धरने पर बैठे लोगों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें उनकी पैतृक भूमि का कब्जा नहीं दिलाया जाता और मामले में न्यायसंगत कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है। वहीं संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
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