MP Swamitva Yojana: 17 सितंबर से MP में बदल जाएगी जमीन की तस्वीर? 50 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री, जानिए पूरा मामला
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
15 सितम्बर 2026, (अपडेटेड 15 सितम्बर 2026, 3:56 अपराह्न IST)

भोपाल/नीमच : मध्य प्रदेश में MP Swamitva Yojana के तहत आबादी भूमि पर काबिज 50 लाख से अधिक हितग्राहियों को जमीन और आवास का कानूनी मालिकाना हक देने की प्रक्रिया 17 सितंबर से शुरू होगी। सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा ही संकल्प अभियान के तहत गांव-गांव शिविर लगाकर मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी में है।

इस अभियान में हितग्राहियों से रजिस्ट्री और स्टाम्प ड्यूटी का शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार के अनुसार, मुफ्त रजिस्ट्री से प्रदेशभर के भू-खंडधारियों को 200 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है। रजिस्ट्री प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए कई मैदानी अधिकारियों को सब-रजिस्ट्रार के अधिकार भी दिए गए हैं।

MP Swamitva Yojana: 17 सितंबर से शुरू होगा विशेष अभियान

सरकार द्वारा 17 सितंबर से शुरू किए जा रहे अभियान के तहत आबादी क्षेत्र में मौजूद पात्र भू-खंडों की रजिस्ट्री कराकर उनके धारकों को कानूनी मालिकाना हक देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। जानकारी के मुताबिक, शुरुआत में स्वामित्व योजना के तहत करीब 48.80 लाख हितग्राही चयनित थे। अब यह संख्या 50 लाख से अधिक बताई जा रही है।

सरकार का उद्देश्य रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान बनाकर बड़ी संख्या में हितग्राहियों को उनके भू-खंड का कानूनी अधिकार उपलब्ध कराना है।

सरकार उठाएगी रजिस्ट्री और स्टाम्प ड्यूटी का खर्च

इस अभियान की प्रमुख बात यह है कि पात्र हितग्राहियों को रजिस्ट्री के लिए अलग से शुल्क नहीं देना होगा। सरकार स्वयं रजिस्ट्री और स्टाम्प ड्यूटी का खर्च वहन करेगी। जानकारी के अनुसार, प्रदेशभर में इससे भू-खंडधारियों को 200 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है।

अधिकारियों को दिए गए सब-रजिस्ट्रार के अधिकार

रजिस्ट्री की प्रक्रिया को तेज करने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग की ओर से जारी नए नोटिफिकेशन के तहत कुछ मैदानी अधिकारियों को सब-रजिस्ट्रार की शक्तियां दी गई हैं।

इसके तहत:

  • राजस्व निरीक्षक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक को संबंधित जिले में आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री के लिए अधिकार दिए गए हैं।
  • पंचायत समन्वय अधिकारी (PCO) और सहायक विकास विस्तार अधिकारी (ADEO) को उनके पदस्थ जिले के जनपद क्षेत्र में उप पंजीयक के अधिकार दिए गए हैं।
  • प्रदेश के तहसीलदारों को पहले ही स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के अधिकार दिए जा चुके हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य रजिस्ट्री के लिए अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ाकर अभियान को तेजी से आगे बढ़ाना है।

एक अधिकारी को रोज 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य

योजना की गति बढ़ाने के लिए अधिकार प्राप्त अधिकारी-कर्मचारियों के लिए प्रतिदिन कम से कम 40 रजिस्ट्रियों का लक्ष्य निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। 

राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के समक्ष योजना का प्रजेंटेशन दिया था। इसी दौरान रजिस्ट्री प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए यह लक्ष्य तय किए जाने की जानकारी दी गई। रजिस्ट्रीकर्ता के रूप में संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी का नाम दर्ज किए जाने की भी बात सामने आई है।

नीमच में पटवारियों ने किया विरोध प्रदर्शन

नीमच में ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ योजना में पटवारी को निष्पादक बनाए जाने के विरोध में जिलेभर के पटवारी एकजुट हुए। जानकारी के अनुसार, पटवारी बालाजी मंदिर पर एकत्र हुए और वहां से रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। इसके बाद उन्होंने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा। पटवारियों की आपत्ति पंजीयन विलेख में उनके नाम को निष्पादक के रूप में शामिल किए जाने को लेकर है।

पटवारियों ने जताई कानूनी सुरक्षा को लेकर चिंता

स्वामित्व योजना की प्रक्रिया को लेकर पटवारी स्तर पर विरोध की बात भी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, पटवारी इस बात का विरोध कर रहे हैं कि रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के रूप में उनका नाम दर्ज किया जाएगा।

पटवारियों का तर्क है कि भविष्य में यदि रजिस्ट्री से संबंधित कोई कानूनी विवाद सामने आता है, तो उनके कानूनी बचाव या सुरक्षा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में उन्हें अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। यह विरोध और उससे जुड़ी आगे की स्थिति उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं है।

खंडवा जिले में 1.67 लाख से ज्यादा भू-खंड

उपलब्ध जिला-स्तरीय जानकारी के अनुसार, खंडवा जिले में स्वामित्व योजना के तहत 611 गांवों के आबादी क्षेत्र का सर्वे कराया गया था। ड्रोन सर्वे के माध्यम से कुल 2,22,198 स्वामित्व भू-खंडों का रिकॉर्ड तैयार किया गया। इनमें 1,67,528 निजी आवासीय भू-खंड चिन्हित किए गए हैं, जहां लोग मकान बनाकर रह रहे हैं।

इन भू-खंडों की रजिस्ट्री के बाद संबंधित धारकों को कानूनी मालिकाना हक मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

खंडवा जिले की तहसीलवार स्थिति

तहसीलनिजी स्वामित्व भू-खंड
छैगांव माखन29,286
हरसूद8,972
खालवा25,786
खंडवा48,868
खंडवा नगर1,352
किल्लोद4,149
मूंदी10,221
पंधाना20,723
पुनासा18,171
कुल1,67,528

रजिस्ट्री से पहले ई-केवाईसी जरूरी

स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री कराने से पहले भू-खंडधारियों के लिए कुछ प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी बताया गया है।

हितग्राहियों को ये काम करने होंगे

  • समग्र पोर्टल पर समग्र ई-केवाईसी
  • भू-लेख पोर्टल पर नाम और हिस्से का परिमार्जन।
  • भू-लेख पोर्टल पर आवश्यक ई-केवाईसी।
  • सारा ऐप पर आधार आधारित प्रोफाइल अपडेट।
  • एमपी ई-सेवा ऐप से डीड तैयार करना।
  • पटवारी से डीड और संबंधित जानकारी का सत्यापन।
  • पंजीयन अधिकारी से अंतिम अनुमोदन।

डीड तैयार करने के बाद वीडियो रिकॉर्डिंग कर इसे संबंधित पटवारी के सत्यापन के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया बताई गई है। पटवारी सारा ऐप के माध्यम से डीड, चतुर्सीमा और अन्य जानकारी का सत्यापन करेगा। इसके बाद तहसीलदार और नायब तहसीलदार संपदा ऐप के माध्यम से अंतिम अनुमोदन करेंगे।

मालिकाना हक मिलने के बाद क्या फायदा होगा?

रजिस्ट्री पूरी होने के बाद भू-खंडधारियों को उनकी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक मिलने की बात कही गई है। जानकारी के अनुसार इससे भविष्य में नामांतरण और वारिसान संबंधी प्रक्रिया आसान हो सकती है। इसके अलावा बैंक से ऋण लेने और अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में भी सुविधा मिलने की जानकारी दी गई है।

खंडवा में 20 करोड़ रुपये से अधिक की बचत का अनुमान

जानकारी के अनुसार, सामान्य स्थिति में आवासीय भू-खंड की रजिस्ट्री के दौरान स्टाम्प ड्यूटी और अन्य पंजीयन शुल्क पर औसतन 10 से 12 हजार रुपये तक खर्च होने का अनुमान बताया गया है। वास्तविक राशि कलेक्टर गाइडलाइन और अन्य लागू प्रावधानों पर निर्भर करती है।

यदि औसतन 12 हजार रुपये प्रति रजिस्ट्री की दर मानें, तो खंडवा जिले के 1.67 लाख से अधिक निजी आवासीय भू-खंडों की रजिस्ट्री में 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बैठती है। हालांकि वास्तविक सरकारी खर्च रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

अभी सबसे बड़ा सवाल: पटवारियों की आपत्ति का क्या होगा?

एक तरफ सरकार 17 सितंबर से बड़े स्तर पर MP स्वामित्व योजना की मुफ्त रजिस्ट्री शुरू करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर पटवारियों ने पंजीयन दस्तावेज में उन्हें निष्पादक बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं। पटवारियों की मांग है कि उन्हें भविष्य के स्वामित्व विवादों से जुड़ी व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही से बचाने की स्पष्ट व्यवस्था की जाए और निष्पादक के रूप में उनका नाम शामिल न किया जाए।

इसलिए अब निगाह इस बात पर रहेगी कि शासन पटवारियों की आपत्तियों पर क्या निर्णय लेता है और 17 सितंबर से शुरू होने वाली रजिस्ट्री प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।

अपर कलेक्टर ने क्या बताया?

अपर कलेक्टर, खंडवा क्षितिज शर्मा के अनुसार, स्वामित्व के पट्टों की समग्र और आधार से ई-केवाईसी का काम किया जा रहा है। रजिस्ट्री की शुरुआत 17 सितंबर से होगी और इसकी तैयारियां चल रही हैं। तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आगे क्या होगा?

17 सितंबर से शुरू होने वाले अभियान में गांव-गांव शिविर लगाकर पात्र हितग्राहियों की रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों को दिए गए अतिरिक्त अधिकार और प्रतिदिन रजिस्ट्री के लक्ष्य के जरिए बड़ी संख्या में लंबित रजिस्ट्रियों को पूरा करने की कोशिश की जाएगी।


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Aakash Sharma
Aakash Sharmahttps://thetimesofmp.com
आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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